धन विधेयक संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के लिए पीठ गठन पर विचार करेगा सर्वोच्च न्यायालय
सुरेश माधव
- 15 Jul 2024, 06:56 PM
- Updated: 06:56 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आधार सहित विभिन्न विधेयकों को मोदी सरकार द्वारा धन विधेयक के रूप में पारित कराने की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए एक संविधान पीठ के गठन के सुझाव पर विचार करने को लेकर सोमवार को सहमति व्यक्त की।
याचिकाकर्ताओं का मानना है कि ऐसा कथित तौर पर राज्यसभा को दरकिनार करने के लिए किया गया था, क्योंकि वहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में थी।
दो सौ-पैंतालीस सदस्यीय राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा 123 है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 86 और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के 101 सदस्य हैं।
राज्यसभा में राजग को बहुमत नहीं होने के कारण स्पष्टतया उसे दरकिनार करने के लिए आधार विधेयक और धनशोधन निरोधक संशोधन विधेयक जैसे विधेयकों को धन विधेयक के रूप में पारित कराना प्रमुख राजनीतिक एवं कानूनी विवाद रहा है।
कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ‘आधार विधेयक 2016’ को संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत धन विधेयक के रूप में पारित कराये जाने को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रमुख कपिल सिब्बल ने प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायूमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ से आग्रह किया था कि दलीलें पूरी हो चुकी हैं और याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की जरूरत है।
सिब्बल ने कहा कि ये याचिकाएं संविधान पीठ की सुनवाई वाले मामलों की सूची में शामिल हैं, इसलिए संविधान पीठ का गठन प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जब मैं संविधान पीठ का गठन करूंगा, तब निर्णय लूंगा।’’
इस बीच, कांग्रेस ने ऐसी याचिकाओं की सुनवाई के लिए संविधान पीठ गठित करने के उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। पार्टी ने उम्मीद जताई कि मौजूदा प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ के इस साल नवंबर में सेवानिवृत्त होने से पहले इस मामले में फैसला आ जाएगा।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह आधार अधिनियम जैसे कानूनों को धन विधेयक के रूप में पारित करने की वैधता के मुद्दे पर विचार करने के लिए सात न्यायाधीशों की पीठ का गठन करेगी।
इस फैसले का मकसद सरकार द्वारा आधार अधिनियम और यहां तक कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) में संशोधन को धन विधेयक के रूप में पेश करने के बाद धन विधेयक पर उपजे विवाद का समाधान करना था। सरकार ने यह कदम राज्यसभा को कथित तौर पर दरकिनार करने के लिए उठाया था, जहां उसके पास तब बहुमत नहीं था।
धन विधेयक ऐसा विधेयक है, जिसे केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है और राज्यसभा इसमें संशोधन या इसे अस्वीकार नहीं कर सकती है। उच्च सदन केवल सिफारिशें कर सकता है, जिन्हें निचला सदन स्वीकार भी कर सकता है और नहीं भी।
शीर्ष अदालत की पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने नवंबर 2019 में वित्त अधिनियम, 2017 को धन विधेयक के रूप में पारित करने की वैधता की जांच करने के मुद्दे को एक वृहद पीठ को भेज दिया था।
इसमें कहा गया था, "संविधान के अनुच्छेद 110(1) के तहत परिभाषित धन विधेयक का मुद्दा और प्रश्न तथा वित्त अधिनियम, 2017 के भाग-14 के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा दिया गया प्रमाणन एक बड़ी पीठ को भेजा जाता है।"
भाषा सुरेश