केरल के गृह विभाग ने जेल में बंद भाजपा पार्षद के छुट्टी के अनुरोध संबंधी पत्र को रद्द किया
पवनेश
- 07 Aug 2026, 03:33 PM
- Updated: 03:33 PM
तिरुवनंतपुरम, सात अगस्त (भाषा) केरल गृह विभाग ने जेल में बंद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षद आर. सुगाथन के छह महीने की छुट्टी के अनुरोध वाले पत्र को रद्द कर दिया, जिसके तहत पार्षद को छुट्टी देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। एक आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई।
भाजपा शासित तिरुवनंतपुरम निगम के वाझोट्टुकोणम वार्ड से पार्षद सुगाथन वर्तमान में केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (कापा) के तहत त्रिशूर के विय्यूर स्थित केंद्रीय कारागार एवं सुधार गृह में बंद हैं।
हाल में गृह विभाग के एक पत्र का हवाला देते हुए निगम परिषद ने जेल में बंद पार्षद को छह महीने की छुट्टी देने का फैसला किया था जिससे राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आरोप लगाया कि इस फैसले के पीछे संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और भाजपा के बीच कोई गुप्त समझौता है।
गृह विभाग ने सुगाथन को छह अगस्त को भेजे गए पत्र में कहा कि उनकी छुट्टी के अनुरोध के जवाब में जारी किया गया उसका पिछला पत्र अब रद्द कर दिया गया है क्योंकि स्थानीय स्वशासन विभाग (एलएसजीडी) ने उस नोट को वापस ले लिया है जिस पर यह पत्र जारी किया गया था।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सरकार ने 13 जुलाई के एक पत्र के माध्यम से सुगाथन के सशर्त निगरानी पैरोल के आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके बाद एलएसजीडी से प्राप्त एक नोट के आधार पर 20 जुलाई को एक अन्य जवाब जारी किया गया था। हालांकि, बाद में एलएसजीडी ने गृह विभाग को सूचित किया कि वह नोट रद्द किया जा चुका है।
पत्र में कहा गया, ''इन परिस्थितियों में मामले की विस्तृत जांच की गई और 20 जुलाई, 2026 को जारी जवाब को रद्द कर दिया गया। निगरानी में पैरोल के आवेदन को खारिज करने वाला पहले का पत्र प्रभावी रहेगा।''
यह फैसला राज्य सरकार द्वारा स्थानीय स्वशासन विभाग की अवर सचिव डॉ. चित्रा पी. अरुणिमा को निलंबित किए जाने के कुछ दिनों बाद आया है। केरल प्रशासनिक सेवा (केएएस) की अधिकारी चित्रा को सुगाथन को लाभ देने से जुड़े मामले की फाइल प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच लंबित रहने तक निलंबित किया गया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब तिरुवनंतपुरम निगम परिषद ने सुगाथन के छह महीने की छुट्टी के आवेदन को मंजूरी दे दी ताकि उनकी पार्षद की सदस्यता बनी रहे।
महापौर ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि यह गृह विभाग के उस पत्र के आधार पर लिया गया था, जिसमें संकेत दिया गया था कि यदि परिषद छुट्टी मंजूर करती है तो सुगाथन पार्षद बने रह सकते हैं।
इस मामले से राजनीतिक विवाद पैदा हुआ जिसके बाद स्थानीय स्वशासन मंत्री के. एम. शाजी ने कहा था कि सरकार यह जांच कर रही है कि यह पत्र किन परिस्थितियों में जारी किया गया।
मंत्री ने कहा था कि निवारक हिरासत में रखे गए व्यक्ति को इस तरह का लाभ देना गंभीर मामला है और विभाग ने ऐसी राहत देने के खिलाफ सिफारिश की थी।
भाषा सुरभि पवनेश
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