बाकू वार्ता ‘‘अत्यंत चुनौतीपूर्ण’’ होने की उम्मीद, नए वित्त लक्ष्य पर समझौता महत्वपूर्ण: नशीद
नेत्रपाल रंजन
- 14 Jul 2024, 06:07 PM
- Updated: 06:07 PM
(गौरव सैनी)
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने कहा है कि नवंबर में बाकू में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में बातचीत के ‘‘अत्यंत चुनौतीपूर्ण’’ होने की उम्मीद है और इस बात पर जोर दिया कि जलवायु कार्रवाई पर राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने के लिए नए वित्त लक्ष्य पर समझौता महत्वपूर्ण है।
पीटीआई-भाषा के साथ एक साक्षात्कार में ‘क्लाइमेट वल्नरेबल फोरम’ (सीवीएफ) के महासचिव नशीद ने कहा कि अजरबैजान की अध्यक्षता के तहत सीओपी-29 में प्रतिबद्धताओं पर बातचीत करने के उसके संकल्प की परीक्षा होगी।
सीवीएफ जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील विकासशील देशों का एक समूह है। इसकी स्थापना नवंबर 2009 में मालदीव की राजधानी माले में हुई थी। इस फोरम में अब 68 देश शामिल हैं जो 1.74 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
नशीद ने कहा कि जलवायु वित्त पूरी तरह जिम्मेदारी के बारे में है, न कि सहायता के बारे में।
उन्होंने कहा, ‘‘इसमें खरबों डॉलर शामिल हैं, अरबों नहीं, क्योंकि हमारे लिए जलवायु परिवर्तन से सही मायने में लड़ने का एकमात्र तरीका इससे बाहर निकलने के लिए निवेश करना है।’’
नशीद ने कहा कि अजरबैजान के बाकू में सीओपी-29 में नए सामूहिक परिमाणित लक्ष्य (एनसीक्यूजी) पर बहस को हल करना वैश्विक राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है।
सीवीएफ महासचिव ने कहा, ‘‘विकास बैंक को तेजी से उन उपकरणों की तैनाती बढ़ानी चाहिए जो हमारे संबंधित अधिकार क्षेत्र में पूंजी की लागत को समझदार स्तर तक कम करने में मदद कर सकते हैं। इस प्रकार जलवायु महत्वाकांक्षा और कार्यान्वयन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।’’
एनसीक्यूजी वह नयी राशि है जो विकसित देशों को विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई का समर्थन करने के लिए 2025 से वार्षिक तौर पर जुटानी होगी।
वर्ष 2009 में कोपनहेगन में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में अमीर देशों ने विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन को कम करने और अनुकूलित करने में मदद करने के लिए 2020 से सालाना 100 अरब अमेरिकी डॉलर प्रदान करने का वादा किया था।
हालांकि, इस लक्ष्य को प्राप्त करने में देरी ने विकसित और विकासशील देशों के बीच विश्वास को कम कर दिया है तथा यह वार्षिक जलवायु वार्ता के दौरान विवाद का एक निरंतर स्रोत रहा है।
मई में, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने दावा किया था कि विकसित देशों ने 2022 में विकासशील देशों को जलवायु वित्त में लगभग 116 अरब अमेरिकी डॉलर प्रदान करके लंबे समय से चले आ रहे 100 अरब अमेरिकी डॉलर के वादे को पूरा किया है जिसमें करीब 70 प्रतिशत धन ऋण के रूप में दिया गया।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन ‘ऑक्सफैम’ ने पिछले सप्ताह कहा था कि 2022 में अमीर देशों द्वारा प्रदान किया गया जलवायु वित्त 35 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का नहीं है।
नवंबर में अजरबैजान के बाकू में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में देश एनसीक्यूजी पर सहमत होने की समय सीमा तक पहुंचेंगे। लेकिन जर्मनी के बॉन में वर्ष के मध्य में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में इस मुद्दे पर हुई निराशाजनक प्रगति को देखते हुए आम सहमति हासिल करना आसान नहीं होगा।
नशीद ने कहा कि एनसीक्यूजी पर सर्वसम्मति हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो गया है क्योंकि अमीर देश ‘लक्ष्य’ शब्द पर सहमत हैं लेकिन ‘मात्राबद्ध’ शब्द पर विवाद करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे वे ‘सामूहिक’ और ‘नए’ शब्द पर विवाद करते हैं।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिए अमीर देशों को जिम्मेदार ठहराना महत्वपूर्ण है।
नशीद ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि इन देशों के पास युद्धों और भू-राजनीतिक उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए असीमित संसाधन हैं, फिर भी जब जलवायु की रक्षा की बात आती है तो वे गंभीर बजट सीमाओं का दावा करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम बाकू वार्ता को लेकर उसी तरह आशान्वित हैं जिस तरह हमने सीओपी-28 में यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) नेतृत्व के साथ उत्सुकता से बातचीत की थी। हर किसी की भूमिका है, और केवल अधिक बातचीत के बजाय, हमें अधिक ईमानदारी एवं नए विचारों की आवश्यकता है।’’
नशीद ने कहा कि सीओपी-29 में अच्छे परिणाम देने में सीवीएफ मदद करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा।
उन्होंने बड़ी तेल कंपनियों पर जलवायु क्षति कर और अजरबैजान द्वारा प्रस्तावित जीवाश्म ईंधन लेवी के विचार का भी स्वागत किया।
अजरबैजान ने मई में बड़ी तेल कंपनियों पर जलवायु क्षति कर और जीवाश्म ईंधन लेवी का प्रस्ताव रखा था। कुछ तेल और गैस उत्पादक खाड़ी देशों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।
दूसरी ओर, जी 20 का वर्तमान अध्यक्ष ब्राजील 'संपत्ति कर' पर आम सहमति बनाना चाहता है और इस महीने के अंत में जी20 के वित्त मंत्रियों की बैठक में एक संयुक्त घोषणा पर जोर देने की संभावना है।
हर देश में अत्यधिक अमीरों पर दो प्रतिशत वार्षिक कर लगाने का प्रस्ताव कम से कम 2013 से चर्चा में है। पिछले कुछ वर्षों में इसके प्रति अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ रहा है।
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि अब समय आ गया है कि जलवायु न्याय को जलवायु समृद्धि के साथ जोड़ा जाए।
भाषा नेत्रपाल