‘वाल्मीकि घोटाला’ को लेकर कर्नाटक विस में हंगामा, नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री के इस्तीफा मांगा
सुभाष माधव
- 16 Jul 2024, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
बेंगलुरु, 16 जुलाई (भाषा) राज्य संचालित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से 187 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के मामले को लेकर लगातार दूसरे दिन भी मंगलवार को विधानसभा में हंगामा हुआ। विपक्ष के नेता आर अशोक ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के इस्तीफे की मांग की।
भाजपा नेता अशोक ने कहा कि वाल्मीकि निगम में ‘‘लूट’’ के लिए कांग्रेस सरकार जवाबदेह है।
उन्होंने वाल्मीकि निगम के लेखा अधीक्षक चंद्रशेखर पी. की आत्महत्या के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया और इसकी जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की निष्पक्षता पर सवाल उठाये।
चंद्रशेखर के आत्महत्या करने के बाद कथित घोटाला सामने आया था।
अशोक ने कहा, ‘‘अनुसूचित जनजाति समुदाय को उसका हक नहीं मिला है क्योंकि समुदाय के कल्याण के लिए रखे गए 187 करोड़ रुपये लूटकर तेलंगाना ले जाया गया। वह पैसा कौन वापस देगा?’’
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अनुसूचित जनजाति समुदाय के लाभार्थियों को राशि देनी है जो इसका इंतजार कर रहे हैं। समुदाय के कल्याण के लिए रखा गया पैसा कुछ लोगों के पास चला गया।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए रखी गई धन राशि की ‘‘लूट’’ फोनपे, गूगल पे और अन्य ऑनलाइन भुगतान माध्यम के जरिये की गई।
अशोक ने कहा, ‘‘इस वित्तीय अनियमितता की सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गहन जांच होनी चाहिए। वित्त विभाग की जानकारी में रहे बिना इतना बड़ा घोटाला नहीं हो सकता।’’
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास वित्त विभाग का प्रभार है और उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।
विधानसभा में, अशोक द्वारा मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग के बाद सत्तापक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई।
अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी नागेंद्र ने घोटाले के सिलसिले में अपने खिलाफ आरोप लगाए जाने के बाद 6 जून को इस्तीफा दे दिया था। वह वर्तमान में ईडी की हिरासत में हैं।
चंद्रशेखर के परिवार की दशा और दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए अशोक ने कहा कि अधिकारी की पत्नी तमाम मुश्किलों के बावजूद न्याय के लिए लड़ रही है।
उन्होंने दावा किया, ‘‘अपमान के डर से निर्दोष चंद्रशेखर ने अपनी जान दे दी... अगर उन्होंने आत्महत्या नहीं की होती तो पूरे 187 करोड़ रुपये तेलंगाना 'खटाखट' चला गया होता।’’
प्रदेश भाजपा प्रमुख एवं शिकारीपुरा से विधायक बी वाई विजयेंद्र ने दावा किया कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के उत्थान के लिए अन्य निगमों की निधि या तो उपयोग के बिना रह गई या कम उपयोग की गई।
उनके इस बयान पर, मंत्रियों सहित सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई।
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि जब कोई आयोग या कोई जांच एजेंसी मामले की जांच कर रही है तो विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव नहीं लाया जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा, ‘‘हम यह नहीं कह सकते कि अमुक मंत्री और अधिकारी इसमें शामिल हैं, जबकि तीन एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं - सीबीआई, ईडी और अब हमारा विशेष जांच दल (एसआईटी)।’’
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