‘मीडिया ट्रायल’ का सामना कर रही हूं, सच्चाई की जीत होगी : विवादों में घिरीं आईएएस अधिकारी खेडकर
सुभाष वैभव
- 15 Jul 2024, 09:16 PM
- Updated: 09:16 PM
मुंबई/पुणे, 15 जुलाई (भाषा) विशेषाधिकारों का कथित दुरूपयोग करने और दिव्यांगता एवं ओबीसी कोटा का इस्तेमाल करने को लेकर विवादों में घिरीं भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की परिवीक्षाधीन अधिकारी पूजा खेडकर अपने खिलाफ जारी जांच से जुड़े सवालों को सोमवार को टाल गईं। उन्होंने कहा कि आखिरकार सच्चाई की जीत होगी।
इस बीच, पुणे पुलिस ने एक अलग आपराधिक मामले में उनके माता-पिता की तलाश की।
महाराष्ट्र के वाशिम जिले में वर्तमान में पदस्थ कनिष्ठ आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर ने पुणे के समाहरणालय में उनकी नियुक्ति के दौरान उनके आचरण को लेकर विवाद उत्पन्न होने के बाद, ‘‘मीडिया ट्रायल’’ किये जाने का आरोप लगाया है।
खेडकर (34) सिविल सेवा परीक्षा में चुने जाने के लिए कपटपूर्ण तरीके का इस्तेमाल करने के आरोपों का सामना कर रही हैं। उन्होंने खुद को कथित तौर पर शारीरिक रूप से दिव्यांग और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय का बताया था।
पिछले हफ्ते केंद्र ने खेडकर की ‘‘उम्मीदवारी सत्यापित’’ करने के लिए एक सदस्यीय समिति गठित की थी और दो सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने को कहा। सरकार ने कहा कि 2023 बैच की अधिकारी की उम्मीदवारी के दावों और अन्य विवरणों को सत्यापित करने के लिए अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा जांच की जाएगी।
खेडकर ने विदर्भ क्षेत्र के वाशिम में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं समिति के समक्ष अपना पक्ष रखूंगी। मुझे लगता है कि समिति जो भी निर्णय लेगी, वह सभी को स्वीकार्य होना चाहिए।’’
पिछले सप्ताह उन्हें अचानक पुणे से वाशिम स्थानांतरित कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘यहां (वाशिम में) एक परिवीक्षाधीन अधिकारी के तौर पर मेरा काम सीखना है और मैं यही कर रही हूं। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती। सरकार (समिति) के विशेषज्ञ ही इस पर फैसला लेंगे। न तो मैं और न ही आप (मीडिया) या जनता इस पर फैसला ले सकती है।’’
वह जिस जांच का सामना कर रही हैं उस पर विस्तार से बात करने से उन्होंने इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी समिति का निर्णय आएगा, वह सार्वजनिक होगा और जांच के लिए खुला रहेगा। लेकिन अभी मुझे आपको जांच के बारे में बताने का कोई अधिकार नहीं है।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, खेडकर ने कहा, ‘‘हर कोई जानता है कि क्या कुछ चल रहा है।’’
उन्होंने कहा कि संविधान इस तथ्य पर आधारित है कि जब तक आप दोषी साबित नहीं हो जाते, तब तक आप निर्दोष हैं। कनिष्ठ आईएएस अधिकारी ने कहा, ‘‘इसलिए मीडिया ट्रायल के जरिए मुझे दोषी साबित करना हर किसी की ओर से गलत है।’’
खेडकर ने कहा, ‘‘जो भी मेरी दलील है, मैं उसे समिति के समक्ष रखूंगी और सच्चाई सामने आ जाएगी।’’
इस बीच, पुणे पुलिस खेडकर के माता-पिता के खिलाफ दर्ज मामले में अभी तक दंपति से संपर्क नहीं कर पाई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
भूमि विवाद को लेकर पूजा की मां मनोरमा द्वारा कुछ लोगों को कथित तौर पर पिस्तौल दिखाकर धमकाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने उनके और उनके पति दिलीप खेडकर के अलावा पांच अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
अधिकारी ने बताया कि पुणे ग्रामीण पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ एक दल शहर के बानेर रोड स्थित मनोरमा व दिलीप के बंगले पर पहुंचा था लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला और दरवाजे अंदर से बंद थे।
उन्होंने बताया कि पुलिस पुणे और अन्य इलाकों में उनकी तलाश कर रही है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘पौड पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। लेकिन खेडकर दंपति पूछताछ के लिए पुलिस थाने नहीं आए हैं और उन्होंने अपने मोबाइल फोन भी बंद कर लिए हैं। हमारी टीम उनकी तलाश कर रही हैं। उनके मिलने पर उनसे पूछताछ की जाएगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’’
पुणे ग्रामीण पुलिस ने खेडकर दंपति और पांच अन्य के खिलाफ पौड पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-323 (बेईमानी या धोखाधड़ी से संपत्ति को हटाना या छिपाना) और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
यह मामला सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के कुछ दिन बाद दर्ज किया गया था, जिसमें मनोरमा अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ पुणे की मुलशी तहसील के धडवाली गांव में हाथ में पिस्तौल लेकर कुछ लोगों के साथ तीखी बहस करती नजर आ रही थीं।
पुणे पुलिस ने लाइसेंसी बंदूक के कथित दुरुपयोग को लेकर मनोरमा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने अहमदनगर के भालगांव गांव की सरपंच मनोरमा खेडकर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इस बीच, यह बात भी सामने आई है कि पूजा खेडकर ने 2007 में एक निजी चिकित्सा महाविद्यालय में प्रवेश के दौरान ‘फिटनेस’ प्रमाणपत्र जमा किया था।
पुणे के काशीबाई नवले मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ अरविंद भोरे ने कहा, ‘‘हमारे कॉलेज में 2007 में दाखिला लेने के दौरान पूजा खेडकर द्वारा सौंपे गये मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र में शारीरिक या मानसिक, किसी तरह की दिव्यांगता का उल्लेख नहीं किया गया था।’’
भोरे ने मराठी टीवी चैनल एबीपी माझा से कहा, ‘‘उन्होंने जमा किये गए अपने प्रमाणपत्र में उल्लेख किया था कि वह घुमंतू जनजाति और वंजारी समुदाय से हैं। उन्होंने जाति प्रमाणपत्र और ‘गैर क्रीमी लेयर’ प्रमाणपत्र जमा किया था।’’
निदेशक ने कहा कि पूर्ववर्ती कॉलेज छोड़ने संबंधी खेडकर के प्रमाणपत्र में उनके जन्म की तारीख 16 जनवरी 1990 है। उन्होंने यह प्रमाणपत्र भी जमा किया था।
खेडकर (34) सिविल सेवा परीक्षा में चुने जाने के लिए कपटपूर्ण तरीके का इस्तेमाल करने के आरोपों का सामना कर रही है। उन्होंने खुद को कथित तौर पर शारीरिक रूप से दिव्यांग और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय का बताया था।
एक अधिकारी ने बताया कि सिविल सेवा परीक्षा में उम्मीदवारी सुनिश्चित करने और फिर चयन के लिए उनके द्वारा प्रस्तुत किये गये सभी दस्तावेजों की केंद्र द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति द्वारा पुनः जांच की जाएगी।
भाषा सुभाष