बिहार सरकार 16 मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का पीपीपी मॉडल पर संचालन करेगी
पारुल
- 05 Aug 2026, 09:31 PM
- Updated: 09:31 PM
पटना, पांच अगस्त (भाषा) बिहार सरकार ने राज्य के 16 ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों (डेंटल कॉलेज सहित) का संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
मंत्रिमंडल बैठक के बाद जारी बयान के अनुसार, सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से मेडिकल कॉलेज में शिक्षा, प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
बैठक में कुल 17 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
मंत्रिमंडल ने परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्राइस वाटरहाउस कूपर्स प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांजेक्शन एडवाइजर (परामर्शी) नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके लिए कंपनी को 8.27 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाएगा। कंपनी का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है।
पीपीपी मॉडल के तहत संचालित किए जाने वाले संस्थानों में पावापुरी, मधेपुरा, पूर्णिया तथा नालंदा जिले के रहुई स्थित डेंटल कॉलेज शामिल हैं। इसके अलावा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, भोजपुर, बक्सर, सिवान, बेगूसराय, जमुई, मुंगेर और सुपौल के निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों का संचालन भी पीपीपी मॉडल पर करने की योजना है।
सरकार के मुताबिक, ब्राउनफील्ड परियोजना से आशय ऐसी परियोजनाओं से है, जिनमें भवन, भूमि और बुनियादी ढांचा पहले से उपलब्ध हो या उनका निर्माण कार्य जारी हो। इस मॉडल में पूरी तरह नयी परियोजना विकसित करने के बजाय पहले से स्थापित अथवा निर्माणाधीन संस्थानों को विकसित कर अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जाता है।
सरकार ने कहा कि नयी व्यवस्था के तहत संस्थान की परिसंपत्तियों का स्वामित्व और नियामकीय नियंत्रण सरकार के पास रहेगा, जबकि निजी भागीदार संचालन, प्रबंधन और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की जिम्मेदारी निभाएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'एक्स' पर लिखा कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल से राज्य में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत होंगी तथा आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी।
मंत्रिमंडल ने न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 19 अतिरिक्त विशेष अदालतों की स्थापना को भी मंजूरी दी।
ये विशेष अदालतें पश्चिम चंपारण, मधुबनी, भोजपुर, सीवान, अररिया, सुपौल, खगड़िया, जहानाबाद, बक्सर, जमुई, कैमूर, कटिहार, सीतामढ़ी, मुंगेर, मधेपुरा, बांका, शेखपुरा, औरंगाबाद और लखीसराय में स्थापित की जाएंगी।
मंत्रिमंडल ने जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालयों में अराजपत्रित श्रेणी के कुल 171 पदों के सृजन को भी मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय त्वरित न्याय, पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा तथा संवेदनशील एवं जवाबदेह न्यायिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बैठक में केंद्र प्रायोजित 'अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन' (अमृत 2.0) के तहत जमालपुर जलापूर्ति योजना के लिए 102.22 करोड़ रुपये और मुंगेर जलापूर्ति योजना के लिए 177.72 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी गई।
मंत्रिमंडल ने राज्य खेल अकादमी के राजगीर परिसर में खेल विज्ञान केंद्र की स्थापना, संचालन, रखरखाव, मानव संसाधन और अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था को भी मंजूरी दी।
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कैलाश पारुल
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