छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा
जोहेब
- 07 Aug 2026, 06:55 PM
- Updated: 06:55 PM
रायपुर, सात अगस्त (भाषा) छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से गठित समिति के मसौदा तैयार करने के बाद राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी, लेकिन इसमें अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को शामिल नहीं किया जाएगा।
शर्मा ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर अन्य सभी समुदायों को शामिल किया जाएगा।
राज्य में तैयार किए जा रहे यूसीसी के मसौदे से अनुसूचित जनजाति को बाहर रखने के बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने कहा, "मुख्यमंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन अनुसूचित जनजाति समुदायों को इससे अलग रखा जाएगा, जिनका जीवन पारंपरिक रूप से उनके रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार चलता है। अन्य लोगों को यूसीसी में शामिल किया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि सरकार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा घोषित रोडमैप के अनुसार काम कर रही है और प्रस्तावित समान नागरिक संहिता से जनजाति समुदायों को बाहर रखने के बारे में शुरू से ही स्थिति स्पष्ट थी।
इससे पहले बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से बात करते हुए शर्मा ने कहा था, "यूसीसी एक ऐसा मुद्दा है जिस पर समाज में बार-बार चर्चा होती है। छत्तीसगढ़ में भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है और उसके माध्यम से काम किया जा रहा है। लोगों से उनकी राय मांगी जा रही है।"
उन्होंने कहा था, ''मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय इससे अलग होगा। वह इसके लिए बाध्य नहीं होगा क्यूंकि वह पांरपरिक ढंग से जीवन जीते हैं। लेकिन अन्य समुदायों के लिए एक कानून और एक प्रावधान होना चाहिए। इस पर काम किया जा रहा है। आने वाले समय यूसीसी हमारे छत्तीसगढ़ में भी लागू होगा।''
शर्मा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने शुक्रवार को कहा कि यदि सरकार ने आदिवासियों को यूसीसी से बाहर रखने का फैसला किया है, तो ऐसा कांग्रेस के विरोध और "डर" की वजह से हुआ है।
बैज ने कहा, ''हम आदिवासी समुदाय के साथ मिलकर यूसीसी को लेकर लगातार चिंताएं जताते रहे हैं। सरकार ने बार-बार कहा है कि वह यूसीसी लागू करेगी। हमने बताया है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की बड़ी आबादी है और संविधान के तहत आदिवासियों को विशेष अधिकार मिले हैं।''
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की आबादी राज्य की कुल आबादी का 32 प्रतिशत से अधिक है और उन्हें विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में यूसीसी लागू करने का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्यों की एक कमेटी बनाई है, जिसने नागरिकों, संगठनों और अन्य लोगों से सुझाव और राय मांगी है।
अधिकारियों ने बताया कि जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली इस कमेटी ने सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों को 15 अक्टूबर तक अपनी राय और सुझाव भेजने के लिए कहा है।
उन्होंने बताया कि यह पैनल जून में बनाया गया था और इसमें अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) देसाई के अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम के राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह समिति छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता की जरूरत पर विचार कर रहा है और इसका ढांचा तैयार कर रहा है। इसका मकसद धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों को संविधान के एक ही दायरे में लाना है।
उन्होंने बताया कि यूसीसी लागू करने में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था। उत्तराखंड के अलावा गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी यूसीसी लागू किया जा चुका है।
पिछले महीने, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा था कि यूसीसी संबंधि विधेयक को राज्य विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।
भाषा संजीव जोहेब
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