भारत ने की टिकाऊ वृद्धि के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा अपनाने की वकालत
रमण अजय
- 15 Jul 2024, 08:16 PM
- Updated: 08:16 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) भारत ने उत्पादकता को बढ़ावा देने और समावेशी तथा टिकाऊ विकास हासिल करने के लिए वैश्विक स्तर पर डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को अपनाने की वकालत की है। भारत के जी-20 कार्यबल की रिपोर्ट में यह कहा गया है।
डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) पर भारत के जी-20 कार्यबल की सोमवार को जारी अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल बुनियादी ढांचे पर भारत के नेतृत्व को विश्वस्तर पर और विशेष रूप से जी-20 में स्वीकार किया गया है।
इसमें कहा गया है, ‘‘देशों में उत्पादकता बढ़ाने और मजबूत, समावेशी तथा टिकाऊ वृद्धि प्राप्त करने के लिए डीपीआई को एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में मान्यता दी गई है। इसको देखते हुए विभिन्न देशों में सामाजिक-आर्थिक वृद्धि तथा विकास में तेजी लाने के लिए डीपीआई की वैश्विक रूप से स्वीकार्यता को बढ़ावा देने के लिए चर्चा शुरू करने का समय आ गया है।’’
रिपोर्ट में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को विकसित करने में दूसरों की सहायता के लिए डीपीआई में अनुभवी देशों की विशेषज्ञता का लाभ उठाने की बात कही गयी है।
कार्यबल की रिपोर्ट की सह-अध्यक्षता भारत के जी-20 शेरपा अमिताभ कांत और इन्फोसिस के सह-संस्थापक और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के संस्थापक चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने की है।
रिपोर्ट में कहा गया है, भारत और आधुनिक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे वाले अन्य देशों को भी मौजूदा डीपीआई को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि समावेशी विकास को जारी रखा जा सके और अधिक महत्वाकांक्षी परिणामों की दिशा में घरेलू स्तर पर प्रगति की जा सके।
इस कार्यबल के काम से भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान डीपीआई की परिभाषा और रूपरेखा को स्वीकार किया गया। इसे ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता के दौरान क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।
रिपोर्ट में विभिन्न क्षेत्रों और देशों, विशेषकर वैश्विक दक्षिण देशों (विकासशील और कम विकसित देश) में डीपीआई परिवेश को बढ़ावा देने और उपयोग करने के लिए विभिन्न राष्ट्रों में उपस्थिति की गुंजाइश वाले वैश्विक मानकों के मौजूदा निकाय की पहचान करने की जरूरत का उल्लेख किया गया है।
इसमें कहा गया है कि कई देश इस बात पर विचार कर रहे हैं कि सार्वजनिक सेवाओं के प्रावधान में भारी सुधार के माध्यम से आर्थिक प्रगति में तेजी लाने के लिए अपने राष्ट्रीय डिजिटल बुनियादी ढांचे को कैसे विकसित किया जाए। साथ ही इसके जरिये पारदर्शिता में सुधार और दूरी कम करके लोगों तथा संस्थानों के बीच भरोसे को बढ़ावा दिया जाए।
रिपोर्ट जारी होने पर भारत के जी-20 शेरपा ने कहा, ‘‘भारत ने डीपीआई में अविश्वसनीय छलांग लगायी है। हमने नौ साल में वह हासिल किया जो डीपीआई के बिना 50 साल में होता। आज भारत में खोमचे वाले से लेकर बड़े-बड़े मॉल में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) का इस्तेमाल होता है। वैश्विक स्तर पर डिजिटल लेनदेन में हिस्सेदारी सबसे अधिक है और यह लगभग 46 प्रतिशत है।
अमिताभ कांत ने कहा, ‘‘डिजिटलीकरण के मामले में हम बहुत आगे हैं और मुझे भरोसा है कि यह रिपोर्ट दुनिया के लिए मार्गदर्शक साबित होगी।’’
भाषा रमण