लोकसभा चुनाव: सभी राज्यों में भाजपा, कांग्रेस समेत सभी दल अधिक से अधिक सीटें पाने की जुगत में
वैभव माधव
- 16 Mar 2024, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
हैदराबाद/तिरुवनंतपुरम, 16 मार्च (भाषा) लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा के साथ प्रचार अभियान का बिगुल बज चुका है और तेलंगाना, केरल, गोवा, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में सत्तारूढ़ और विपक्षी दल अधिक से अधिक लोकसभा सीटें पाने की जुगत में लग गए हैं।
तेलंगाना में एक दिन पहले ही बीआरएस के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की पुत्री के. कविता की गिरफ्तारी पार्टी के लिए निराशाजनक रही है जो दस साल तक राज्य की सत्ता में रहने के बाद पिछले साल कांग्रेस से हार गई।
तेलंगाना में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा उपचुनाव 13 मई को होंगे।
मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने पहले कहा था कि कांग्रेस राज्य में 14 सीट हासिल करने की कोशिश कर रही है, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा के लिए 12 सीट का लक्ष्य रखा है। तेलंगाना में लोकसभा की 17 सीट हैं और 2019 में सर्वाधिक 9 सीट बीआरएस के खाते में गई थीं।
विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस का मनोबल भी बढ़ा हुआ है। उसे चुनावी ‘गारंटियों’ को लागू करने का लाभ लोकसभा चुनाव में मिलने की उम्मीद है।
दूसरी तरफ भाजपा को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बड़ी सफलता की आशा है। गृह मंत्री शाह मार्च में हैदराबाद में जनसभाओं को संबोधित कर भाजपा के लिए बड़ी सफलता का दावा कर चुके हैं।
तेलंगाना के साथ अन्य राज्यों में भी भाजपा को राम मंदिर के उद्घाटन के बाद चुनाव में सफलता मिलने की उम्मीद है।
केरल में 26 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए स्थानीय के साथ ही राष्ट्रीय मुद्दे भी हावी हैं।
इनमें नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), चुनावी बॉण्ड विवाद, मणिपुर में अशांति और राज्य में मानव-पशु संघर्ष शामिल हैं।
इन्हीं मुद्दों पर सत्तारूढ़ माकपा नीत एलडीएफ, विपक्षी कांग्रेस नीत यूडीएफ और भाजपा नीत राजग प्रचार अभियान केंद्रित रखेंगे।
गोवा में सात मई को एक चरण में चुनाव होगा और इस राज्य में राज्य के युवाओं को रोजगार, सभी लौह अयस्क खनन परिचालन की बहाली और तटीय नियमन क्षेत्रों को मंजूरी जैसे मुद्दे प्रभावी रहेंगे।
डेबोलिम हवाई अड्डे के बंद होने की संभावना को लेकर स्थानीय लोगों के बीच आशंकाएं और विधानसभा में आदिवासियों की राजनीतिक आरक्षण की मांग भी प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
गोवा में दो लोकसभा क्षेत्र हैं जहां उत्तरी गोवा में भाजपा तो दक्षिण गोवा में कांग्रेस का कब्जा है।
हरियाणा में भाजपा ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से कुछ दिन पहले ही मनोहर लाल खट्टर की जगह अपने प्रदेश अध्यक्ष नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया है।
विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले राज्य में मुख्यमंत्री बदलकर भाजपा नये चेहरे के साथ चुनाव लड़ेगी।
इस कदम को हरियाणा में छठे चरण में 25 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव में गैर-जाट वोट को लामबंद करने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।
राज्य में भाजपा नीत गठबंधन से अलग हुई जननायक जनता पार्टी और इंडियन नेशनल लोकदल भी मैदान में हैं।
त्रिपुरा जैसे उत्तर पूर्व के राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान भाजपा नरेन्द्र मोदी नीत केंद्र सरकार की उपलब्धियों को आधार बना सकती है, वहीं विपक्ष महंगाई और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर जोर देगा।
राज्य में दो लोकसभा क्षेत्र- पश्चिम त्रिपुरा और पूर्व त्रिपुरा हैं। फिलहाल दोनों पर भाजपा का कब्जा है।
हाल में भाजपा नीत सरकार में शामिल हुई टिपरा मोथा ब्रू समझौते और त्रिपक्षीय समझौते की बात कर सकती है।
उत्तर पूर्व के ही राज्य अरुणाचल प्रदेश में 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव एकसाथ होंगे।
राज्य में भ्रष्टाचार के मुद्दों से लेकर क्षेत्रीय विवाद तक के विषय हैं जो चुनाव प्रचार में छाए रह सकते हैं।
राज्य में लोक सेवा आयोग प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा और राज्य शिक्षा विभाग में भर्ती में अनियमितताएं जैसे मुद्दे गरम हैं।
सत्तारूढ़ भाजपा अपना ध्यान अवसंरचना और सीमा क्षेत्र विकास पर केंद्रित कर सकती है वहीं विपक्षी कांग्रेस भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों के साथ भाजपा को घेरने का प्रयास कर सकती है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ में राज्य के युवाओं और महिलाओं को कांग्रेस की सरकार बनने पर पांच गारंटी दी गई हैं।
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