इलाहाबाद उच्च न्यायालय पुलिसकर्मी के कथित व्यवसाय में शामिल होने पर सख्त, डीजीपी को जांच के निर्देश
जितेंद्र
- 01 Aug 2026, 10:58 PM
- Updated: 10:58 PM
प्रयागराज, एक अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक पुलिसकर्मी के कथित तौर पर व्यवसाय में शामिल रहने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि थाने वाणिज्यिक गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं और पुलिसकर्मी प्रदेश में कानून व्यवस्था संभालने के बजाय लगातार व्यावसायिक गतिविधियों में लगे हुए हैं। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को बलिया जिले के एक थाने में तैनात कांस्टेबल के कथित परिवहन व्यवसाय की जांच करने का निर्देश दिया।
अदालत ने डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को बलिया जिले के रसड़ा थाने के सभी पुलिस अधिकारियों और संबंधित कांस्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया।
अदालत ने साथ ही डीजीपी को इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी 10 दिन के भीतर अदालत को देने को कहा।
अदालत ने यह टिप्पणी याचिकाकर्ता हरेंद्र यादव के ट्रक को बलिया के सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) द्वारा काली सूची में डाले जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संतोष कुमार (रसड़ा पुलिस थाने में तैनात कांस्टेबल) के बीच ट्रक के स्वामित्व को लेकर विवाद के संबंध में एक उप निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर एआरटीओ ने वाहन को काली सूची में डाला था।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कांस्टेबल से बातचीत की और पुलिसकर्मी ने बताया कि उसने अपने जीपीएफ खाते से पैसा निकालकर याचिकाकर्ता के साथ अपने भाई के नाम पर व्यवसाय शुरू किया था।
ट्रक की खरीद और उसका संचालन याचिकाकर्ता द्वारा किया गया था।
अदालत ने पाया कि एआरटीओ ने वाहन को काली सूची में डालने का फैसला केवल उपनिरीक्षक शिवमूर्ति तिवारी की ओर से दाखिल रिपोर्ट के आधार पर लिया था।
अदालत ने यह भी पाया कि बलिया के पुलिस अधीक्षक ने अपने हलफनामे में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया कि थाने में तैनात रहते हुए परिवहन व्यवसाय करने को लेकर कांस्टेबल के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।
अदालत ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा, "यह अदालत हैरान है कि पुलिस थाना वाणिज्यिक गतिविधियों का स्थान बन गया है और पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था देखने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों में संलिप्त हैं।"
अदालत ने 27 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि रसड़ा थाना प्रभारी और बलिया के पुलिस अधीक्षक ने एआरटीओ के समक्ष कांस्टेबल के पक्ष में रिपोर्ट लगाकर उसका बचाव किया तथा इससे प्रतीत होता है कि पूरा थाना ही व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख तय की है। भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
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