हैरी पॉटर चुराने से लेकर लेखक बनने तक, केरल के इस लड़के ने एक लंबा सफर तय किया
सुरेश नरेश
- 14 Jul 2024, 05:45 PM
- Updated: 05:45 PM
(रोहित थायिल)
कोच्चि, 14 जुलाई (भाषा) वर्ष 2007 में 15-वर्षीय एक लड़के में कहानी सुनाने की अदम्य जिज्ञासा थी और शौक भी, तथा वह लड़का जे. के. राउलिंग की ‘‘हैरी पॉटर एंड द डेथली हैलोज’’ के प्रति अपना लोभ संवरण करने में असक्षम था। उस समय लगभग 900 रुपये की कीमत की यह किताब एक साधारण पृष्ठभूमि वाले छात्र की पहुंच से बाहर थी।
पढ़ने के अपने जुनून और अपने दोस्तों की चुनौती से प्रेरित होकर रीज थॉमस ने एक स्थानीय किताब की दुकान से एक उक्त पुस्तक की एक प्रति चुरा ली थी। यह ऐसी गलती थी, जो उसके सपनों को शुरू होने से पहले ही खत्म कर सकती थी।
खैर, उस युवक की किशोरावस्था की गलती का गवाह बनी किताब की दुकान, 'न्यू कॉलेज बुक स्टॉल', 17 साल बाद अब गर्व से उसकी खुद की प्रकाशित कृति, ‘‘नाइंटीज किड’’ को प्रदर्शित करती है।
थॉमस अब एक सफल लेखक और कई मलयालम फिल्मों के सहायक निर्देशक बन चुके हैं। वह अपने अपराध स्थल पर लौटे, लेकिन फटकार पाने के लिए नहीं, बल्कि वह सब कुछ चुकाने के लिए, जो उन्होंने एक बार चुराया था।
हालांकि, बुक स्टोर के मालिक देवदास ने घटनाओं के इस अद्भुत बदलाव को सकारात्मक तरीके से आत्मसात करते हुए लेखक की पुस्तक 'नाइंटीज किड' की हस्ताक्षरित प्रति के अलावा गलती की सजा के तौर पर कुछ और नहीं मांगा।
इस दिल को छू लेने वाली कहानी ने खुद राउलिंग का ध्यान आकृष्ट किया, जिन्होंने हाल ही में ट्विटर पर अपने मिले-जुले उद्गार व्यक्त किये। उन्होंने युवक की गलती तो बताई, लेकिन इससे मिली खुशी का जश्न भी मनाया।
जे. के. राउलिंग ने गत नौ जुलाई को सोशल मीडिया मंच पर ‘एक्स’ पर थॉमस से संबंधित एक लेख का लिंक साझा करते हुए पोस्ट किया, ‘‘मुझे पता है कि इसे साझा करने से मुझ पर पुस्तक चोरी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया जाएगा, इसलिए कृपया पुस्तकें न चुराएं, पुस्तक चोरी करना बुरी बात है। बहरहाल, यह सबसे प्यारी चीज है और इससे मुझे वाकई बहुत खुशी हुई।’’
‘‘नाइंटीज किड' एक मई, 2024 को रिलीज हुई, जिसके बाद थॉमस ने उस बुक स्टॉल पर जाने का साहस जुटाया, जहां से उन्होंने 17 साल पहले राउलिंग की किताब चुराई थी।
अब किताब का दूसरा संस्करण आ गया है।
जाने-माने निर्देशक से अभिनेता बने बेसिल जोसेफ की बहन शिंसी ने थॉमस को किताब की रचना के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
थॉमस ने कहा, ‘‘हैरी पॉटर ने हमारे बचपन को बहुत प्रभावित किया था, और धूम-2 (एक डकैती फिल्म शृंखला) ने मुझे स्टोर से किताब चुराने का साहस दिया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं अगली बार वहां गया तो स्टोर के मालिक ने मुझे पकड़ लिया, लेकिन सबूतों के अभाव में वह मुझ पर कोई आरोप नहीं लगा सके। मैं बाल-बाल बच गया, लेकिन बाद में, मैं मालिक को पैसे लौटाना चाहता था, लेकिन वहां जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। जब मेरी किताब प्रकाशित हुई और वह वहां स्टैंड पर लगी थी, तो मैं एक दोस्त के साथ वहां गया।’’
थॉमस के पास अब भी वह किताब है, जिसे उन्होंने 17 साल पहले चुराया था । उन्होंने यह किताब स्टॉल मालिक देवदास को दिखायी भी, जिन्होंने किताब के लिए भुगतान लेने से इनकार कर दिया। इसके बजाय उन्होंने थॉमस से स्टोर के लिए अपनी रचना पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा।
थॉमस ने बताया कि किताब उन सभी लोगों को जोड़ती है जो उस दौर में पैदा हुए थे जब जीवन में छोटी छोटी चीजों में ढेर सारी खुशियां होती थीं।
थामस ‘पद्मिनी’, ‘लूका’, ‘कम्माटीपडम’, ‘कार्बन,’ ‘मिनाल मुरली’ जैसी फिल्मों में सहायक निदेशक रहे हैं और कहते हैं, ‘‘ किताब प्रकाशित करवाना मेरा सपना था । अब मेरा अगला सपना फिल्म का निर्देशन करना है।’’
भाषा सुरेश