डीजीपी ने अधिकारियों को कारोबारियों के खिलाफ निराधार मुकदमा दर्ज ना करने की हिदायत दी
सलीम संतोष
- 18 Jul 2024, 09:37 PM
- Updated: 09:37 PM
लखनऊ, 18 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने बृहस्पतिवार को पुलिस अधिकारियों को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर कारोबारियों के खिलाफ निराधार मुकदमा दर्ज ना करने की हिदायत दी।
उन्होंने कहा कि निराधार मुकदमे दर्ज होना सरकार की नीति के खिलाफ है। सरकार उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए उन्हें राज्य में आमंत्रित कर रही है मगर ऐसी घटनाएं उन्हें प्रदेश में निवेश करने के प्रति हतोत्साहित करती हैं।
डीजीपी ने सभी जोनल एडीजी/पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को जारी निर्देशों में उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर उद्यमियों/निर्दोष व्यक्तियों के खिलाफ निराधार मुकदमे दर्ज न करने का निर्देश दिया।
उन्होंने निर्देशों में कहा, ''न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करना और निर्दोष व्यक्तियों, खासकर उद्यमियों के खिलाफ निराधार मुकदमे दर्ज करना सरकार की उद्यमियों को राज्य में आमंत्रित करने और एमएसएमई को बढ़ावा देने की नीति के खिलाफ है। ऐसी घटनाएं व्यापारियों को यूपी में निवेश करने से हतोत्साहित कर सकती हैं।''
कुमार ने कहा कि समय-समय पर विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने विभिन्न स्तरों पर तथ्य पेश किए हैं कि व्यापारिक विवादों को आपराधिक रंग देकर मुकदमे दर्ज करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसके अलावा प्रतिष्ठानों और संस्थाओं में किसी आकस्मिक घटना या दुर्घटना के मामले में सीधे तौर पर जिम्मेदार व्यक्तियों के अलावा प्रबंधन स्तर के ऐसे लोगों को भी मुकदमे में नामजद किया जाता है, जिनका उस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि समय-समय पर उच्चतम न्यायालय ने भी साफ निर्देश दिए हैं कि वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, व्यापारिक अपराध, चिकित्सकीय लापरवाही के मामले, भ्रष्टाचार के मामले, ऐसे मामले जिनमें प्राथमिकी दर्ज करने में अस्वाभाविक विलम्ब हुआ हो, उनमें प्राथमिकी दर्ज करने से पहले जांच की जाए।
डीजीपी ने कहा कि यह उचित है कि ऐसे सभी प्रकार के मामलों में अगर दी गयी तहरीर से संज्ञेय अपराध का होना नहीं पाया जाता है या संदेह की स्थिति है, तो उसमें लगाये गये आरोपों की जांच कर यह पता लगाया जाए कि घटना में संज्ञेय अपराध हुआ है या नहीं। उसके बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाए।
निर्देश में कहा गया है कि उद्यमियों एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों जैसे बिल्डर, फैक्टरी संचालक, होटल संचालक, अस्पताल एवं नर्सिंग होम संचालक तथा स्कूल/शैक्षणिक संस्थाओं के संचालकों के विरुद्ध प्राप्त तहरीरों पर मुकदमा दर्ज करने से पूर्व सावधानी बरती जाए।
इस बात पर खास ध्यान दिया जाए कि कहीं तहरीर में व्यवसायिक प्रतिद्वंद्विता, व्यवसायिक विवाद अथवा सिविल विवाद को आपराधिक स्वरूप देकर तो नहीं पेश किया गया है।
डीजीपी ने कहा कि तहरीर से या जांच के दौरान संज्ञेय अपराध का होना स्पष्ट हो तो जांच अधिकारी दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका दें और मामले से संबंधित दोनों पक्षों द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेख भी जांच रिपोर्ट के साथ संलग्न किए जाएं।
भाषा सलीम