हत्या मामले में गवली को मिली सजा में छूट के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर न्यायालय करेगा विचार
सुरेश मनीषा
- 15 Jul 2024, 05:59 PM
- Updated: 05:59 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे, गैंगस्टर से राजनेता बने अरुण गवली को दी गई छूट को चुनौती देने वाली महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर विचार करना चाहेगा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजा ठाकरे से कहा, ‘‘अब उनकी (गवली की) उम्र 71-72 साल है। वह 1980 के दशक के अरुण गवली नहीं हैं, जब लोग उनके बारे में बात किया करते थे। आपको उनके द्वारा किए गए अपराध के पैमाने की संभावनाओं के बारे में हमें संतुष्ट करना होगा।’’
ठाकरे ने कहा कि गवली विधायक थे, उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने जो अपराध किए हैं, वे व्यक्तियों के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ हैं। छूट का कानून बहुत स्पष्ट है कि अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखा जाना चाहिए।’’
गवली की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने कहा कि उनके मुवक्किल राज्य की 2006 की नीति के तहत समयपूर्व रिहाई के हकदार हैं, जिसे विशेष रूप से वृद्ध और शारीरिक रूप से कमजोर कैदियों के लाभ के लिए बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा बोर्ड ने भी प्रमाणित किया है कि गवली अपनी वृद्धावस्था के कारण अशक्त हैं।
पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे की जांच करना चाहेगी और बताया कि पहले भी गवली को अदालत द्वारा पैरोल दी गई थी और समय-समय पर इसे बढ़ाया गया था।
पीठ ने कहा, ‘‘आप (रामकृष्णन) जमानत के लिए नहीं, बल्कि पैरोल के लिए आवेदन दायर कर सकते हैं, जिस पर हम सजा के खिलाफ उनकी अपील के साथ 31 जुलाई को विचार करेंगे। हम राज्य सरकार की याचिका को मुख्य अपील के साथ 31 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर रहे हैं। ’’
इसने गवली की समय-पूर्व रिहाई पर अगले आदेश तक रोक लगाने वाले अपने तीन जून के आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से गवली के आपराधिक इतिहास का विवरण देते हुए हलफनामा दायर करने को कहा है।
शीर्ष अदालत ने तीन जून को बम्बई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के पांच अप्रैल के उस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिसमें राज्य के अधिकारियों को 2006 की छूट नीति के तहत समय से पहले रिहाई के लिए गवली के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।
इसने मामले में राज्य सरकार की याचिका पर गवली को नोटिस जारी किया था।
उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने गवली की याचिका को स्वीकार कर लिया था, जिसमें उसने 10 जनवरी, 2006 की छूट नीति के आधार पर राज्य सरकार को समय से पहले रिहाई के लिए निर्देश देने की मांग की थी।
भाषा सुरेश