आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव : राजधानी शहर, विशेष श्रेणी का दर्जा होंगे अहम मुद्दे
सिम्मी शफीक
- 16 Mar 2024, 10:10 PM
- Updated: 10:10 PM
अमरावती, 16 मार्च (भाषा) लोकसभा चुनावों के साथ होने वाले आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में ‘‘राजधानी शहर का अभाव’’ और विशेष श्रेणी का दर्जा (एससीएस) अहम चुनावी मुद्दों में शामिल होंगे।
निर्वाचन आयोग ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव 13 मई को होंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और मौजूदा मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी द्वारा अपनाए गए बिल्कुल अलग-अलग रुख के कारण आंध्र प्रदेश को राज्य के विभाजन के एक दशक बाद भी कोई ‘‘स्थापित राजधानी शहर’’ नहीं मिल पाया है।
नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) जनसेना के बाहरी समर्थन के साथ 10 साल के अंतराल के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी के रूप में 2014 में सत्ता में आई थी।
हैदराबाद के तेलंगाना में स्थित होने के कारण आंध्र प्रदेश के पास कोई राजधानी शहर नहीं रहा। ऐसे में नायडू ने गुंटूर जिले के अमरावती में भविष्य की राजधानी बनाने की भव्य योजना शुरू की लेकिन 2014 से 2019 तक पांच साल के अपने कार्यकाल के अंत में तेदेपा सरकार अमरावती को राजधानी के रूप में विकसित करने में कुछ खास नहीं कर सकी।
उच्च न्यायालय, सचिवालय और विधानसभा भवन स्थापित किए गए हैं, लेकिन राजधानी के लिए आवश्यक अन्य बुनियादी ढांचे पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाए।
इसके बाद मुख्यमंत्री बने रेड्डी ने अमरावती को राजधानी बनाने की नायडू की परियोजना पर पानी फेरते हुए तीन राजधानियां- विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी, अमरावती को विधायी राजधानी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी बनाने की घोषणा की।
गुंटूर के पास स्थित नागार्जुन विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर वी अंजी रेड्डी ने कहा कि राजनीतिक दल अपनी चुनावी योजना में राजधानी शहर और एससीएस जैसे मुद्दों को अहम मुद्दों के रूप में शामिल नहीं करेंगे।
रेड्डी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘अब उनका जोर मतदाताओं का ध्यान आकर्षित करने पर होगा। जनहित सर्वोपरि नहीं है। उनका तात्कालिक लक्ष्य यह है कि मतदाताओं को अपनी ओर कैसे आकर्षित किया जाए। वे वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने पर संभवतः अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे। वे महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा करने की अनुमति दे सकते हैं।’’
आंध्र प्रदेश को विशेष श्रेणी का दर्जा देने से इनकार करने के अलावा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 एक और अधूरा वादा है।
राजग सरकार का हिस्सा होने के बावजूद नायडू दक्षिणी राज्य के लिए एससीएस हासिल करने में विफल रहे और उन्हें एससीएस के बदले में ‘‘अपेक्षाकृत कमजोर’’ विशेष पैकेज स्वीकार करने के आरोपों का सामना करना पड़ा।
भाषा सिम्मी