मुझे राजस्थान के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बताते हुए नारे न लगाएं कांग्रेस कार्यकर्ता: अशोक गहलोत
राजकुमार
- 01 Aug 2026, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
जोधपुर, एक अगस्त (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे ''लक्ष्मण रेखा'' पार न करें और उन्हें पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करते हुए नारेबाजी करने से बचें।
उन्होंने कहा कि इस बारे में फैसला लेने का अधिकार केवल कांग्रेस आलाकमान के पास है।
गहलोत ने यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी समाज और गरीबों के प्रति अपनी जिम्मेदारी तभी प्रभावी ढंग से निभा सकती है, जब उसके नेता एकजुट रहें।
गहलोत के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के दौरान कार्यकर्ताओं ने "अशोक गहलोत चौथी बार मुख्यमंत्री बनें" के नारे लगाए। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने उन्हें रोकते हुए कहा कि इसके बजाय पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करें।
उन्होंने कहा, "हमें कांग्रेस के लिए काम करना है। 'अशोक गहलोत चौथी बार' के नारे मत लगाइए। जब मैं पहली बार मुख्यमंत्री बना था, तब भी ऐसे कोई नारे नहीं लगाए गए थे। मैंने गांव-गांव जाकर लोगों के लिए काम किया था।"
गहलोत के बयान को राजनीतिक हलकों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के हालिया बयान के संदर्भ में देखा जा रहा है। डोटासरा ने 30 जुलाई को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में ऐसा बयान दिया था, जिसके बाद पार्टी के नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय बृहस्पतिवार को कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय जाने से पहले बांसवाड़ा से करीब 300 बीएपी कार्यकर्ताओं को लेकर गहलोत के आवास पर पहुंचे थे। डोटासरा ने इसपर आपत्ति जताई थी।
अपनी राजनीतिक यात्रा को याद करते हुए गहलोत ने कहा कि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, जबकि उन्होंने खुद यह पद नहीं मांगा था। उन्होंने कहा, "सोनिया गांधी ने मेरे मांगे बिना ही मुझे मुख्यमंत्री बनाया। उस समय भी दूसरे, तीसरे या चौथे कार्यकाल के लिए कोई नारे नहीं लगाए गए थे। हमें ऐसे नारे क्यों लगाने चाहिए? इससे हमारे नेताओं के बीच बेवजह असहजता पैदा होती है।"
भाषा जोहेब राजकुमार
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