सुनिश्चित करें कि प्रौद्योगिकियां एवं हथियार भारत में विकसित और निर्मित हों: एयर मार्शल ए.पी. सिंह
प्रशांत सुरेश
- 19 Jul 2024, 08:48 PM
- Updated: 08:48 PM
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) वायुसेना उप प्रमुख एयर मार्शल ए.पी. सिंह ने शुक्रवार को कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष ने वायु, भूमि, समुद्र, साइबर, सूचना और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में विभिन्न शक्तियों के एकीकरण के महत्व को प्रदर्शित किया है, तथा यह भी दर्शाया है कि किस प्रकार वे लक्ष्य प्राप्ति के लिए “एकजुट” हैं।
उन्होंने ‘सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज’ (सीएपीएस) की एक संगोष्ठी में अपने संबोधन में यह भी कहा कि ‘आत्मनिर्भरता’ “केवल एक प्रचलित शब्द नहीं है”।
उन्होंने कहा कि यह कुछ ऐसा है जिसमें सभी हितधारकों को अपना दिल और आत्मा लगाने की जरूरत है।
एयर मार्शल सिंह ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रौद्योगिकियां और हथियार भारत में विकसित और निर्मित हों, ताकि हमें किसी बाहरी एजेंसी पर निर्भर न रहना पड़े, जो समय आने पर साथ छोड़ भी सकते हैं या हमारे देश में हथियारों के प्रवाह को रोक भी सकते हैं।”
संगठन की ओर से यहां सुब्रतो पार्क में वायु एवं मिसाइल रक्षा पर आयोजित संगोष्ठी प्रदर्शनी के दौरान कई वक्ताओं ने विश्व में चल रहे संघर्षों से सीखे गए विभिन्न सबक के बारे में भी बात की।
एयर मार्शल सिंह ने कहा, “एक बात तो निश्चित है, यदि हमें कुछ करना है, तो हमें खेल में बने रहना होगा, हमें आधुनिकीकरण करना होगा, हमें निरंतर विकास करना होगा, नवाचार करना होगा तथा हमें निरंतर आगे रहना होगा। अन्यथा हम पीछे रह जाते हैं और सिर्फ पीछे भागते रहते हैं।”
उन्होंने कहा कि लोगों के सामान्य जीवन में तीव्र गति से जो तकनीकी प्रगति देखी जा रही है, उसने “हमारे हथियारों, रक्षा प्रणालियों में भी अपनी पैठ बना ली है”।
उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले जो चीजें अकल्पनीय या अविश्वसनीय थीं, वे आज वास्तविकता हैं। उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा बलों और युद्ध पर पड़ने वाले प्रभाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमें अपने विचारों के साथ-साथ सैन्य कार्यवाहियों में भी चुस्त और लचीला होना चाहिए।’’
वायुसेना के उप प्रमुख ने वर्तमान में चल रहे ‘रूस-यूक्रेन संघर्ष का जिक्र किया जिसका दायरा काफी व्यापक है। उन्होंने कहा, ‘‘आज जो कुछ हो रहा है वह इस बात एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि भविष्य में संघर्षों में हमें किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।”
उन्होंने कहा, “इस संघर्ष ने वायु, भूमि, समुद्र, साइबर, सूचना, अंतरिक्ष के क्षेत्रों में विभिन्न शक्तियों के एकीकरण को भी प्रदर्शित किया है तथा यह भी दर्शाया है कि किस प्रकार वे लक्ष्य प्राप्ति के लिए एकजुट हैं। मुझे यकीन है कि यहां उपस्थित सभी लोग, जिनमें अन्य सेवाओं के मेरे मित्र भी शामिल हैं, इस बात से सहमत होंगे कि वायु क्षेत्र स्पष्ट रूप से एक अद्वितीय ‘ट्रांस-डोमेन’ कड़ी और सभी क्षेत्रों में मजबूत बल के रूप में उभरा है, जो बल के बहुक्षेत्रीय इस्तेमाल के लिए एक मजबूत तरीका है।”
एयर मार्शल सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि “आज की भू-राजनीति से हमने जो सबसे बड़ा सबक सीखा है, वह है आत्मनिर्भर होना”।
उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि कहा जाता है, कोई स्थायी दुश्मन या स्थायी दोस्त नहीं होता, केवल स्थायी हित होता है। इसलिए, 'आत्मनिर्भरता' केवल एक शब्द नहीं है, यह कुछ ऐसा है जिसमें हमें अपना दिल और आत्मा लगाने की जरूरत है और यह सुनिश्चित करना है कि जिन प्रौद्योगिकियों और हथियारों के बारे में हम बात कर रहे हैं वे सभी भारत में विकसित और निर्मित हों, ताकि हम किसी बाहरी एजेंसी पर निर्भर न रहें, जो समय आने पर साथ छोड़ भी सकते हैं या हमारे देश में हथियारों के प्रवाह को रोक भी सकते हैं और समय आने पर हमें मुश्किल में डाल सकती है।"
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