कांग्रेस और भाजपा एक साल से भी कम समय में कर्नाटक में एक और बड़ी चुनावी लड़ाई के लिए तैयार
संतोष
- 16 Mar 2024, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
बेंगलुरु, 16 मार्च (भाषा) लोकसभा चुनाव की शनिवार को हुई घोषणा के मद्देनजर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कर्नाटक में एक साल से भी कम समय में एक और बड़ी चुनावी जंग के लिए तैयार हैं।
दोनों दल पिछले साल मई में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में एक दूसरे से भिड़े थे।
निर्वाचन आयोग ने शनिवार को लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों की घोषणा की। इस बार चुनाव 19 अप्रैल से एक जून के बीच सात चरणों में होंगे और मतगणना चार जून को होगी। कर्नाटक में 26 अप्रैल और सात मई को दो चरणों में चुनाव होंगे।
दक्षिण भारत में कर्नाटक भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य है क्योंकि केवल यहीं वह अतीत में सत्ता पर काबिज रही है। कांग्रेस ने 2019 के आम चुनाव में राज्य की कुल 28 लोकसभा सीट में से महज एक सीट जीती थी।
कर्नाटक में पिछले साल मई में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और जद (एस) के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था। इस मुकाबले में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद सत्तारूढ़ हुई कांग्रेस मजबूत प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने 15 से 20 लोकसभा सीट जीतने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में 25 सीट पर जीत हासिल की थी और उसके समर्थन से एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत हासिल की थी।
पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा की अध्यक्षता वाली जनता दल-सेक्युलर (जद-एस) एक निर्वाचन क्षेत्र में विजयी हुई थी। कांग्रेस और जद(एस) ने उस समय गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। जद (एस) ने विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन करते हुए 224 सदस्यीय विधानसभा में सिर्फ 19 सीट जीतीं थी, जबकि कांग्रेस को 135 और तत्कालीन सत्तारूढ़ भाजपा को 66 सीट मिली थीं।
क्षेत्रीय दल जद(एस) पिछले साल सितंबर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हो गया और वह इस बार भाजपा के साथ गठबंधन करके लोकसभा चुनाव लड़ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के संसदीय बोर्ड के सदस्य बी एस येदियुरप्पा ने हाल ही में कहा था, ‘‘हमें शत प्रतिशत विश्वास है कि हम कम से कम 25 सीट जीतेंगे।’’
आगामी चुनावों को उनके बेटे बी वाई विजयेंद्र के लिए भी अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जिन्हें पिछले साल नवंबर में पार्टी की राज्य इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
भले ही सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा ने चुनाव के लिए राज्य से अपने उम्मीदवारों की पूरी सूची जारी नहीं की है, लेकिन उनके चुनावी मुद्दों को लेकर अंदाजा लगाया जा सकता है।
हाल में यहां एक लोकप्रिय भोजनालय में हुए बम विस्फोट और ‘विधान सौध’ के गलियारों में ‘पाकिस्तान समर्थक’ नारे लगने से भाजपा को कांग्रेस सरकार पर हमला करने के लिए नया हथियार मिल गया है।
कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि पार्टी अपनी ‘‘गारंटी योजनाओं’’ की लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश करेगी और राज्य के प्रति केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार के ‘‘सौतेले’’ रवैये को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य के कई हिस्सों में पानी की कमी भी अहम चुनावी मुद्दा बन सकता है जिसके लिए कांग्रेस तथा भाजपा एक-दूसरे पर दोषारोपण करेंगे।
सिद्धरमैया, कर्नाटक के मंत्रियों, कांग्रेस विधायकों और सांसदों ने राज्य के लिए धन जारी करने में ‘‘अन्याय’’ के खिलाफ सात फरवरी को दिल्ली में प्रदर्शन किया था।
संविधान में संशोधन पर भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े की टिप्पणी को भी कांग्रेस चुनावी मुद्दा बना सकती है।
भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने इस महीने की शुरुआत में बेलागावी जिले के चिकोडी में बूथ स्तरीय पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रचार अभियान का रुख तय कर दिया था।
उन्होंने कांग्रेस और कर्नाटक में उसकी सरकार पर आतंकवादियों के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने 27 फरवरी को यहां राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सैयद नसीर हुसैन की जीत के जश्न के दौरान ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए जाने और एक मार्च को ‘रामेश्वरम कैफे’ में हुए कम तीव्रता वाले बम विस्फोट का जिक्र करते हुए यह आरोप लगाया था।
इस चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को उसकी राज्य इकाई के प्रमुख शिवकुमार के लिए एक अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने विधानसभा कार्यकाल के दौरान बदलाव की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री बनने की अपनी महत्वाकांक्षा छिपाकर नहीं रखी है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘मोदी की गारंटी’ और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया नीत कांग्रेस सरकार की गारंटी के बीच मुकाबला भी देखने को मिल सकता है।
भाषा सिम्मी