परिसीमन विधेयक को संसद में पारित करने संबंधी केंद्र के प्रयास को नाकाम किया जाना चाहिए: राहुल गांधी
माधव
- 01 Aug 2026, 09:47 PM
- Updated: 09:47 PM
(फोटो के साथ)
चेन्नई, एक अगस्त (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शनिवार को यहां आरोप लगाया कि संसद में परिसीमन विधेयक पारित करने संबंधी केंद्र सरकार के प्रयास को हर राष्ट्रीय और तमिल पार्टी को नाकाम करना चाहिए और इस विधेयक का समर्थन करना जनता के साथ विश्वासघात होगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने यहां मामल्लापुरम के निकट पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि ''भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) परिसीमन कराने का प्रयास कर रही है, जिसे तमिल लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करने और उनकी राजनीतिक ताकत छीनने के उद्देश्य से बनाया गया है।''
उन्होंने दावा किया, ''तमिल लोगों की राजनीतिक ताकत छीनने का ऐसा प्रयास भाजपा की एक 'साजिश' है।''
गांधी यहां पार्टी के पुनर्गठन योजना के तहत नियुक्त और प्रशिक्षित किए गए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों के साथ पार्टी के एक सत्र में भाग लेने आए थे।
उन्होंने कहा, ''हर एक तमिल पार्टी और राष्ट्रीय पार्टी को संसद में परिसीमन (विधेयक) को नाकाम करना चाहिए।''
गांधी ने आरोप लगाया कि जो कोई भी परिसीमन का समर्थन करता है, वह तमिलनाडु और राज्य के भविष्य के साथ विश्वासघात करता है तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)-भाजपा को राज्य के लोगों पर हमला करने का मौका देता है।
उन्होंने दावा किया कि कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति, जो परिसीमन विधेयक पारित कराने के भाजपा के प्रयास में उसका समर्थन कर रहा है, वह तमिलनाडु की जनता के साथ विश्वासघात कर रहा है और इतिहास उन्हें '21वीं सदी के एट्टप्पन' के रूप में याद रखेगा।
उन्होंने कहा कि 18वीं सदी के तमिल शासक 'एट्टप्पन' का नाम विश्वासघात का पर्याय बन गया था, क्योंकि कहा जाता है कि उन्होंने ब्रिटिशों द्वारा प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी वीरपांडिया कट्टाबोम्मन को पकड़वाने और हत्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि गांधी ने एसएसए नामक योजना के तहत जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) अध्यक्षों के लिए आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में पदाधिकारियों को संबोधित किया।
गांधी ने गुटबाजी की निंदा की और कहा कि यह विकास में बाधक है। उन्होंने पार्टी के भीतर एकता का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि जो पदाधिकारी सभी लोगों को साथ लेकर नहीं चलते और जमीनी स्तर पर काम पर ध्यान देते हुए पार्टी के विकास के लिए कड़ी मेहनत नहीं करते, उनके लिए संगठन में कोई जगह नहीं है।
इससे पूर्व गांधी ने तमिलनाडु में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी के दौरान आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों से मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को एक ऐसी व्यवस्था में ईमानदारी से काम करने के लिए कहा जाता है, जो खुद उनके प्रति ईमानदार नहीं है।
गांधी ने मामल्लापुरम में 'नीट' के कारण आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिजनों से कहा, ''माता-पिता को अपने बच्चे के लिए शोक मनाते देखने से ज्यादा दर्दनाक कुछ नहीं है।''
उन्होंने कहा, ''अपनी जान गंवाने वाले हर युवा के पीछे एक ऐसा परिवार है, जो ऐसा दर्द झेल रहा है, जो कभी उनका साथ नहीं छोड़ेगा और साथ ही एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। प्रश्नपत्र लीक होना। परीक्षाएं रद्द होना। सालों की तैयारी रातों-रात बर्बाद हो जाना। हमारे विद्यार्थियों को एक ऐसी व्यवस्था में ईमानदारी से काम करने के लिए कहा जाता है, जो खुद उनके प्रति ईमानदार नहीं है।'''
गांधी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को खो दिया है, उनके आंसू और उनका विलाप-इससे बड़ा कोई दुख नहीं हो सकता। यह दुख उनके साथ जीवनभर रहेगा-और इसके साथ ही इस टूटी हुई और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी बने रहेंगे।''
प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाएं रद्द होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में छात्रों को माफ करने की बात करने का दुस्साहस है।''
गांधी ने कहा, ''क्या उन्होंने (मोदी) कभी किसी ऐसे दुखी परिवार से मुलाकात की है, जिसने अपने बच्चे को खो दिया है? या उन लोगों से मिले हैं, जिनकी पूरी जमा-पूंजी, जीवन का समय और सपने प्रश्न लीक के कारण छीन लिए गए हैं? जवाब है-नहीं! भारत के विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री द्वारा माफ किए जाने की जरूरत नहीं है। मोदी जी को उनसे माफी मांगनी चाहिए।''
इसके बाद गांधी मामल्लपुरम में पार्टी से जुड़े अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद चेन्नई से दिल्ली के लिए रवाना हुए।
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव
0108 2147 चेन्नई