बंगाल में जनगणना के लिए स्व-गणना प्रक्रिया शुरू
पवनेश
- 01 Aug 2026, 08:07 PM
- Updated: 08:07 PM
कोलकाता, एक अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल में शनिवार को भारत की 16वीं जनगणना के लिए स्व-गणना प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह सर्वेक्षण असली लाभार्थियों के लिए एक स्थायी रिकॉर्ड तैयार करेगा। उन्होंने अवैध प्रवासियों और शरणार्थियों के बीच स्पष्ट अंतर भी बताया।
उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि जनगणना की प्रक्रिया और अवैध आप्रवासन अलग-अलग मुद्दे हैं।
मतदाता सूची में शामिल न किए गए लोगों और एसआईआर न्यायाधिकरण का सामना कर रहे लोगों की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी कल्याणकारी लाभ पाने के हकदार नहीं हैं और उन्हें वापस भेज दिया जाएगा क्योंकि "हम उन्हें खाना नहीं खिला पाएंगे"।
मुख्यमंत्री ने हालांकि कहा कि संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) के दायरे में आने वालों को घुसपैठिया नहीं, बल्कि शरणार्थी माना जाएगा।
आधिकारिक जनगणना वेबसाइट पर अपनी जानकारी भरकर दशक में एक बार होने वाले इस सर्वेक्षण के स्व-गणना चरण की शुरुआत करने के बाद अधिकारी ने कहा कि जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल पात्र लाभार्थियों तक सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए स्थायी रिकॉर्ड तैयार करने में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, "फरवरी में जानकारी मिलने के बाद, लोगों को सामाजिक सहायता के लिए बार-बार दस्तावेज जमा नहीं करने होंगे। उन्हें हर सामाजिक योजना, जाति प्रमाण-पत्र या लाभ के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। एक स्थायी रिकॉर्ड बनाया जाएगा। इससे आने वाले समय में राज्य को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।"
इस जनसंख्या सर्वेक्षण के पहले चरण के तहत पोर्टल एक अगस्त से 15 अगस्त तक खुला रहेगा और इस दौरान लोग आधिकारिक वेबसाइट पर अपना विवरण अपलोड कर सकते हैं।
इसके बाद 16 अगस्त से 14 सितंबर तक मकानों की सूची बनाने का कार्य किया जाएगा।
शुभेंदु ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और मतदाताओं की एएसडीडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट) सूची को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर बात करते हुए कहा कि सूची में शामिल कई लोगों ने इसे चुनौती नहीं दी है।
उन्होंने कहा, ''एसआईआर न्यायाधिकरण के समक्ष जाने का अवसर प्राप्त करने वाले 27 लाख लोगों में से केवल सात लाख ने आवेदन किया है। शेष लोगों ने अब तक कोई आवेदन या अपील प्रस्तुत नहीं की है।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पूरी होने से पहले यह तय करना संभव नहीं होगा कि जिन लोगों ने मतदाता के रूप में कोई दावा प्रस्तुत नहीं किया है, वे बाद में भारतीय नागरिक के रूप में मान्यता पाने का दावा करेंगे या नहीं।
अधिकारी ने कहा, "बांग्लादेश से बंगाल आए लोगों में दो तरह के लोग हैं। एक श्रेणी घुसपैठियों की है। वे बंगाल में नहीं रहेंगे। उनकी पहचान की जाएगी, पुष्टि की जाएगी और उन्हें वापस भेज दिया जाएगा। हम उन्हें खाना नहीं खिला पाएंगे।"
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दूसरे देशों से आए हिंदू, सिख, ईसाई और जैन घुसपैठिए नहीं, बल्कि सीएए के तहत शरणार्थी हैं।
केंद्र सरकार के एक सितंबर, 2025 की अधिसूचना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "जो लोग अपनी जान बचाने या धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए 31 दिसंबर, 2024 तक बांग्लादेश से बंगाल आए हैं, उन पर कोई मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। पुलिस उन्हें परेशान नहीं कर पाएगी।"
उन्होंने कहा, "अगर कोई देश का नागरिक नहीं है, तो उसे किसी भी सामाजिक योजना का फायदा नहीं मिलेगा। केंद्र और राज्य सरकारें भारतीय नागरिकों के लिए जिम्मेदार हैं। एक बार नागरिकों की सही सूची तैयार हो जाने पर, सरकार के लिए काम करना आसान हो जाएगा।"
स्व-गणना की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए लोगों का सहयोग मांगते हुए, अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा और उस पर जनगणना की प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा, "पिछली सरकार की (केंद्र के साथ सहयोग करने की) अनिच्छा के कारण हम देश के बाकी हिस्सों की तुलना में काफी पीछे रह गए थे। लेकिन सत्ता में आने के बाद हमने इसे (जनगणना को) सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी।"
इस अभ्यास को देश की पहली ''शत प्रतिशत डिजिटल'' जनगणना बताते हुए शुभेंदु ने पश्चिम बंगाल के लोगों से इस सर्वेक्षण में भाग लेने और अधिकारियों का सहयोग करने का आग्रह किया।
गोपनीयता संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना ''पूर्णतः गोपनीय'' है और इसे कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
ऑनलाइन स्वगणना फॉर्म में जवाब देने वालों को घर की जानकारी, परिवार के सदस्यों, शिक्षा, पेशे और रहने की जगह के विवरण जैसी जानकारी देनी होती है।
अधिकारी ने कहा, ''एकत्र किए गए डेटा का उपयोग केवल सांख्यिकी, नियोजन और विकास के लिए किया जाएगा। इस जनगणना में व्यक्तिगत जानकारी के किसी भी प्रकार के दुरुपयोग की कोई गुंजाइश नहीं है।''
उन्होंने कहा, ''मैं पश्चिम बंगाल के प्रत्येक व्यक्ति से आग्रह करता हूं कि वे संबंधित अधिकारियों का सहयोग करें और इस प्रक्रिया में भाग लें।''
राज्य में जनगणना के काम के लिए लगभग 3,400 पर्यवेक्षक और कुल 14,399 कर्मचारियों को लगाया गया है। जनगणना का जनसंख्या गिनती वाला चरण बाद में किया जाएगा और यह 28 फरवरी, 2027 तक चलेगा।
भाषा
प्रशांत पवनेश
पवनेश
0108 2007 कोलकाता