मुडा ‘घोटाला’ : भाजपा मुख्यमंत्री के गृह जिले में 12 जुलाई को करेगी ‘विशाल’ विरोध प्रदर्शन
धीरज नरेश
- 10 Jul 2024, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
बेंगलुरु, 10 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) द्वारा जिन किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है उन्हें भूखंड आवंटित करने में कथित फर्जीवाड़ा करने के खिलाफ 12 जुलाई को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के गृह जिले मैसुरु में ‘विशाल’ विरोध प्रदर्शन करेगी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वी.वाई.विजयेंद्र ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती को भी भूखंड आवंटित किया गया है और उनसे इस मुद्दे पर इस्तीफा देने की मांग की।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदर्शनकारी अवैध तरीके से किए गए आवंटन को रद्द करने और उक्त जमीन गरीबों को आवंटित करने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी इस ‘घोटाले’की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग कर रही है क्योंकि आरोप स्वयं मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर लगा है।
विजयेंद्र ने घोषणा की कि भाजपा आगामी विधान मंडल सत्र में भी यह मुद्दा उठाएगी।
पार्टी ने आरोप लगाया कि किसानों को मैसुरु के संभ्रांत इलाके में मुआवजे के तौर पर दी जाने वाली जमीन सिद्धरमैया की पत्नी को आवंटित की गयी जिसकी कीमत मुडा द्वारा ‘अधिग्रहित’उनकी जमीन से अधिक है।
मुडा ने पार्वती की अधिग्रहित 3.16 करोड़ रुपये की जमीन के एवज में 50:50के अनुपात में जमीन आवंटित की और उक्त जमीन पर उसने आवासीय इमारते बनाने की योजना बनाई है।
मुडा के कथित ‘घोटाले’के बारे में विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जनता को गलत जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री का असली चेहरा सभी के सामने आ गया है। इस भूमि घोटाले के प्रत्येक चरण में अनियमितताएं की गई हैं।’’
विजयेंद्र ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री को जनता को जवाब देना चाहिए और घोटाले की जिम्मेदारी लेनी चाहिए...मुख्यमंत्री ने गरीब महिलाओं को 2000 रुपये महीना देने का वादा किया था और उन्होंने अपनी पत्नी को दो-दो करोड़ मूल्य के 14 भूखंड दिए हैं जिनकी कीमत 63-64 करोड़ रुपये है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश में अगर कोई मुख्यमंत्री है जिसने अपने कार्यकाल में अनियमितताएं की और अपनी ही सरकार से मुआवजा मांगा तो वह सिद्धरमैया हैं।’’
विजयेंद्र ने रेखांकित किया कि मुडा ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1991 का हवाला देते हुए पार्वती को 14 भूखंड आवंटित किये। उन्होंने कहा लेकिन अधिनियम के तहत अगर तीन से चार एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जाती है तो अधिग्रहीत जमीन के बदले 40 गुना 60 फुट के केवल दो भूखंड दिए जाने चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘इसलिए, मुख्यमंत्री की पत्नी को 40 गुना 60 फीट के दो भूखंड ही दिए जाने चाहिए जबकि उन्हें 14 भूखंड दिए गए जो नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन है।’’
विजयेंद्र ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ‘भ्रामक’ सूचना फैला रहे हैं कि उनकी पत्नी को केवल 18 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन मिली जबकि वह 62 करोड़ रूपये मूल्य के भूखंड की हकदार हैं।
उन्होंने दावा किया कि मुडा द्वारा मुख्यमंत्री की पत्नी को जो 14 भूखंड आवंटित किए गए हैं उनकी कीमत तीन हजार रुपये प्रति वर्ग फुट बताई जा रही है जबकि बाजार मूल्य नौ हजार रुपये प्रति वर्ग फीट है।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि 2013 के चुनावी हलफनामे में सिद्धरमैया ने यह नहीं बताया कि यह तीन एकड़ जमीन उनकी पत्नी के नाम पर है जो आदर्श आचार संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, ‘‘ हम इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से करने को लेकर चर्चा कर रहे हैं।’’
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यह घोटाला जब सामने आया तो शहरी विकास मंत्री बी.एस.सुरेश आनन-फानन में सिद्धरमैया के गृह जिला गये और जल्दबाजी में मुडा की बैठक बुलाकर अधिकारियों को दंडित करने के बजाय उनका स्थानांतरण कर दिया।
उन्होंने दावा किया, ‘‘पचास हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन प्रभावशाली लोगों को आवंटित की गई है। मंत्री इस घोटाले में संलिप्त अधिकारियों को बचाने में जुटे हैं।’’
उन्होंने कहा कि मुडा घोटाले की जांच कर सरकार को रिपोर्ट देने वाले मैसुरु के उपायुक्त का तबादला कर दिया गया है।
भाजपा नेता ने दावा किया कि मंत्री ने पूरे घोटाले पर लीपापोती करने की कोशिश की और स्वयं मैसुरु के मुडा कार्यालय से संबंधित फाइलें उठाकर बेंगलुरु लेकर आए।
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