डीएसईयू ने फीस में छूट वापस ली, ‘फीस न भरने वाले छात्रों’ को परीक्षा से रोका
जितेंद्र सुरेश
- 19 Jul 2024, 06:07 PM
- Updated: 06:07 PM
(सुगंधा झा)
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय (डीएसईयू) ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) को फीस में दी जाने वाली 20 फीसदी छूट और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को दी जाने वाली 10 फीसदी छूट वापस ले ली। विश्वविद्यालय के इस फैसले के बाद प्रभावित विद्यार्थियों के बीच चिंता बढ़ गयी है।
कई विद्यार्थियों ने बताया कि वे सिर्फ फीस में दी जाने वाली छूट वापस लेने से ही चिंतित नहीं हैं, बल्कि हाल ही में बढ़ाई गयी फीस और फीस न दे पाने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा देने से रोकने के फैसले ने भी उनकी चिंता बढ़ा दी है।
विश्वविद्यालय के छात्र संघ ‘आवाज’ ने बताया, “डीएसईयू ने 2024-25 शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों को दी जाने वाली फीस में छूट वापस ले ली और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को छोड़कर अपने 80 से ज्यादा पाठ्यक्रमों में से ज्यादातर की फीस में नौ गुना तक की वृद्धि कर दी।”
फीस वृद्धि और एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों को दी जाने वाली छूट वापस लेने के बारे में पूछे जाने पर डीएसईयू के कुलपति अशोक कुमार नागावत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि विश्वविद्यालय के पास धन की कमी और वित्तीय बोझ को ध्यान में रखते हुए वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी, जिसके बाद फीस में वृद्धि की गयी।
उन्होंने बताया कि समिति की अगली बैठक 31 जुलाई को होगी और बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
वेबसाइट पर उपलब्ध बुलेटिन के अनुसार, बैचलर ऑफ ऑप्टोमेट्री के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की फीस 2023-2024 में 29,700 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर लगभग 1.10 लाख रुपये प्रति वर्ष (अन्य वार्षिक शुल्क सहित) कर दिया गया।
वहीं बीएससी डेटा एनालिटिक्स (पिछली फीस 41,580 रुपये) और बैचलर ऑफ कंप्यूटर साइंस (पिछली फीस 34,940 रुपये) जैसे अन्य पाठ्यक्रमों में भी फीस में इतनी ही वृद्धि की गई है।
बुलेटिन के मुताबिक, “फीस में 10 फीसदी की वार्षिक वृद्धि की जाएगी। छमाही फीस उसी आधार पर निर्धारित होगी।”
छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि 17 जून को विश्वविद्यालय ने फीस न दे पाने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों की एक सूची जारी कर उन्हें अंतिम सत्र की परीक्षा में बैठने और कक्षाएं लेने से रोक दिया।
‘आवाज’ ने दावा किया कि यह सूची प्रशासन के आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप पर जारी की गई, जिसे संबंधित परिसर निदेशकों ने विद्यार्थियों के साथ साझा किया।
कई विद्यार्थियों ने फीस में बढ़ोतरी तथा छूट खत्म किये जाने से परेशानी और बढ़ने की शिकायत की।
डीएसईयू के एक परिसर में एससी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक विद्यार्थी ने बताया, “मेरे पिता दिहाड़ी मजदूरी का काम किया करते थे, लेकिन अब वह बूढ़े हो चुके हैं, जिसके कारण काम करने में असमर्थ हैं। मेरी मां एक दिव्यांग महिला हैं और मेरा छोटा भाई भी अभी पढ़ाई कर रहा है। इसलिए मेरे परिवार में कोई और कमाने वाला नहीं है।”
उसने बताया, “मैंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएससीएफडीसी) से ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसमें बहुत वक्त लग रहा है। शायद, इसलिए मुझे कॉलेज छोड़ना पड़ेगा।”
एक अन्य विद्यार्थी ने दावा किया, “फीस न दे पाने की वजह से पिछले महीने मुझे परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। मेरे परिवार ने किसी तरह लोगों से पैसे उधार लेकर फीस का इंतजाम किया। अब विश्वविद्यालय ने मुझसे अगले सेमेस्टर के लिए और 28,500 रुपये जमा कराने को कहा है। मैं कैसे इंतजाम करूं।”
उसने कहा, “मैं प्रशासन से अनुरोध करना चाहता हूं कि पढ़ाई जारी रखने के लिए मुझे फीस में छूट दी जाए या फिर छात्रवृत्ति दी जाए।”
कुलपति नागावत ने बताया, “हमने कुछ पाठ्यक्रमों की फीस बढ़ाई है, खासकर उन पाठ्यक्रमों की, जिनकी बाजार में काफी मांग है, जैसे कंप्यूटर विज्ञान और डेटा एनालिटिक्स ताकि विद्यार्थियों का खर्च पूरा किया जा सके।”
उन्होंने कहा, “हम धन की कमी का सामना कर रहे हैं और फीस में वृद्धि से हम अपने संस्थानों को अन्य कौशल-आधारित संस्थानों के बराबर लाने व विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने में सक्षम होंगे। हमारे कई पाठ्यक्रमों के लिए विशेष सेट अप, प्रयोगशालाओं और मशीनों की आवश्यकता होती है। इन सुविधाओं को प्रदान करने के लिए धन का उपयोग किया जाएगा।”
नागावत ने कहा, “अगर आप हमारी फीस संरचना की तुलना कौशल क्षेत्र के अन्य विश्वविद्यालयों से करते हैं तो स्पष्ट होता है कि हम दूसरों की तुलना में बहुत सस्ते पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं।”
भाषा जितेंद्र