लोकसभा चुनाव : राजस्थान में भाजपा को मजबूत संगठन तो कांग्रेस को गहलोत की राजनीतिक पकड़ से आस
पृथ्वी जितेंद्र
- 16 Mar 2024, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
जयपुर, 16 मार्च (भाषा) आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजस्थान में जहां एक तरफ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपने मजबूत संगठन का फायदा मिलने की उम्मीद है तो वहीं कांग्रेस को 'राजनीति के जादूगर' कहे जाने वाले पार्टी के दिग्गज नेता अशोक गहलोत की राजनीतिक पकड़ से बाजी पलटने की उम्मीद है। राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों पर बीते दो लोकसभा चुनाव में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का दबदबा कायम रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने जीत हासिल कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था।
निर्वाचन आयोग (ईसी) ने शनिवार को लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों की घोषणा की, जिसके तहत राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे।
इस बार के लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा बूथ स्तर पर अपनी मजबूत संगठनात्मक क्षमता को अपनी जीत का सूत्र मान रही है तो वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैलियां पार्टी को जीत हासिल करने में मदद कर सकती हैं।
हालांकि कई सांसदों का टिकट काटे जाने से स्थानीय नेताओं में नाराजगी भाजपा के लिए जरूर मुसीबत बन सकती है।
चुरू से सांसद और भाजपा नेता राहुल कस्वां टिकट काटे जाने के बाद हाल ही में कांग्रेस में शामिल हो गए और इस बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
हालिया विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत भी भाजपा के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है साथ ही प्रश्न पत्र लीक मामलों में बड़ी कार्रवाई से युवा मतदाता पार्टी की ओर आकर्षित हो सकते हैं। वहीं पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को लेकर भाजपा का दावा है कि राज्य सरकार ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर इस दिशा में काम आगे बढ़ाया है।
वहीं कांग्रेस के लिए अशोक गहलोत जैसे दिग्गज नेता की राजनीतिक सूझबूझ संजीवनी का काम कर सकती है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की युवाओं और गुर्जर समुदाय के बीच लोकप्रियता भी पार्टी के लिए 'आस्ति' है। हालांकि यह भी तथ्य है कि पिछले कुछ वर्ष में गहलोत और पायलट के बीच 'सत्ता संघर्ष' ने पार्टी को कमजोर किया है। साथ ही राज्य में पार्टी का संगठनात्मक ढांचा और बूथ प्रबंधन, भाजपा की तुलना में कहीं कमजोर है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस चुनाव में कांग्रेस गुर्जर समाज में असंतोष को भुनाने की कोशिश करेगी। समाज के एक वर्ग का मानना है कि राज्य की नयी भाजपा सरकार में उसे वह प्रतिनिधित्व नहीं मिला जिसके वह हकदार थे।
इसके अलावा कांग्रेस क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन कर सकती है। पूर्व सांसद करण सिंह व पूर्व मंत्री महेंद्रजीत मालवीया सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने हाल ही में भाजपा का दामन थामा है। देखना होगा कि कांग्रेस इसके असर से कैसे निपट पाती है।
भाषा पृथ्वी