फर्जी प्रमाणपत्र को लेकर न सिर्फ बर्खास्तगी, बल्कि सख्त कार्रवाई हो: एलबीएसएनएए के पूर्व प्रमुख
नोमान माधव
- 17 Jul 2024, 05:25 PM
- Updated: 05:25 PM
(अश्विनी श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर से जुड़े विवाद के बीच लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) के पूर्व प्रमुख संजीव चोपड़ा ने बुधवार को कहा कि जो लोग सिविल सेवाओं में शामिल होने के लिए फर्जी जाति और दिव्यांगता प्रमाण पत्र का उपयोग करते पाए जाते हैं, उन्हें न सिर्फ बर्खास्त किया जाना चाहिए, बल्कि उनसे प्रशिक्षण खर्च और वेतन की वसूली भी की जानी चाहिए।
खेडकर द्वारा अधिकार और विशेषाधिकारों के दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद, सोशल मीडिया पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों द्वारा फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल के दावों और प्रतिदावों की भरमार हो गई है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम, चित्र और अन्य विवरण साझा करते हुए दावा किया है कि उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (गैर-क्रीमी लेयर) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए उपलब्ध लाभों का उपयोग करने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया।
चोपड़ा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “यह व्यवस्था में एक गंभीर रोग है। ऐसा करते हुए जो कोई भी पाया जाता है, वह न सिर्फ एक योग्य उम्मीदवार को वंचित करता है, बल्कि जानबूझकर आपराधिक साजिश में शामिल होता है। वे किशोर अपराधी नहीं हैं जिन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए।”
उन्होंने कहा कि बर्खास्तगी और प्रशिक्षण लागत तथा अब तक दिए गए वेतन की वसूली के अलावा, “वे अपनी सजा पूरी करें” ताकि सभी संबंधित पक्षों को एक स्पष्ट संकेत दिया जा सके।
चोपड़ा ने कहा, “इस प्रक्रिया में उनकी मदद करने वाले सभी लोगों की गहन जांच की जानी चाहिए तथा इस छल-कपट में शामिल सभी लोगों को कानून के प्रावधानों के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।”
चोपड़ा पश्चिम बंगाल कैडर के 1985 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने एक जनवरी 2019 से 31 मार्च 2021 तक मसूरी स्थित लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) के निदेशक के रूप में कार्य किया।
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह दावा किया कि ईडब्ल्यूएस और ओबीसी श्रेणी के कुछ उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा में अच्छी रैंक लाने के बावजूद चयनित नहीं हो सके। उन्होंने आरक्षण और दिव्यांगता कोटा की प्रामाणिकता की जांच के लिए अपनाई जा रही सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) आईएएस, भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और आईपीएस सहित अन्य सेवाओं के अधिकारियों का चयन करने के लिए प्रतिवर्ष तीन चरणों - प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार - में सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है।
चोपड़ा ने ओबीसी और दिव्यांगता कोटा प्रमाण पत्र जारी करते समय कड़ी जांच के अलावा कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया।
खेडकर पर दिव्यांगता और ओबीसी प्रमाण पत्रों में हेराफेरी करने का आरोप है। इससे संबंधित एक प्रश्न के जवाब में चोपड़ा ने कहा कि केंद्र की एकल सदस्यीय ‘तथ्यान्वेषण समिति’ को पूरे मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए।
चोपड़ा ने कहा, “इस पूरे मामले के तीन पहलू हैं। पुणे में प्रशिक्षण के दौरान उनके द्वारा किए गए कदाचार के मामले को संबंधित राज्य सरकार द्वारा देखा जा रहा है। उन्हें वहां से स्थानांतरित कर दिया गया है। हालांकि स्थानांतरण कोई सज़ा नहीं है, लेकिन उनके कथित आचरण की जांच की जा रही है।”
उन्होंने कहा कि एक अन्य पहलू फर्जी दिव्यांगता और ओबीसी (गैर-क्रीमी लेयर) प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल से संबंधित है, जिसके लिए केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने जांच समिति का गठन किया है और समिति इसकी गहराई से जांच करेगी।
चोपड़ा ने कहा कि तीसरा और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि क्या व्यवस्था में कोई कमी है या परीक्षा और भर्ती संगठन में कार्यरत सरकारी अधिकारियों, मुख्य रूप से निचले स्तर के अधिकारियों की इसमें संलिप्तता है?
चोपड़ा ने कहा, “यह एक बड़ा मुद्दा है और इसकी व्यवस्था की शुचिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए गहन जांच की आवश्यकता है।”
खेडकर महाराष्ट्र कैडर की 2023 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उनका मामला तब प्रकाश में आया जब उन्होंने पुणे में अपनी तैनाती के दौरान कथित तौर पर कुछ भत्ते और लाभ की मांग शुरू कर दी, जिसकी वह हकदार नहीं हैं।
पुणे के जिला अधिकारी की शिकायत के बाद खेडकर को विदर्भ क्षेत्र के वाशिम जिला कलेक्टरेट में स्थानांतरित कर दिया गया था।
यूपीएससी के रिकॉर्ड के अनुसार, उन्हें बहु-दिव्यांग व्यक्ति के रूप में ओबीसी श्रेणी के तहत सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 821वीं रैंक मिली थी। खेडकर को उनकी रैंकिंग, जाति और विकलांगता श्रेणी के आधार पर आईएएस मिला।
भाषा नोमान