न्यायालय ने अपहरण मामले में भवानी रेवन्ना को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने से इनकार किया
गोला शोभना
- 10 Jul 2024, 04:57 PM
- Updated: 04:57 PM
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने जनता दल (सेक्यूलर) के निलंबित नेता और दुष्कर्म के आरोपी प्रज्वल रेवन्ना की मां भवानी रेवन्ना को अपहरण के एक मामले में दी अग्रिम जमानत रद्द करने से बुधवार को इनकार कर दिया।
यह उनके बेटे के कथित यौन शोषण की पीड़िताओं में से एक के अपहरण का मामला है।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली कर्नाटक सरकार की अपील पर भवानी रेवन्ना को नोटिस जारी किया।
पीठ ने कर्नाटक सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा, ‘‘आरोपी एक महिला है जिसकी उम्र 55 वर्ष है। उनके बेटे पर घिनौने कामों में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं। वह भाग गया था और आखिरकार उसे पकड़ लिया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के आरोपों के मामले में अपने बेटे द्वारा किए अपराधों को बढ़ावा देने में मां की क्या भूमिका होगी?’’
सिब्बल ने कहा कि भवानी रेवन्ना को दी गयी राहत ‘‘बेहद दुखद’’ है और परिवार के इशारे पर ही पीड़िता को बंधक बनाकर रखा गया था।
इस पर पीठ ने कहा, ‘‘ऐसा कुछ नहीं है...इस मामले का राजनीतिकरण न करें।’’
उच्च न्यायालय ने 18 जून को भवानी रेवन्ना को अग्रिम जमानत देते हुए कहा था कि उन्होंने पूछताछ के दौरान 85 सवालों के जवाब दिए हैं जिससे यह दावा करना उचित नहीं है कि वह एसआईटी के साथ सहयोग नहीं कर रही हैं। एसआईटी उनके बेटे के खिलाफ यौन शोषण के मामलों की जांच कर रही है।
एसआईटी ने मैसुरू जिले के के.आर. नगर में एक घरेलू सहायिका के अपहरण के सिलसिले में पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं होने के बाद भवानी की हिरासत का अनुरोध किया था।
उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने का अनुरोध करने वाली भवानी रेवन्ना की याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि इस मामले में ‘मीडिया ट्रायल’ से बचा जाना चाहिए। उसने कहा था कि महिलाओं की अनावश्यक गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए क्योंकि वे परिवारों में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
अदालत ने यह भी कहा था कि असहयोग के आरोप अविश्वसनीय थे क्योंकि भवानी ने पूछताछ के दौरान पहले ही विस्तृत जवाब दे दिए थे। न्यायालय ने एसआईटी की इस दलील को खारिज कर दिया कि उन्होंने भ्रामक जवाब दिए थे।
अदालत ने सात जून को भवानी रेवन्ना को अग्रिम जमानत देते हुए उन पर मैसुरु और हासन जिलों में प्रवेश करने से रोक लगाने की शर्तें लगायी थीं तथा बाद में जमानत अवधि 14 जून तक बढ़ा दी थी।
उच्च न्यायालय ने जांच के लिए उन्हें हासन तथा मैसुरु जिलों में ले जाने की एसआईटी को अनुमति दी थी।
भवानी रेवन्ना पर पीड़िता को शिकायत दर्ज कराने से रोकने का प्रयास करने का आरोप है। भवानी के बेटे ने घरेलू सहायिका का कथित तौर पर यौन शोषण किया था।
प्रज्वल रेवन्ना कई महिलाओं का कथित तौर पर यौन शोषण करने तथा अपराध का वीडियो बनाने के लिए अभी एसआईटी की हिरासत में है।
यौन शोषण के मामले तब सामने आए जब 26 अप्रैल को लोकसभा चुनाव से पहले हासन में कथित तौर पर प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो वाले पेन-ड्राइव लोगों को दिए गए।
भाषा गोला