जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने लोगों को लोकतांत्रिक हिस्सेदारी से वंचित रखने का लगाया आरोप
रवि कांत माधव
- 16 Mar 2024, 08:13 PM
- Updated: 08:13 PM
श्रीनगर/जम्मू, 16 मार्च (भाषा) जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ नहीं हो रहे हैं।
कश्मीर के राजनीतिक दलों का कहना है कि चुनावों को ठंडे बस्ते में रखकर केंद्र शासित प्रदेश के लोगों को एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक हिस्सेदारी और अधिकार से 'वंचित' किया जा रहा है।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग (ईसी) के विधानसभा और लोकसभा चुनाव एकसाथ नहीं कराने के कदम का बचाव किया है।
निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के लिए चुनाव लोकसभा चुनाव के बाद होंगे क्योंकि दोनों का एक साथ आयोजन सुरक्षा की दृष्टि से व्यवहार्य नहीं है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव नहीं कराने के कदम में 'कुछ गड़बड़' है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, ‘‘ यदि लोकसभा चुनाव के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं, तो राज्य चुनाव के लिए यह ठीक कैसे नहीं है? कुछ गड़बड़ है। ’’
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि निर्वाचन आयोग जम्मू-कश्मीर में एक साथ चुनाव कराने में असमर्थ है, जबकि उसने स्वीकार किया है कि केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं।
उमर अब्दुल्ला ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ 'एक राष्ट्र एक चुनाव' के लिए बहुत कुछ किया जा रहा है। निर्वाचन आयोग जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराने में असमर्थ है, भले ही वे स्वीकार करते हैं कि चुनाव होने वाले हैं, आम चुनाव2024। ’’
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘हम निर्वाचन आयोग से कोई उम्मीद नहीं कर रहे थे, क्योंकि उससे कोई सकारात्मक माहौल नहीं मिल रहा था। हम उम्मीद के विपरीत उम्मीद कर रहे थे कि सामान्य स्थिति बहाल होगी और यह लोगों को खुद पर शासन करने का अधिकार देगी। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ।’’
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उनकी लोकतांत्रिक हिस्सेदारी और अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
पीडीपी के प्रवक्ता मोहित भान ने कहा, ‘‘पिछले 10 वर्षों से जम्मू-कश्मीर के लोगों को लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान से रणनीतिक रूप से वंचित किया जा रहा है। यहां तक कि यहां पंचायत और नगरपालिका चुनाव भी नहीं हो रहे हैं जबकि लोग लोकसभा चुनाव कराने की बात कर रहे हैं। हमें उस तरह के प्रबंधन और मामलों के लिए बिल्कुल खेद है, जो आज एक निश्चित राजनीतिक दल की सनक और इच्छानुसार चलाए जा रहे हैं। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।’’
पीडीपी नेता नईम अख्तर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से एक प्रकार से बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के मुख्य प्रवक्ता रवींदर शर्मा ने पीटीआई-भाषा से से कहा कि निर्वाचन आयोग ने केंद्र शासित प्रदेश के लोगों को निराश किया है।
उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने सर्वसम्मति से जम्मू-कश्मीर में एक साथ चुनाव कराने की मांग की थी।
हालांकि, भाजपा ने निर्वाचन आयोग के इस कदम का बचाव किया है।
भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख रविंदर रैना ने कहा, ‘‘हम यह भी चाहते थे कि विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ हों। लेकिन, यह निर्वाचन आयोग का निर्णय है, जिसने कहा है कि विधानसभा चुनाव आम चुनाव के बाद होंगे। यह एक स्वागत योग्य कदम है। सुरक्षा संबंधी चिंताएं रही होंगी।’’
सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (जेकेपीसी) ने कहा कि जब एक चुनाव कराया जा रहा है, तो निर्वाचन आयोग को इसके साथ एक और चुनाव भी कराना चाहिए था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एम वाई तारीगामी ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा चुनावों की घोषणा नहीं करना एक बड़ी निराशा है।
भाषा रवि कांत