एनजीटी ने गंगा, यमुना नदियों में पूजा-पाठ की सामग्री फेंकने से रोकने के लिए उपाय सुझाए
आशीष पवनेश
- 18 Jul 2024, 08:45 PM
- Updated: 08:45 PM
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) गंगा और यमुना नदियों में पूजा पाठ की सामग्री फेंकने से रोकने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने समारोह, अनुष्ठान और मूर्ति विसर्जन के लिए खास स्थान विकसित करने सहित अतिरिक्त कदम उठाने का सुझाव दिया है।
एनजीटी ने गढ़मुक्तेश्वर, कानपुर, बिठूर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा और मथुरा के जिलाधिकारियों को उन स्थानों को चिह्नित करने और उन पर निगरानी रखने का भी निर्देश दिया, जहां ऐसी वस्तुएं फेंकने या विसर्जित करने की संभावना है।
एनजीटी एक मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने यमुना और गंगा नदियों में पॉलीथीन की थैलियों में पैक किए गए फूल और मालाओं को फेंकने के संबंध में एक समाचार पत्र की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था।
हाल में एक आदेश में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि अधिकरण के पूर्व निर्देशों और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) तथा यमुना प्रदूषण से निपटने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के विभिन्न निर्णयों के बावजूद पूजा सामग्री और मालाएं फेंकने के कारण प्रदूषण की समस्या बनी हुई है।
पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरूण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे। पीठ ने डीपीसीसी की 26 जून की रिपोर्ट पर गौर किया जिसके अनुसार इस वर्ष 31 मई तक समिति ने यमुना डूब क्षेत्र में निर्माण अपशिष्ट डालने और अवैध पार्किंग के लिए 3,916 चालान जारी किए थे और लगभग 1.06 रुपए जुर्माने के रूप में वसूले गए थे।
पीठ ने कहा कि यमुना और गंगा नदियों में प्रदूषण को रोकने के लिए एनजीटी के पहले के आदेशों के उचित क्रियान्वयन के लिए कुछ अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं। इनमें पूजा-पाठ की सामग्री नहीं फेंकने का उल्लेख करने वाले ‘डिस्प्ले बोर्ड’ लगाना और निर्देश का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाने के बारे में जानकारी देना शामिल है।
एनजीटी ने कहा, ‘‘स्कूल स्तर पर नदियों में इन सामग्रियों को फेंके जाने के प्रभाव के बारे में व्यापक जागरूकता बढ़ानी चाहिए तथा नदी के डूब क्षेत्र के संरक्षण के लिए नदी के किनारे से 100 मीटर दूर तथा तट पर धार्मिक अनुष्ठानों को प्रतिबंधित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।’’
एनजीटी ने कहा कि संबंधित अधिकारी समारोह, अनुष्ठान और मूर्तियों व पूजा पाठ की सामग्री के विसर्जन के लिए विशेष घाट विकसित करने को लेकर उपयुक्त स्थान की पहचान कर सकते हैं।
एनजीटी ने कहा कि प्रत्येक घाट पर मूर्ति विसर्जन, फूल, नारियल और अन्य सामग्री के संग्रह और प्रसंस्करण के संबंध में एक ‘‘अलग योजना’’ बनाई जा सकती है। साथ ही पुलों, नालों और अन्य स्थानों से नदियों में पूजा पाठ की सामग्री के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष निपटान को नियंत्रित और रोका जा सकता है।
भाषा आशीष