केसीआर के खिलाफ जांच को लेकर विवाद: शीर्ष अदालत ने जांच आयोग के प्रमुख को फटकार लगाई
नोमान दिलीप
- 16 Jul 2024, 09:28 PM
- Updated: 09:28 PM
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की सरकार के दौरान बिजली क्षेत्र में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय जांच आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एल. नरसिम्हा रेड्डी को संवाददाता सम्मेलन में मामले के गुण-दोष के बारे में टिप्पणी करने के लिए मंगलवार को फटकार लगाई।
शीर्ष अदालत की आलोचना के बाद पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रेड्डी आयोग से हट गए और भारत के प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली पीठ ने तेलंगाना सरकार से उनके स्थान पर किसी अन्य न्यायाधीश को नियुक्त करने को कहा।
उच्चतम न्यायालय तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने जांच आयोग के प्रमुख के खिलाफ पक्षपाती होने का आरोप लगाया है।
पीठ ने भोजन अवकाश के लिए उठने से पहले कहा, “ न्याय होते हुए दिखना चाहिए। वह जांच आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं और उन्होंने प्रेस वार्ता में मामले के गुण-दोष पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। हम आपको (तेलंगाना सरकार को) जांच आयोग में न्यायाधीश को बदलने का मौका दे रहे हैं। किसी दूसरे न्यायाधीश को नियुक्त करें।”
रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली वर्तमान कांग्रेस सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पीठ से कहा कि नजरिया व्यक्त करने से पक्षपात का मामला नहीं बनता है।
पीठ में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।
प्रेस वार्ता का हवाला देते हुए पीठ ने कहा, “अगर यह सिर्फ जांच आयोग द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली के बारे में संकेत दे रहा होता, तो हम इसे यहीं छोड़ देते। यह एक ऐसे व्यक्ति के लिए थोड़ा अप्रिय है, जो एक न्यायाधीश है... समस्या यह है कि गुण-दोष के आधार पर टिप्पणियां की गई हैं।”
पीठ ने प्रक्रियागत निष्पक्षता के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि इसका पालन किया जाना चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “आयोग के प्रमुख के आचरण में भी न्याय दिखना चाहिए।”
पीठ का रुख भांपते हुए सिंघवी ने कहा कि उन्होंने निर्देश ले लिए हैं और राज्य सरकार न्यायमूर्ति रेड्डी को बदलने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इसे आदेश का हिस्सा न बनाया जाए।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रेड्डी के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सूचित किया कि वह आयोग का हिस्सा नहीं बने रहना चाहते।
पीठ ने राज्य सरकार को न्यायमूर्ति रेड्डी की जगह किसी और को नियुक्त करने के लिये नये सिरे से अधिसूचना जारी करने की स्वतंत्रता दी।
शुरुआत में पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि पूरा मामला "राजनीतिक प्रतिशोध" पर आधारित है। उन्होंने कहा, "जब भी सरकार बदलती है, पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज हो जाता है।"
रोहतगी ने कहा, “आप तथ्य अन्वेषण आयोग में जिम्मेदारी तय नहीं कर सकते हैं।”
उन्होंने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता के खिलाफ पक्षपात के कुछ कथित उदाहरण गिनाए।
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने एक जुलाई को राव को झटका देते हुए उस रिट याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री ने बीआरएस शासन के दौरान बिजली क्षेत्र में कथित अनियमितताओं की छानबीन के लिए जांच आयोग के गठन को अवैध घोषित करने का आग्रह किया था।
भाषा नोमान