बारामती से फोन आने के बाद एमवीए ने आरक्षण बैठक का बहिष्कार किया: भुजबल
सुरेश नरेश
- 14 Jul 2024, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
बारामती, 14 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने रविवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार पर परोक्ष हमला करते हुए दावा किया कि विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) ने ‘‘शाम पांच बजे बारामती से फोन आने’’ के बाद नौ जुलाई को मराठा आरक्षण मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया।
भुजबल ने बारामती में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘जब सामाजिक मुद्दे सामने आते हैं, तो यह उम्मीद की जाती है कि शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता को बैठक में आना चाहिए और अपने सुझाव देने चाहिए। पहले जानबूझकर बहिष्कार करना और फिर सलाह देना सही नहीं है।’’
इस रैली को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख अजित पवार ने भी संबोधित किया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा नौ जुलाई को आहूत सर्वदलीय बैठक में एमवीए नेता शामिल नहीं हुए। उनका (एमवीए नेताओं का) दावा था कि मराठा आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया गया।
भुजबल ने दावा किया, ‘‘शाम पांच बजे बारामती से आए फोन के बाद विपक्षी नेता बैठक में नहीं आए।’’
उल्लेखनीय है कि पुणे जिले का बारामती लोकसभा क्षेत्र राकांपा (एसपी) नेता शरद पवार का गढ़ है।
भुजबल ने कहा कि उन्होंने राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार और राकांपा (एसपी) नेता जितेंद्र आव्हाड को बैठक में शामिल होने के लिए कहा था।
राकांपा नेता ने कहा, ‘‘मैंने आव्हाड से शरद पवार को भी बैठक में शामिल होने के लिए अपने साथ लेकर आने को कहा था। पवार साहब ने (पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत) वी पी सिंह द्वारा दिए गए आरक्षण को लागू किया और हम इसके लिए हमेशा उनके आभारी हैं।’’
भुजबल ने बारामती के मराठा, धनगर और ओबीसी समुदायों के लोगों के हितों की कथित रूप से अनदेखी करने के लिए विपक्ष पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, ‘‘बारामती के मराठा, माली और धनगर ओबीसी समुदायों के लोगों ने सुनेत्रा पवार या सुप्रिया सुले किसी को तो (लोकसभा चुनावों में) वोट दिया होगा। आप हमसे नाराज हो सकते हैं, लेकिन इन समुदायों को क्यों असहाय छोड़ रहे हैं? क्या उनके हितों की रक्षा करना आपका कर्तव्य नहीं है?’’
सुले ने अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हराकर बारामती लोकसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा।
सर्वदलीय बैठक के बहिष्कार के कारण राज्य विधानसभा में हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर जातिगत तनाव भड़काने और आरक्षण मुद्दे को हल करने के लिए रचनात्मक रूप से काम नहीं करने का आरोप लगाया।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) ने ‘सेज सोयरे’ (रक्त संबंधी) अधिसूचना का विरोध किया है, जिसके कार्यान्वयन की मांग मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने की है, जिसमें मराठों के कुनबी प्रमाण-पत्र रखने वाले रिश्तेदारों को ओबीसी कोटे में शामिल किया जाएगा।
सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।
भाषा सुरेश