कर्नाटक : वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर विधानमंडल के दोनों सदनों में हंगामा
धीरज वैभव
- 15 Jul 2024, 09:00 PM
- Updated: 09:00 PM
बेंगलुरु, 15 जुलाई (भाषा) राज्य में मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित तौर 187 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस को घेरा।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मेहनती और ईमानदार सरकारी अधिकारी चंद्रशेखरन की जान लेने वाले घोटाले ने सरकार के ‘दलित विरोधी’ चेहरे को उजागर कर दिया है जो खुद को दलितों की हितैषी बताती है।
निगम में कथित अनियमितता के खिलाफ पेश स्थगन प्रस्ताव के दौरान अशोक ने कहा, ‘‘दो प्रतिशत, तीन प्रतिशत और दस प्रतिशत के घोटाले होते थे, लेकिन वाल्मीकि निगम घोटाला तो सब पर भारी पड़ गया। यह ‘सौ प्रतिशत खटाखट’ घोटाला है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन को सैर-सपाटे के बहाने गोवा ले जाया गया जहां उन्हें प्रताड़ित किया गया, पीटा गया, उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया तथा अवैध धन हस्तांतरण को मंजूरी देने के लिए होटल के कमरे में बंधक बनाकर रखा गया जिससे आहत होकर उन्होंने बाद में आत्महत्या कर ली।
भाजपा नेता ने अधिकारी के सुसाइड नोट को सदन में पढ़ते हुए आरोप लगाया कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि भ्रष्ट सरकार द्वारा की गई हत्या है। उन्होंने कहा कि लेखा अधीक्षक के परिवार को भविष्य निधि और ग्रेच्युटी की राशि जारी न करके परेशान किया जा रहा है।
इस मुद्दे को लेकर विधान परिषद में भी हंगामा देखने को मिला।
भाजपा विधान पार्षद सी टी रवि ने इस मुद्दे पर कार्यस्थगन नोटिस दिया था और जैसे ही अपना शुरुआती भाषण देना शुरू किया सत्तारूढ़ कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
राज्य के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मामले की जांच एसआईटी (विशेष जांच टीम), सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा की जा रही है और इस पर चर्चा नहीं की जा सकती तथा सभापति को इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए।
दोनों पक्षों के बीच बहस पर सभापति बसवराज होरट्टी ने कहा कि वह इस पर महाधिवक्ता की राय लेंगे तथा उन्होंने अपना फैसला मंगलवार सुबह तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
सभापति के निर्णय से नाराज भाजपा और जनता दल सेक्युलर के सदस्य आसन के सामने आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
कुछ समय बाद जब सदन की कार्यवाही पुनः शुरू हुई तो सभापति ने कहा कि उन्होंने महाधिवक्ता से परामर्श कर लिया है तथा अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति दे दी है।
रवि जब इस मुद्दे पर अपनी बात रख रहे थे तभी सत्तारूढ़ दल के विधान पार्षदों ने उनकी कुछ टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और बहस शुरू हो गई। बाद में उपसभापति एम के प्रणेश ने सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी।
राज्य सरकार संचालित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से जुड़ा कथित अवैध धन हस्तांतरण घोटाला तब प्रकाश में आया जब इसके लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी ने 26 मई को आत्महत्या कर ली और सुसाइड नोट में कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख किया।
भाषा धीरज