दिल्ली के अस्पताल में हत्या के लिए जिम्मेदार गैंगस्टर हाशिम बाबा पर 16 आपराधिक मामले
सुरेश वैभव
- 16 Jul 2024, 07:18 PM
- Updated: 07:18 PM
(आलोक सिंह)
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के एक अस्पताल में गोलीबारी का साजिशकर्ता समझे जा रहे गैंगस्टर हाशिम बाबा पर हत्या और हत्या के प्रयास सहित 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं। एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी।
इस गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गयी।
तिहाड़ जेल में बंद हाशिम बाबा का असली नाम आशिम है, जिसे दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने 2019 में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस के एक दस्तावेज के अनुसार, उस पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि, हाशिम बाबा को जेल में रखे जाने के बावजूद उसका हौसला नहीं टूटा है और वह सलाखों के पीछे से अब भी अपना गिरोह चला रहा है।
अधिकारी ने बताया कि हाशिम के इशारे पर 2019 से लेकर अब तक पांच हत्याएं हुई हैं, जिनमें जीटीबी अस्पताल में एक मरीज की हालिया हत्या भी शामिल है।
उस पर पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, भजनपुरा और वेलकम इलाकों में हत्या, हत्या के प्रयास और डकैती सहित 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
अधिकारी ने बताया कि हाशिम बाबा के आदेश पर ही उसके गिरोह के सदस्यों ने हत्याओं को अंजाम दिया।
ऐसा माना जाता है कि हाशिम बाबा ने पंजाबी गायक-नेता सिद्धू मूसेवाला की हत्या के आरोपी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के साथ तिहाड़ जेल के अंदर सांठगांठ की थी।
अधिकारी ने बताया कि हाशिम बाबा ने कथित तौर पर दिल्ली में बिश्नोई गिरोह के सदस्यों को हथियार हासिल करने में मदद की थी।
बिश्नोई मई 2023 तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था, लेकिन बाद में उसे सीमा पार से मादक पदार्थों की तस्करी के एक मामले में आतंकवाद-निरोधी दस्ते (एटीएस) द्वारा गुजरात ले जाया गया था। वह फिलहाल गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती केंद्रीय कारागार में बंद है।
अपना गिरोह बनाने से पहले हाशिम बाबा यमुना पार के इलाकों में सक्रिय नासिर गिरोह का शार्पशूटर था। वह और राशिद उर्फ राशिद केबलवाला उस वक्त नासिर के गुर्गे थे। नासिर भी तिहाड़ जेल में बंद है।
पुलिस के अनुसार, माना जाता है कि राशिद पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद दुबई भाग गया।
हाशिम बाबा का नाम 2016 में कड़कड़डूमा अदालत में हुई गोलीबारी में भी आया था, जिसमें दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल की मौत हो गई थी।
समझा जाता है कि चार नाबालिगों ने हाशिम बाबा और नासिर के कहने पर उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी छेनू पहलवान को अदालत में पेश किए जाने के दौरान हमला किया था।
हाशिम बाबा जानबूझकर अपने गिरोह में नाबालिगों को आपराधिक गतिविधियों के लिए रखता है, ताकि जघन्य अपराधों में शामिल होने के बावजूद उन्हें आसानी से जमानत मिल जाती है।
अधिकारी ने बताया कि जीटीबी अस्पताल में गोलीबारी गैंगवार का नतीजा थी।
अधिकारी के अनुसार, हाशिम बाबा के शूटर वसीम को खत्म करने आए थे, लेकिन उन्होंने गलत पहचान के कारण 14 जुलाई को रियाजुद्दीन (32) की गोली मारकर हत्या कर दी।
पुलिस ने बताया कि नासिर और छेनू पहलवान के गिरोह यमुना पार के इलाकों में अवैध सट्टेबाजी और जुए के कारोबार पर वर्चस्व हासिल करने के लिए लड़ रहे हैं।
हालांकि, 2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में केबल टीवी कारोबार को लेकर शुरू हुआ गैंगवार पिछले दो दशक में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और सट्टेबाजी तथा जुए के कारोबार में बदल गया है।
दस्तावेज के अनुसार, हाशिम बाबा का कानून से पहला सामना 2007 में उस वक्त हुआ था, जब उसे आईपी एस्टेट क्षेत्र में अवैध बंदूक के साथ पकड़ा गया था।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, हाशिम बाबा आठवीं कक्षा में था, जब उसने अपनी पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक कारखाने में चप्पल बनाने का काम शुरू किया।
अधिकारी ने कहा कि जल्द ही वह मादक पदार्थों का गैर-कानूनी कारोबार करने वाले और अवैध सट्टेबाजी रैकेट चलाने वाले स्थानीय अपराधियों की संगत में आ गया तथा उनका शार्पशूटर बन गया।
उन्होंने कहा कि हाशिम बाबा कभी भी गोली चलाने से नहीं हिचकिचाता।
अधिकारी ने बताया कि उसके लंबे बालों के कारण गिरोह के सदस्य उसे 'बाबा' कहने लगे। अभिनेता संजय दत्त को भी 1990 के दशक में बड़े बालों के कारण बॉलीवुड में बाबा नाम से पुकारा जाने लगा था। कुख्यात अपराधी के आशिम नाम को हाशिम कर दिया गया था, क्योंकि यह जुबान पर आसान था।
दस्तावेज में कहा गया है कि दिल्ली में हाशिम की आपराधिक गतिविधियों के कारण उसके परिवार के सदस्य 2010 के बाद उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जाकर बस गए।
भाषा सुरेश