आईएमसी ने इस्लाम अपनाने वाले युवक-युवतियों के सामूहिक निकाह के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी
सं आनन्द रंजन
- 16 Jul 2024, 06:25 PM
- Updated: 06:25 PM
बरेली/संभल (उप्र), 16 जुलाई (भाषा) इत्तेहाद ए मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) ने इस्लाम अपनाने वाले दूसरे धर्म के युवक-युवतियों के सामूहिक निकाह के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी है, जिसका हिंदू नेताओं ने विरोध किया है।
इस बीच, पुलिस का दावा है कि बिना जिला प्रशासन की अनुमति के यदि किसी ने कोई कार्यक्रम आयोजित किया और किसी ने माहौल खराब करने की कोशिश की तो सख्त विधिक कार्रवाई होगी।
वहीं संभल के एक मुस्लिम धर्मगुरु ने आईएमसी के धर्म परिवर्तन के लिए कार्यक्रम आयोजित करने को शरीयत के खिलाफ करार दिया है।
आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने सोमवार की शाम पत्रकारों से कहा कि ''हिंदू से मुस्लिम बने युवक-युवतियों का निकाह कराएंगे और पहले चरण में पांच जोड़ों का निकाह होगा, जिसमें युवक एवं युवतियां धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी कर एक-दूसरे का दामन थामेंगे।''
मौलाना ने कहा, ''सामूहिक निकाह समारोह 21 जुलाई को सुबह 11 बजे खलील हायर सेकेंडरी स्कूल में होगा। इसके लिए प्रशासन से भी अनुमति मांगी है।''
बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनुराग आर्य ने बताया कि ''नगर मजिस्ट्रेट को धर्म परिवर्तन संबंधी निकाह कार्यक्रम की अनुमति के लिए आवेदन किया गया है। इसके लिए संबंधित थाना क्षेत्र और अभिसूचना सूचना शाखा से रिपोर्ट मांगी गई है।''
उन्होंने कहा, ''बरेली शहर और ग्रामीण क्षेत्र की जनता को आश्वस्त किया गया है कि कानून व्यवस्था के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। बिना जिला प्रशासन की अनुमति के यदि किसी ने कोई कार्यक्रम आयोजित किया और किसी ने माहौल खराब करने की कोशिश की तो सख्त विधिक कार्रवाई होगी।''
बरेली के नगर मजिस्ट्रेट राजीव शुक्ला ने बताया कि आईएमसी की ओर से संगठन प्रभारी नदीम कुरैशी ने कार्यक्रम आयोजन की अनुमति के लिए 11 जुलाई को एक पत्र दिया है।
मौलाना तौकीर का दावा है कि उनके पास निकाह के लिए धर्म परिवर्तन करने वाले करीब 23 युवक-युवतियों के आवेदन आ चुके हैं। इनमें आठ लड़के और 15 लड़कियां शामिल हैं, इन्होंने अपने रिश्ते पहले से तय किए हुए हैं।
उन्होंने कहा, ''इनका निकाह करवाने के साथ ही धर्म परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया भी पूरी की जानी है। इसी के तहत इनमें से पांच जोड़ों का चयन पहले चरण में किया गया है।''
मौलाना ने कहा कि प्रशासन को इसमें कोई एतराज होना नहीं चाहिए, क्योंकि वे लोग कोई गैरकानूनी काम नहीं कर रहे हैं।
तौकीर ने कहा कि ''बहुत से लड़के—लड़कियां हैं जो साथ पढ़ाई और काम कर रहे हैं तथा उनके संबंध भी बन गए हैं । कई जगह सहजीवन संबंध (लिव इन) में भी रह रहे हैं!''
मौलाना के अनुसार, ‘‘सहजीवन संबंध की कानूनी इजाजत नहीं है, हिंदू धर्म में भी इसको पसंद नहीं किया जाता है, क्योंकि कानून में तो समलैंगिकता का भी अधिकार है, लेकिन हिंदुस्तानी सभ्यता और संस्कार इसकी इजाजत नहीं देते । इसलिए धर्म परिवर्तन के इच्छुक युवक—युवतियों का निकाह कराने का निर्णय किया गया है।''
मौलाना ने बताया, ''धर्म परिवर्तन कर निकाह करने के लिए आसपास के जिलों और शहरों से आवेदन आए हैं, जिसमें मध्यप्रदेश से भी जोड़ा आया है । इन युवक युवतियों की पहचान अभी उजागर नहीं की जा रही है।''
इस बीच, मौलाना तौकीर के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नाथ नगरी सुरक्षा समूह के दुर्गेश कुमार गुप्ता ने कहा कि ''हिंदू समाज के युवक युवतियों का इस्लाम धर्म के युवक युवतियों से विवाह करना गलत है। इस संबंध में कार्यक्रम आयोजन के लिए मांगी गई अनुमति के विरोध में उनका संगठन जिलाधिकारी को ज्ञापन देगा।''
शिरडी साइन सर्व देव मंदिर के महंत पंडित सुशील पाठक ने कहा कि ''सावन के पवित्र माह में मौलाना का ऐलान कहीं ना कहीं शांति भंग करने की एक साजिश है।''
उन्होंने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री से मौलाना तौकीर के आयोजन को अनुमति न देने की मांग की है।
पुलिस अधीक्षक (नगर) राहुल भाटी ने बताया कि मोहर्रम चल रहा है और सावन भी शुरू होने वाला है। ऐसे में पुलिस- प्रशासन की प्राथमिकता शहर में शांति व्यवस्था कायम रखना है।
भाटी ने कहा कि ''किसी कार्यक्रम की वजह से शांतिपूर्ण माहौल में व्यवधान की आशंका होगी तो उसके बारे में विचार किया जाएगा। अनुमति के प्रार्थना पत्र पर पुलिस पूरी पड़ताल के बाद ही रिपोर्ट देगी।''
इस बीच संभल के मुस्लिम धर्म गुरु और सिराज उल उलूम मदरसे के प्रबंधक मौलाना मोहम्मद मियां ने तौकीर रजा के धर्म परिवर्तन के लिए कार्यक्रम आयोजित करने को शरीयत के खिलाफ करार दिया है।
उन्होंने कहा कि ''इस कार्यक्रम की जरूरत नहीं है और शरीयत में भी धर्म परिवर्तन के लिए कोई कार्यक्रम करने का प्रावधान नहीं है, हमारे यहां कहीं पर नहीं है।''
मौलाना मोहम्मद मियां ने कहा कि ''मैं कभी धर्म परिवर्तन कर निकाह करने का समर्थक नहीं रहा हूं, क्योंकि धर्म परिवर्तन एक अलग मसला है ।''
उन्होंने कहा, ‘‘विवाह के बाद धर्म परिवर्तन कराना अलग मामला है और किसी को यदि अपना धर्म परिवर्तन करना है तो संविधान इसकी इजाजत देता है!''
मौलाना मोहम्मद ने कहा, ‘‘जिलाधिकारी से अनुमति लेकर कोई अपना धर्म परिवर्तन कर सकता है, लेकिन इसके लिए किसी नेता को, किसी आलिम को आगे आकर उसकी कमान अपने हाथ में लेना राजनीतिक माहौल में ठीक नहीं है, उन्हें (मौलाना तौकीर रजा) ऐसा नहीं करना चाहिए।''
भाषा सं आनन्द