निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के लिए समर्पित हों युवा : डोभाल
नेत्रपाल
- 01 Aug 2026, 06:53 PM
- Updated: 06:53 PM
पुणे, एक अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने शनिवार को देश के युवाओं से राष्ट्रीय हित के लिए पूरी तरह समर्पित होने और निजी स्वार्थों से ऊपर उठने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत के सामने राष्ट्र निर्माण का जो ''अवसर का दौर'' है, उसका पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए।
डोभाल ने यहां लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार-2026 प्राप्त करने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवा यह मान सकते हैं कि स्वतंत्रता का अर्थ अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी करना है, लेकिन ऐसा नहीं है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तिलक स्मारक ट्रस्ट की ओर से स्थापित यह पुरस्कार डोभाल को प्रदान किया।
डोभाल ने कहा, ''आज के युवाओं को पूरी तरह समर्पित होकर यह संकल्प लेना चाहिए कि वे केवल राष्ट्रहित में काम करेंगे। उन्हें अपने छोटे-छोटे निजी हितों का त्याग करने के लिए तैयार रहना चाहिए और यदि ऐसे विचार मन में आएं भी तो उन्हें नजरअंदाज कर देना चाहिए।''
उन्होंने कहा कि भारत अपने इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है और देश को इस अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।
डोभाल ने कहा, ''हमारे देश के इतिहास में यह एक विशेष अवसर का समय है। हम इसे गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते। इस समय हमारी प्राथमिकता राष्ट्र निर्माण होनी चाहिए।''
देश के भविष्य पर विश्वास जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने कहा कि भारत अपने इस लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेगा और इतिहास का नया अध्याय लिखेगा। उन्होंने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि हम इस प्रयास में सफल होंगे और नया इतिहास रचेंगे।''
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे नेताओं का नेतृत्व मिलना देश का सौभाग्य है। उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक और दार्शनिक भी थे।
डोभाल ने कहा कि जब पुणे में प्लेग फैला और तिलक के 21 वर्षीय पुत्र का निधन हो गया, तब भी उन्होंने शहर नहीं छोड़ा और वहीं डटे रहे।
उन्होंने कहा, ''आज की युवा पीढ़ी शायद यह मानती है कि भारत हमेशा से ऐसा ही था। संभवत: युवा यह समझते हों कि स्वतंत्रता का अर्थ मनमर्जी करना है, जबकि स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं था। जिन लोगों ने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया... उनमें लोकमान्य तिलक भी थे। लोगों के मन में पीड़ा थी...वे अपनी बात कहना चाहते थे। तिलक ने उन्हें बोलने का साहस दिया और उनमें नई चेतना का संचार किया।''
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि आजकल लोग अपने अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि यदि इन अधिकारों का दुरुपयोग किया जाए तो उन लोगों को कितनी पीड़ा होगी, जिन्होंने इन्हें दिलाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
डोभाल ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने केवल ''स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा'' का नारा ही नहीं दिया, बल्कि वह चाहते थे कि देश का प्रत्येक नागरिक भी इसी भावना को अपने जीवन में अपनाए।
उन्होंने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का मानना था कि जब तक लोगों में राष्ट्रवाद की भावना नहीं जागेगी और वे व्यक्तिगत हितों से ऊपर नहीं उठेंगे, तब तक राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीय विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
डोभाल ने कहा, ''रणनीति को लेकर लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि क्या किया जाए। रणनीति बनाते समय कई रास्ते सामने आते हैं और भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। हम इसे 'वीईडी विश्लेषण' कहते हैं। वीईडी का अर्थ है— 'वाइटल' (अत्यावश्यक), 'एसेंशियल' (आवश्यक) और 'डिजायरेबल' (वांछनीय)।''
उन्होंने कहा, ''हम यह आकलन करते हैं कि क्या अत्यावश्यक है, क्या आवश्यक है और क्या वांछनीय है। यदि राष्ट्र की सेवा और देश को शक्तिशाली बनाना हमारे लिए अत्यावश्यक है, तो बाकी सभी बातें गौण हो जाती हैं। आवश्यक और वांछनीय बातों का भी महत्व है, लेकिन यदि वे राष्ट्रीय हित के आड़े आती हैं तो हम उस रास्ते पर नहीं जा सकते, क्योंकि वह राष्ट्र के लिए हानिकारक होगा।''
डोभाल ने कहा कि लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि पर सभी को एक नए और शक्तिशाली भारत के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''भारत अभी वहां नहीं पहुंचा है, जहां उसे होना चाहिए। हम यह मान लेते हैं कि स्वतंत्रता मिल गई है और हमारी सारी जिम्मेदारियां पूरी हो गई हैं, लेकिन भारत आज भी आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है।''
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा, ''हमारी प्रगति ऐसी नहीं है कि उससे सभी प्रसन्न हों। बल्कि भारत की प्रगति आज भी कई लोगों, कई देशों और कई तत्वों को खटकती है और हमें ऐसे तत्वों से मुकाबला करना होगा।''
डोभाल ने कहा कि शक्तिशाली भारत के निर्माण के लिए सभी प्रकार की शंकाओं को दूर करके केवल राष्ट्रहित में काम करना होगा।
उन्होंने कहा, ''यदि हम एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे तो अपने लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे। सौभाग्य से आज हमारे पास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के रूप में सशक्त नेतृत्व तथा अनुकूल वातावरण है और हम देश को अधिक शक्तिशाली बना सकते हैं।''
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्हें उनके साथ निकटता से काम करने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा, ''मैंने राष्ट्र हित की सेवा के प्रति उनका समर्पण, प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प करीब से देखा है। उनकी सोच स्पष्ट है और उन्हें कभी निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।''
डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के कार्यों से देश को अत्यधिक लाभ हुआ है और ''हम इस कार्य को आगे बढ़ाएंगे।''
उन्होंने कहा कि वह लोकमान्य तिलक के नाम पर दिए जाने वाले इस पुरस्कार को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं।
डोभाल (81) ने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशन में राजनयिक दायित्व भी संभाल चुके हैं।
वह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। डोभाल भारत-चीन सीमा वार्ता में भारत के विशेष प्रतिनिधि भी रहे हैं और डोकलाम गतिरोध के समाधान में महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभाने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
तिलक स्मारक ट्रस्ट के अनुसार, वर्ष 1983 में स्थापित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार सबसे पहले समाजवादी नेता एस. एम. जोशी को प्रदान किया गया था।
यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष एक अगस्त को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने राष्ट्र की प्रगति और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
भाषा अमित नेत्रपाल
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