गांव की लड़की से हवाई अड्डे की प्रबंधक बनने तक के सफर में परिवार और समाज भी बना रुकावट
जितेंद्र माधव
- 08 Mar 2024, 08:40 PM
- Updated: 08:40 PM
कोलकाता, आठ मार्च (भाषा) असम के दूरदराज के एक गांव की साधारण सी लड़की से एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानन कंपनी के प्रबंधक बनने तक के सफर में पंपा महंत को संसाधनों की कमी से लेकर स्वयं के परिवार और समाज के लोगों की विचारधारा से लड़ना पड़ा था।
विमानन कंपनी के प्रबंधक एक ऐसा पद है, जिसपर ज्यादातर पुरुषों का कब्जा होता है।
फिलहाल पंपा अपनी विमानन कंपनी की ओर से विमानों की सुरक्षा, उड़ान संचालन, यात्री प्रबंधन, प्रशासन आदि का प्रबंधन करती हैं।
असम के एक गांव में एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मीं पंपा को अपने सपने को साकार करने के लिए कई बाधाओं से लड़ना पड़ा।
कोलकाता में नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 'अकासा एयर' के हवाई अड्डा प्रबंधक के रूप में कार्यरत पंपा ने कहा, '' मेरी मां के अलावा कोई नहीं चाहता था कि मैं अपने गांव से बाहर निकलकर काम करूं। दरअसल मुझे अपने परिवार से कोई समर्थन नहीं मिला।''
पंपा को अपने पिता से भी वित्तीय सहायता नहीं मिली क्योंकि वह महिलाओं के बारे में एक अलग धारणा रखते थे।
महंत ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''मेरे पिता चाहते थे कि मैं घर पर रहूं और बाद में एक गृहिणी बन जाऊं। मुझे यह सच्चाई बताने में कोई दिक्कत नहीं है।''
महंत को सीमित संसाधनों और सामाजिक मानदंडों जैसी कई चुनौतियों से जूझना पड़ा, जो लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पक्ष में नहीं थीं लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
महंत को अपने स्कूली दिनों में बार बार अपना स्थान बदलना पड़ता था क्योंकि उनके पिता की नौकरी बदलती रहती थी लेकिन उन्होंने खुद को हालात में तुरंत ढालना सीखा।
वित्तीय समस्या को दूर करने के लिए पंपा, कॉलेज के साथ-साथ एक कॉल सेंटर में अंशकालिक रूप से काम करने लगीं।
उन्होंने कहा, ''कई बार मैं ठीक से सो तक नहीं पाती थी क्योंकि मुझे कॉलेज जाना होता था और कक्षाओं के बाद काम पर जाना होता था।''
यह पूछने पर कि वह विमानन उद्योग में अपना करियर क्यों बनाना चाहती थीं, जिसपर महंत ने कहा, ''मैंने हमेशा इस पेशे को बहुत दिलचस्प पाया क्योंकि यहां हर दिन एक नया दिन होता है।''
पंपा ने कहा, ''जब से मैंने काम करना शुरू किया मेरे परिवार में बहुत कुछ बदल गया। सबसे अच्छी बात यह है कि (अब) मेरे पिता एक बदले हुए मनुष्य हैं। उनकी धारणा बदल गई और मैं इससे बेहद खुश हूं। मेरी चार भतीजियां हैं और आज वे सभी मुझे सम्मान की नजरों से देखती हैं।''
पंपा ने 2011 में एक निजी विमानन कंपनी में प्रशिक्षु के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी।
पंपा की पहली नियुक्ति गुवाहाटी में थी, जिसके बाद वह कोलकाता, मालदीव, कोयंबटूर, बेंगलुरु, अहमदाबाद और एक बार फिर से कोलकाता वापस आ गई। हालांकि इस बार वह एयरलाइन के हवाई अड्डे के प्रबंधक के रूप में काम कर रही हैं।
भाषा जितेंद्र