प. बंगाल के अधिकारियों के खिलाफ लोकसभा विशेषाधिकार समिति के नोटिस पर रोक 19 जुलाई तक बढ़ी
सुरेश दिलीप
- 15 Jul 2024, 04:26 PM
- Updated: 04:26 PM
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य के खिलाफ लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी समन नोटिस पर लगाई गई रोक 19 जुलाई तक के लिए सोमवार को बढ़ा दी।
लोक सचिवालय ने सदन के विशेषाधिकार के कथित उल्लंघन से संबंधित मामले में इन अधिकारियों के खिलाफ समन जारी किया था।
शीर्ष अदालत ने समन के खिलाफ पश्चिम बंगाल के शीर्ष नौकरशाहों द्वारा दायर याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए लोकसभा सचिवालय और अन्य को 15 अप्रैल को दो सप्ताह का समय दिया था।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद सुकांत मजूमदार द्वारा अधिकारियों के खिलाफ दायर ‘दुर्व्यवहार’ की शिकायत पर लोकसभा की विशेषाधिकार समिति ने उन्हें (अधिकारियों को) तलब किया था। मजूमदार ने राज्य के उत्तर 24 परगना जिले के हिंसा प्रभावित संदेशखालि का दौरा करने की कोशिश करते वक्त ‘दुर्व्यवहार’ किये जाने की शिकायत की थी।
भारत के प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने नौकरशाहों की याचिका पर सुनवाई उस वक्त 19 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी, जब उसे लोकसभा सचिवालय की ओर से पेश एक वकील ने सूचित किया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता देश से बाहर होने के कारण उपलब्ध नहीं हैं।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘हम इसे शुक्रवार को सूचीबद्ध करेंगे। और इस दौरान (नोटिस पर रोक की) अंतरिम राहत जारी रहेगी।’’
इस बीच, पश्चिम बंगाल सरकार के पांच नौकरशाहों और अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता- कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी- ने दलील दी कि सदन के बाहर किए गए कृत्यों के लिए विशेषाधिकारों के उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने विशेषाधिकार समिति द्वारा पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव भगवती प्रसाद गोपालिका, तत्कालीन डीजीपी राजीव कुमार, उत्तर 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक और अन्य को तलब किये जाने के नोटिस पर 19 फरवरी को पहली बार रोक लगा दी थी।
संदेशखालि जाने की अनुमति न मिलने पर भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प में घायल हुए मजूमदार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
संदेशखालि की महिलाएं तृणमूल कांग्रेस के नेता (अब निलंबित) शाहजहां शेख और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए कथित अत्याचारों के खिलाफ आंदोलन कर रही थीं।
शेख को 55 दिनों तक फरार रहने के बाद फरवरी में गिरफ्तार किया गया था। शेख और उनके समर्थकों पर कई महिलाओं ने जमीन हड़पने और जबरदस्ती उनका यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।
राज्य के अधिकारियों द्वारा दायर याचिका में लोकसभा सचिवालय के अलावा सदन की विशेषाधिकार समिति, मजूमदार, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग तथा गृह मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया गया है।
भाषा सुरेश