निजी क्षेत्र में आरक्षण विधेयक को लेकर मंत्रिमंडल की अगली बैठक में चर्चा : सिद्धरमैया
धीरज रंजन
- 18 Jul 2024, 07:24 PM
- Updated: 07:24 PM
बेंगलुरु, 18 जुलाई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार ने निजी क्षेत्र में कन्नड भाषियों को आरक्षण देने संबंधी विधेयक को लेकर उत्पन्न ‘ कुछ भ्रम की स्थिति’ के मद्देनजर फिलहाल इसे टालने का फैसला किया है।
सिद्धरमैया ने कहा कि आशंकाओं को दूर करने के लिए मंत्रिमंडल की अगली बैठक में विधेयक पर चर्चा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा, ‘‘सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक में (विषय पर)पूरी चर्चा नहीं हो सकी। तभी मीडिया में इस संबंध में खबरें आने लगी।’’
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर.अशोक ने विधेयक पर सरकार से रुख स्पष्ट करने की मांग की। इसपर सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘ इसे लेकर कुछ भ्रम है। हम मंत्रिमंडल की अगली बैठक में उन भ्रम को दूर करेंगे। हमें विस्तृत चर्चा करने दें।’’
अशोक ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीन बार अपना संदेश बदला।
नेता प्रतिपक्ष ने याद दिलाया कि सिद्धरमैया ने अपनी पहली पोस्ट में बताया कि मंत्रिमंडल ने निजी क्षेत्र में कन्नड़ भाषियों के लिए शत प्रतिशत आरक्षण का फैसला लिया है और बाद में उसे हटा दिया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने फिर एक और संदेश जारी किया जिसमें कहा कि निजी क्षेत्र में प्रबंधन श्रेणी की नौकरियों में 50 प्रतिशत और गैर प्रबंधन श्रेणी की नौकरियों में 75 प्रतिशत कन्नड भाषियों के लिए आरक्षित होंगी।
अशोक ने कहा, ‘‘अंतत: आपने (सिद्धरमैया) ने घोषणा की कि विधेयक को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला किया गया। ऐसा लगता है कि कर्नाटक में तुगलकी सरकार है।’’
इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘(यहां) कोई तुगलक सरकार नहीं है बल्कि सिद्धरमैया सरकार है। हम इस मुद्दे पर मंत्रिमंडल की अगली बैठक में चर्चा करेंगे।’’
राज्य मंत्रिमंडल ने सोमवार को कर्नाटक राज्य उद्योग, कारखाने और अन्य प्रतिष्ठानों में स्थानीय उम्मीदवारों को रोजगार देने संबंधी विधेयक, 2024 को मंजूरी दी थी। इसमें निजी कंपनियों के लिए अपने प्रतिष्ठानों में कन्नड़ भाषी लोगों को आरक्षण देना अनिवार्य करने का प्रावधान है।
प्रस्तावित विधेयक के मुताबिक, ‘‘किसी भी उद्योग, कारखाना या अन्य प्रतिष्ठानों में प्रबंधन स्तर पर 50 प्रतिशत और गैर प्रबंधन श्रेणी में 70 प्रतिशत आरक्षण स्थानीय लोगों को देना अनिवार्य होगा।’’
इसमें कहा गया है कि यदि उम्मीदवार के पास कन्नड़ भाषा के साथ माध्यमिक विद्यालय का प्रमाणपत्र नहीं है, तो उन्हें ‘नोडल एजेंसी’ द्वारा आयोजित कन्नड़ प्रवीणता परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
प्रस्तावित विधेयक के मुताबिक नोडल एजेंसी को रिपोर्ट के सत्यापन के उद्देश्य से किसी नियोक्ता, अधिभोगी या प्रतिष्ठान के प्रबंधक के पास मौजूद किसी भी रिकॉर्ड, सूचना या दस्तावेज को मांगने का अधिकार होगा।
इसमें कहा गया है कि सरकार अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन कराने के लिए सहायक श्रम आयुक्त से उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी को प्राधिकृत अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकती है।
सरकार के इस फैसले पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के संयुक्त मंच नैसकॉम ने आगाह करते हुए कहा था कि कपंनियां कर्नाटक से बाहर जा सकती हैं।
मंत्रियों ने इसके बाद बयान जारी कर कंपनियों को आश्वासन दिया कि उनके हितों की रक्षा की जाएगी।
भाषा धीरज