राकांपा (शप) की नेता सुप्रिया सुले ने एफसीआरए विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध किया
माधव
- 08 Aug 2026, 06:47 PM
- Updated: 06:47 PM
मुंबई, आठ अगस्त (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने एफसीआरए विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध करते हुए शनिवार को कहा कि विदेशी चंदे को हमेशा संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह इसे वापस ले या संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे।
सुले ने यहां मीडिया से बातचीत में कहा कि सभी राजनीतिक दलों को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा करने का मौका दिया जाना चाहिए।
सुले का बयान उन खबरों के बीच आया है जिनमें कहा गया है कि विधेयक को अगले सप्ताह संसद में चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया जा सकता है।
बारामती की सांसद ने सरकार को इस विधेयक को जल्दबाजी में संसद से पारित कराने के खिलाफ आगाह किया।
उन्होंने कहा, ''हम एफसीआरए विधेयक के मौजूदा स्वरूप को खारिज करते हैं और इससे असहमत हैं। यदि सरकार इस विधेयक को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है, तो इसे जेपीसी के पास भेजा जाना चाहिए। एक मजबूत लोकतंत्र में केवल किसी बात का विरोध करना ही पर्याप्त नहीं है; हमें साथ बैठकर उस पर चर्चा भी करनी चाहिए।''
सुले ने कहा कि विदेशी वित्तपोषण पर हमेशा संदेह नहीं किया जा सकता । उन्होंने कहा कि अगर किसी धनराशि का संबंध मादक पदार्थों की तस्करी या आतंकवाद जैसी अवैध गतिविधियों से हो, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर सुले ने कहा कि इस पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि विधेयक अभी तक संसद में पेश ही नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, ''जब यह विधेयक लाया जायेगा, तो हम अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ हर पहलू पर चर्चा करेंगे।''
सुले ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की युवा पीढ़ी को लेकर हाल में की गई टिप्पणियों का स्वागत किया और कहा कि राजनीतिक दलों को युवाओं की बात सुननी चाहिए।
उन्होंने कहा, ''मैं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने इस बात को पहचाना कि नयी पीढ़ी कितनी ईमानदार है। मैं उनके बयान का स्वागत करती हूं। अगर भाजपा भी उनकी कही बातों पर ध्यान दे और उन्हें सुने, तो मुझे खुशी होगी।''
युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सुले ने कहा कि नयी पीढ़ी खुलकर अपनी बात कह सकती है, क्योंकि वह नौकरी, ठेके या अन्य लाभों के लिए सरकार पर निर्भर नहीं है।
सुले ने महाराष्ट्र सरकार पर चुनाव-केंद्रित रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने किसानों को दी जाने वाली सहायता के साथ 'शर्तें' जोड़े जाने का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ''जब चुनाव आते हैं, तो सरकार दोनों हाथ खोलकर फैसले करती है, लेकिन चुनाव खत्म होने और सत्ता में आने के बाद वही सरकार अपने हाथ समेट लेती है।''
महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर की गई ''गूंगी गुड़िया'' टिप्पणी पर उठे विवाद के बारे में सुले ने इसे अनुचित बताया और कहा कि उन्होंने इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व से बात की है।
उन्होंने कहा, ''मैं सार्वजनिक रूप से कांग्रेस नेतृत्व का धन्यवाद करती हूं। उनसे मेरी बात होने के आधे घंटे के भीतर ही कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया कि महाराष्ट्र में स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया पर दिया गया यह बयान कांग्रेस का आधिकारिक रुख नहीं था।''
सुले ने कहा कि राजनीतिक आलोचना व्यक्तिगत या अपमानजनक नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने सभी पक्षों से इस मुद्दे को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की अपील करते हुए कहा कि देश और महाराष्ट्र के सामने ''इससे भी बड़ी आर्थिक चुनौतियां हैं''।
भाषा
देवेंद्र माधव
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