भारतीय डेटा सेंटर का उपयोग करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए अनुपालन सुगम बनाने का प्रस्ताव
अजय
- 04 Aug 2026, 10:09 PM
- Updated: 10:09 PM
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) सरकार ने मंगलवार को भारत से डेटा सेंटर सेवाएं लेने वाली विदेशी कंपनियों के लिए अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को आसान बनाने के उद्देश्य से संरचनात्मक बदलावों का प्रस्ताव किया। इसके तहत अधिसूचना की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव है। इस पहल का मकसद कारोबार सुगमता को बढ़ावा देना है।
लोकसभा में पेश किए गए कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 में उन विदेशी कंपनियों के लिए रिपोर्टिंग यानी सूचना उपलब्ध कराने संबंधी आवश्यकताओं को कम करने का प्रस्ताव किया गया है, जो वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित कर अवकाश का लाभ लेना चाहती हैं। इससे वास्तविक डेटा सेंटर कारोबार शुरू करने और उनका संचालन आसान होगा।
सरकार ने 2026-27 के बजट में भारत में डेटा सेंटर सेवाएं लेने वाली किसी भी विदेशी कंपनी को वर्ष 2047 तक 20 वर्षों का कर अवकाश देने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य विदेशी कंपनियों की इस आशंका को दूर करना था कि उनकी वैश्विक आय पर भारतीय कर अधिकारी कर लगा सकते हैं।
बजट में कहा गया था कि चाहे कोई वैश्विक कंपनी भारत में अपना डेटा सेंटर स्थापित करे या किसी भारतीय डेटा सेंटर से सेवाएं खरीदे, दोनों ही मामलों में कर व्यवस्था समान होगी। इससे सभी कंपनियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।
सरकार ने कारोबार सुगमता के उपाय के तहत कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिये आयकर छूट का दावा करने के लिए विदेशी कंपनी को केंद्र सरकार से अलग से अधिसूचित कराने की आवश्यकता समाप्त करने का प्रस्ताव किया है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) द्वारा निर्दिष्ट डेटा सेंटर को अधिसूचित करने की शर्त भी हटाने का प्रस्ताव किया गया है।
वित्त मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा, ''विदेशी क्लाउड कंपनी और भारतीय डेटा सेंटर, दोनों के लिए अलग-अलग सरकारी अधिसूचना की आवश्यकता समाप्त कर तथा पट्टे के आधार पर संचालन मॉडल की अनुमति देकर इस प्रक्रिया से कई मंजूरी संबंधी चरण पूरी तरह हटा दिए गए हैं।''
आयकर विभाग ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) में कहा कि क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों और डेटा सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली भारतीय कंपनियों को नियमों के तहत निर्धारित प्रारूप और तरीके से आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
एफएक्यू में कहा गया, ''डेटा सेंटर सुधार को लागू करने के लिए यह शर्त पर्याप्त मानी गई है। इसलिए कारोबार सुगमता के उद्देश्य से विदेशी कंपनी और भारतीय डेटा सेंटर कंपनी, दोनों के लिए अधिसूचना संबंधी शर्तें हटाने का प्रस्ताव किया गया है।''
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई निर्दिष्ट डेटा सेंटर किसी भारतीय कंपनी द्वारा संचालित किया जाता है, तो उसके लिए पट्टा मॉडल के तहत स्वामित्व की भी अनुमति होगी।
भारतीय डेटा सेंटर के लिए पट्टा मॉडल की अनुमति के प्रभाव के बारे में एफएक्यू में कहा गया कि विभिन्न पक्षों ने सरकार को बताया था कि 'निर्दिष्ट डेटा सेंटर' का भारतीय कंपनी के स्वामित्व और संचालन में होना कुछ मामलों में प्रतिबंधात्मक हो सकता है, क्योंकि भारतीय कंपनी पट्टे पर लिए गए डेटा सेंटर का भी संचालन कर सकती है।
इसलिए प्रावधानों में संशोधन कर पट्टा मॉडल के तहत संचालन की भी अनुमति दी गई है।
कुल मिलाकर, प्रस्तावित विधेयक इन मंजूरी संबंधी आवश्यकताओं को समाप्त करता है और महत्वपूर्ण रूप से भारतीय डेटा सेंटर को केवल प्रत्यक्ष स्वामित्व के बजाय पट्टे के आधार पर भी संचालित करने की अनुमति देता है।
सूत्रों ने कहा, ''इसका परिणाम यह होगा कि वैश्विक क्लाउड कंपनियों को सेवाएं देने वाले भारतीय डेटा सेंटर का परिवेश कहीं अधिक बड़ा और मजबूत बनेगा। इस सुधार से भारत को बड़े 'एआई डेटा सिटी' विकसित करने और उनमें उल्लेखनीय निवेश आकर्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।''
भाषा रमण अजय
अजय
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