मुख्यमंत्री सतीशन के खिलाफ सतर्कता जांच बंद करने का फैसला वापस लिया जाए: विजयन
पवनेश
- 01 Aug 2026, 05:13 PM
- Updated: 05:13 PM
तिरुवनंतपुरम, एक अगस्त (भाषा) नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने शनिवार को मांग की कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार 'पुनर्जनी' बाढ़ पुनर्वास परियोजना के सिलसिले में केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के खिलाफ सतर्कता जांच बंद करने के फैसले को तुरंत वापस ले।
उन्होंने आरोप लगाया कि गंभीर अनियमितताओं का पता चलने के बावजूद मामले को दबाया जा रहा है।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विजयन ने कहा कि मामला बंद करने का फैसला तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और उस पर फिर से विचार होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मामला मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के तय करने का नहीं है, बल्कि न्यायपालिका को ही इसकी आगे की प्रक्रिया तय करनी चाहिए।
उन्होंने उस आधार पर सवाल उठाए जिस पर मामला बंद किया गया था और पूछा कि क्या कार्यवाही खत्म करने से पहले शिकायतकर्ता को नोटिस भेजा गया था और क्या मंत्रिमंडल ने इस मामले पर कोई फैसला लिया था।
विजयन ने आरोप लगाया कि यूडीएफ ने 2018 में बाढ़ राहत कार्यों में हिस्सा नहीं लिया और न ही मुख्यमंत्री राहत कोष में कोई योगदान दिया; उन्होंने कहा कि यूडीएफ नेताओं ने इस कोष से जुड़े सरकारी आदेश को सार्वजनिक रूप से जला दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन परवूर विधायक और मौजूदा मुख्यमंत्री सतीशन ने सरकारी तंत्र के जरिए राहत कार्य करने के बजाय, अपने परवूर निर्वाचन क्षेत्र में बाढ़ पुनर्वास की अपनी पहल 'पुनर्जनी' शुरू की थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि मनाप्पड फाउंडेशन के अमीर अहमद ने सतीशन की लंदन यात्रा को प्रायोजित किया था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता ने दावा किया कि सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच से यह साबित हुआ है कि इस परियोजना के जरिए करोड़ों रुपये जुटाए गए और रकम इकट्ठा करने में पारदर्शिता का अभाव था।
उन्होंने आरोप लगाया कि सतीशन ने निधि इकट्ठा करने में सक्रिय रूप से दखल दिया था और फाउंडेशन द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन वाली एक परियोजना को विधायक की अपनी 'पुनर्जनी' पहल के तौर पर पेश किया गया था।
यह सवाल उठाते हुए कि सतीशन ने पारदर्शिता पर जोर क्यों नहीं दिया, विजयन ने आरोप लगाया कि बाढ़ के दौरान इकट्ठा की गयी रकम पर संदेह बना हुआ है।
उन्होंने दावा किया कि सतर्कता जांच में 'विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम' (एफसीआरए) के उल्लंघन का पता चला है और प्रथम दृष्टया कई अपराधों से जुड़ा मामला बनता है।
विजयन के अनुसार, सतर्कता विभाग ने 2025 में सिफारिश की थी कि मामले को किसी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया जाए। उन्होंने दावा किया कि उस समय की वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया क्योंकि वह "राजनीतिक बदले की भावना" से कोई कदम नहीं उठाना चाहती थी।
उन्होंने कहा कि इसके बजाय, सरकार ने सतर्कता रिपोर्ट मिलने के बाद और स्पष्टीकरण मांगने का फैसला किया।
विजयन ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने गृह विभाग के जरिए मामले को बंद करने का फैसला किया है, जो मुख्यमंत्री के अधीन काम करता है, और उन्होंने सरकार पर मामले को "खत्म" करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
भाषा प्रशांत पवनेश
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