इस साल पीओपी की गणेश मूर्तियों पर रोक संभव नहीं, धीरे-धीरे चलन से बाहर करेंगे: महाराष्ट्र सरकार
देवेंद्र
- 04 Aug 2026, 08:57 PM
- Updated: 08:57 PM
मुंबई, चार अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय में कहा कि इस साल गणेश चतुर्थी उत्सव के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी मूर्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगाना संभव नहीं होगा, लेकिन ऐसी मूर्तियों को धीरे-धीरे चलन से बाहर किया जाएगा।
राज्य के शीर्ष विधि अधिकारी ने पीठ को बताया कि सरकार मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं के इस्तेमाल की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील का पालन करेगी, लेकिन 14 सितंबर से शुरू होने वाले इस साल के उत्सव में इसे लागू करना मुश्किल होगा।
इस दलील के बाद न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने पूछा कि क्या राज्य सरकार ने अपना रुख प्रधानमंत्री मोदी को बताया है, जिन्होंने पिछले सप्ताह अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में श्रद्धालुओं से पीओपी की जगह मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं का उपयोग करने का आग्रह किया था।
दस दिवसीय गणेश उत्सव के दौरान पीओपी से बनी मूर्तियों के विसर्जन से प्राकृतिक जलाशयों को होने वाले प्रदूषण को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही अदालत ने पिछले सप्ताह सरकार से मोदी की मिट्टी की मूर्तियों के इस्तेमाल संबंधी अपील पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था।
महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने मंगलवार को उच्च न्यायालय को बताया कि सरकार प्रधानमंत्री की अपील का गंभीरता से पालन करेगी, लेकिन इस साल उसने अदालत से 2025 में पारित अपने आदेश को जारी रखने का आग्रह किया है, जिसके तहत छह फुट से अधिक ऊंचाई वाली पीओपी मूर्तियों के समुद्र में विसर्जन की अनुमति दी गई थी।
साठे ने आश्वासन दिया कि सरकार एक योजनाबद्ध तरीके से पीओपी मूर्तियों के इस्तेमाल को धीरे-धीरे चलन से बाहर करेगी।
इसके बाद पीठ ने कहा कि सरकार का रुख प्रधानमंत्री की अपील के विपरीत है और पूछा कि क्या सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उच्च न्यायालय ने सवाल किया, "क्या सरकार ने प्रधानमंत्री को अपने इस रुख से अवगत कराया है?"
अदालत ने कहा कि वह सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश पारित करेगी।
याचिकाओं में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा 2020 में जारी दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करने का अनुरोध किया गया है, जिनके अनुसार पीओपी मूर्तियों का प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जन नहीं किया जाना चाहिए।
पिछले साल सीपीसीबी द्वारा यह कहे जाने के बाद कि उसके दिशा-निर्देश सलाहकारी प्रकृति के हैं, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की 2025 की विसर्जन नीति के अनुसार छह फुट से अधिक ऊंचाई वाली पीओपी मूर्तियों को प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जित करने की अनुमति दी थी।
सरकार ने इस साल भी इसी तरह का आदेश जारी करने का अनुरोध किया है।
कुछ पीओपी मूर्ति निर्माताओं ने भी याचिकाएं दायर करके दावा किया है कि पीओपी मूर्तियों पर प्रतिबंध लगने से उनके कारोबार करने के मौलिक अधिकार प्रभावित होंगे।
भाषा अमित देवेंद्र
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