ईपीएफओ को 1,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान: रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, अनिल अंबानी पर मामला दर्ज
देवेंद्र
- 01 Aug 2026, 09:07 PM
- Updated: 09:07 PM
नयी दिल्ली, एक अगस्त (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को 1,816.22 करोड़ रुपये का कथित नुकसान पहुंचाने के मामले में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएल) और उसके पूर्व चेयरमैन अनिल डी. अंबानी के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
हालांकि, अंबानी के प्रवक्ता के अनुसार अनिल अंबानी ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की 21 जुलाई की शिकायत के बाद की गई, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को गलत तरीके से वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है, ''यह शिकायत ईपीएफओ की ओर से उसके अधिकृत अधिकारी द्वारा सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद दर्ज कराई गई है। इसका संबंध रिलायंस कैपिटल लिमिटेड द्वारा जारी सुरक्षित गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) में ईपीएफओ के निवेश से हुए भारी वित्तीय नुकसान तथा बाद में सामने आई ऐसी सामग्री से है, जो इस निवेश से जुड़ी कथित धोखाधड़ी की ओर संकेत करती है।" शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए अंबानी के प्रवक्ता ने कहा, "सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी रिलायंस कैपिटल लिमिटेड से संबंधित है। अंबानी 2005 से नवंबर 2021 तक कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक और बोर्ड के चेयरमैन रहे। नवंबर 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक ने कंपनी के निदेशक मंडल को भंग करके एक प्रशासक नियुक्त किया था।"
उन्होंने कहा, "अनिल अंबानी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से पूरी तरह इनकार करते हैं और कानून के तहत उपलब्ध सभी अधिकार सुरक्षित रखते हैं।"
शिकायत, जो अब सीबीआई की प्राथमिकी का हिस्सा है और इसके अनुसार वर्ष 2013 और 2014 के दौरान रिलायंस कैपिटल ने सुरक्षित गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) जारी किए थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद, पोर्टफोलियो प्रबंधकों ने ईपीएफओ की ओर से इन एनसीडी में 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जिनकी परिपक्वता अवधि वर्ष 2023 और 2024 में थी।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने यह शिकायत तब भेजी जब उसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सूचित किया कि उसके पास ऐसे दस्तावेजी साक्ष्य हैं और बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा किए गए लेनदेन ऑडिट में 7 दिसंबर 2019 से 6 दिसंबर 2021 के बीच रिलायंस कैपिटल और उसके प्रबंधन से जुड़े लोगों द्वारा प्रथम दृष्टया कई कथित धोखाधड़ी वाले लेनदेन पाए गए हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ''इससे पहले की अवधि में भी कई कथित धोखाधड़ी वाले लेनदेन पाये गए, जिनके कारण कंपनी से धन की कथित हेराफेरी हुई और अंततः रिलायंस कैपिटल विफल हो गई।''
दावा किया गया कि ईडी की जांच से प्रथम दृष्टया ऐसे कई लेनदेन सामने आए हैं, जिनमें अनियमित ऋण वितरण, धन का कथित दुरुपयोग, गिरवी रखी गई प्रतिभूतियों (सुरक्षा) के मूल्य में कमी तथा रिलायंस कैपिटल द्वारा किए गए अन्य संदिग्ध कार्य शामिल हैं, जिनकी विस्तृत जांच की आवश्यकता है।
शिकायत में कहा गया है, ''यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो ऐसे आचरण ने रिलायंस कैपिटल की वित्तीय स्थिति बिगाड़ने, डिबेंचर धारकों के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने में उसकी विफलता और परिणामस्वरूप ईपीएफओ को 1,816.22 करोड़ रुपये का नुकसान होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो सकती है।"
भाषा अमित देवेंद्र
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