कैंसर कोशिकाओं की निगरानी के लिए तकनीक विकसित करने पर काम कर रहे शोधकर्ता
संतोष
- 09 Aug 2026, 04:37 PM
- Updated: 04:37 PM
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) शोधकर्ता ऐसी तकनीक की खोज कर रहे हैं जिनकी मदद से वैज्ञानिक जीवित कैंसर कोशिकाओं को वास्तविक समय में देख सकें। वैज्ञानिकों को इस तकनीक से बीमारी को बेहतर ढंग से समझने और नयी दवाओं का आविष्कार करने में मदद मिलेगी।
जीनोम के अध्ययन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और 'प्रिसिजन मेडिसिन' में हुई प्रगति के बावजूद वैज्ञानिक अभी भी बड़ी मात्रा में उन कोशिकाओं का अध्ययन करते हैं, जिन्हें रासायनिक प्रक्रिया से स्थिर कर दिया जाता है या नष्ट कर दिया जाता है। इससे एक ऐसी जैविक प्रक्रिया की केवल स्थिर तस्वीर मिलती है, जो वास्तव में लगातार बदलती रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीवित कोशिकाएं वास्तविक समय में किस तरह व्यवहार करती हैं, इसे समझने से जैव चिकित्सा अनुसंधान में बड़ी मदद मिल सकती है। खासतौर पर कैंसर के क्षेत्र में, जहां कोशिकाएं लगातार बदलती हैं, खुद को ढालती हैं और इलाज के प्रति प्रतिरोध विकसित करती हैं।
सैन फ्रांसिस्को स्थित जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप 'प्रिसीजेनेटिक्स' की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) परिमिता मिश्रा ने कहा कि उनकी कंपनी ऐसी तकनीक विकसित कर रही है, जिससे शोधकर्ता जीवित कोशिकाओं का लगातार निरीक्षण कर सकेंगे।
यह तकनीक 'रेमन स्पेक्ट्रोस्कोपी', 'फोटोनिक्स', 'माइक्रोफ्लूडिक्स' और 'कंप्यूटेशनल बायोलॉजी' की मदद से काम करती है। इससे जीवित कोशिकाओं से वास्तविक समय में जैव रासायनिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। कंपनी के अनुसार यह तकनीक "लाइव-सेल सिनेमा" कही जाती है।
मिश्रा ने कहा, "जीव विज्ञान लगातार बदलता रहता है, लेकिन दशकों से हम इसे मुख्य रूप से स्थिर तस्वीरों के माध्यम से समझते रहे हैं। अगर हमें यह जानना है कि कैंसर कोशिकाएं क्यों बदलती हैं, खुद को कैसे ढालती हैं या इलाज का प्रतिरोध क्यों करती हैं, तो हमें ऐसी तकनीकों की जरूरत होगी जो जीवित जैविक प्रक्रियाओं पर लगातार नजर रखने में मददगार हों। हमारा उद्देश्य इस संबंध में शोधकर्ताओं की मदद करना है।"
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के कैंसर चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. श्याम अग्रवाल ने कहा कि वास्तविक समय में निरीक्षण करने वाली तकनीकों से शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि संभावित दवाओं के प्रति कोशिकाएं किस तरह प्रतिक्रिया करती हैं और शुरुआती शोध के दौरान होने वाले सूक्ष्म जैव रासायनिक बदलावों पर नजर रख सकती हैं।
उन्होंने कहा, "वास्तविक समय में कोशिकाओं को देखने वाली तकनीकें वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकती हैं कि नई दवाओं का कोशिकाओं पर क्या असर होता है। इससे वे कोशिकाओं में होने वाले छोटे बदलावों को जल्दी पहचान सकेंगे और नयी व बेहतर दवाओं की खोज में मदद मिलेगी।"
गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के हेमेटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के प्रधान निदेशक डॉ. राहुल भार्गव ने कहा कि कैंसर एक बेहद गतिशील बीमारी है और शोधकर्ता ऐसी तकनीकों की तलाश कर रहे हैं, जो समय के साथ जीवित कोशिकाओं में होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
उन्होंने कहा, "कोशिकाओं में होने वाले बदलावों को लगातार और बिना नुकसान पहुंचाए दिखाने वाले नये आविष्कार नयी तकनीक बीमारियों को बेहतर तरीके से समझने और नयी दवाओं की खोज में तेजी लाने के लिए मददगार शोध उपकरण बन सकती हैं। हालांकि, इनके इस्तेमाल से पहले चिकित्सा स्तर पर इनकी पुष्टि जरूरी है, लेकिन यह जैव चिकित्सा विज्ञान के लिए एक आशा की किरण है।"
भाषा जोहेब संतोष
संतोष
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