कावेरी जल: तमिलनाडु की सर्वदलीय बैठक में जरूरत पड़ने पर शीर्ष अदालत का रुख करने का फैसला
नोमान माधव
- 16 Jul 2024, 09:04 PM
- Updated: 09:04 PM
चेन्नई, 16 जुलाई (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा में विधायक दल के नेताओं की मंगलवार को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर जरूरी हुआ तो कर्नाटक से राज्य के लिए कावेरी का पानी लेने के वास्ते उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा और मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने सभी आवश्यक कदम उठाने तथा किसानों के हितों की रक्षा करने का संकल्प लिया।
सचिवालय में सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए स्टालिन ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों के अधिकारों की रक्षा करेगी।
सरकार ने 15 जुलाई को कहा था कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने 12 से 31 जुलाई 2024 तक प्रतिदिन एक टीएमसी फुट पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। कर्नाटक ने कहा था कि वह एक टीएमसी फुट (11,500 क्यूसेक) नहीं बल्कि 8,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को तैयार है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर दुख जताया कि कर्नाटक सीडब्ल्यूआरसी द्वारा निर्धारित मात्रा में पानी भी नहीं छोड़ता। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने पिछले साल उच्चतम न्यायालय के फैसले के तहत कावेरी का पानी नहीं छोड़ा था, जिससे किसान बुरी तरह प्रभावित हुए।
स्टालिन ने कहा, “हमने उच्चतम न्यायालय का रुख कर ही पानी हासिल किया। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून अनुकूल होने के बावजूद कर्नाटक सरकार का इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
बैठक में जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन, द्रमुक के पी विल्सन (राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता), आर एस भारती (पार्टी संगठन सचिव), अन्नाद्रमुक के एस.पी वेलुमणि और ओएस मणियन (दोनों पूर्व मंत्री) ने भाग लिया।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पढ़े। उन्होंने इसके बारे में कहा कि यह “इस बैठक में व्यक्त विचारों के आधार पर सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयों पर आधारित है।”
बैठक में पारित प्रस्ताव में कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देशानुसार पानी नहीं छोड़ने के लिए कर्नाटक सरकार की कड़ी निंदा की गई है।
इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अगर जरूरी हुआ तो उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा तथा कावेरी न्यायाधिकरण के अंतिम निर्णय और शीर्ष अदालत के फैसले के अनुसार तमिलनाडु को फौरन पानी दिलाने के लिए सभी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में कांग्रेस, पीएमके, वीसीके, भाकपा, माकपा, भाजपा, मणिथानेया मक्कल काची, कोंगु मक्कल देसिया काची, पुरात्ची भारतम और एमडीएमके के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव शिवदास मीना और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
भाषा नोमान