कठुआ आतंकी हमला : उत्तराखंड में शहीदों के घर पसरा मातम
प्रशांत पवनेश
- 09 Jul 2024, 10:12 PM
- Updated: 10:12 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी टिहरी/पौड़ी (उत्तराखंड), नौ जुलाई (भाषा) राइफलमैन आदर्श नेगी ने रविवार को अपने पिता से फोन पर बात की थी। अगले दिन दलबीर सिंह नेगी को फिर से फोन आया, लेकिन इस बार उनका बेटा लाइन पर नहीं था, एक सूचना थी कि उनका बेटा जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकवादी हमले में शहीद हो गया है।
सोमवार शाम को आए इस फोन कॉल ने उत्तराखंड के टिहरी जिले के थाती डागर गांव में रहने वाले परिवार को सदमे में डाल दिया।
नेगी सोमवार को जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सेना के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए उत्तराखंड के पांच जवानों में से एक थे। यह एक महीने के भीतर जम्मू क्षेत्र में हुआ पांचवां आतंकवादी हमला था।
पौड़ी में राइफलमैन अनुज नेगी की मौत की खबर मिलते ही उनकी मां और पत्नी बेहोश हो गईं। हवलदार कमल सिंह के घर पर भी यही मंजर था। कमल सिंह अपने पीछे मां, पत्नी और आठ और चार साल की दो बेटियों को छोड़ गए हैं।
एक स्थानीय व्यक्ति ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि 32 वर्षीय सिंह ने अभी हाल ही में अपनी सेवा के 10 वर्ष पूरे किए थे। वह ढाई महीने पहले अपनी छोटी बेटी का स्कूल में दाखिला कराने के लिए पापड़ी नौदानू गांव स्थित अपने घर आए थे।
उनके पिता केसर सिंह का कुछ सालों पहले निधन हो गया था। एक किसान के बेटे आदर्श नेगी (25) तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। सेना के जरिए देश की सेवा करने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।
दलबीर सिंह नेगी ने बताया कि उनके बेटे ने पिपलीधार के राजकीय इंटर कॉलेज से 12वीं तक पढ़ाई की और फिर बीएससी करने के लिए गढ़वाल विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि गढ़वाल राइफल्स में भर्ती होने के लिए उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी।
दलबीर सिंह नेगी ने बहते आंसू रोकने की कोशिश करते हुए कहा, “मैंने उससे आखिरी बार सात जुलाई को फोन पर बात की थी। वह फरवरी में घर आया था और 26 मार्च को ड्यूटी पर लौट गया था।”
पौड़ी के डोबरिया गांव में अनुज नेगी के घर उनकी मां और पत्नी को सांत्वना देने के लिए मित्रों और रिश्तेदारों का तांता लगा रहा।
अपने माता-पिता के इकलौते बेटे अनुज नेगी (26) की पिछले साल दिसंबर में शादी हुई थी। पास के जामरी गांव के ग्राम प्रधान सुभाष चंद्र जखमोला ने बताया कि शादी के चार महीने बाद ही वह फिर से ड्यूटी पर लौट गया।
जखमोला ने बताया कि इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद अनुज नेगी करीब पांच साल पहले गढ़वाल राइफल्स में शामिल हो गए थे और उनकी मां ने गांव में मिठाइयां बांटी थीं।
उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक रितु खंडूड़ी ने जवानों की मौत पर दुख व्यक्त किया और कहा कि देश उनके परिवारों के साथ खड़ा है।
खंडूड़ी ने कहा कि वह एक सैनिक की बेटी हैं और शोकाकुल परिवारों का दर्द समझ सकती हैं। उन्होंने कहा, “सशस्त्र बल आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे।”
शहीदों के पार्थिव शरीर जब यहां जौलीग्रांट हवाईअड्डे पर पहुंचे तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और गणेश जोशी ने पांचों शहीदों के ताबूतों पर पुष्पचक्र अर्पित किए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बयान में कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुए कायराना आतंकवादी हमले में उत्तराखंड के पांच बहादुर जवान शहीद हो गए। यह समय हम सभी के लिए बेहद पीड़ादायक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे वीर जवानों ने उत्तराखंड की समृद्ध सैन्य परंपरा को कायम रखते हुए अपनी मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।’’
धामी ने कहा, ‘‘उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि मानवता के दुश्मन और इस कायरतापूर्ण हमले के दोषी आतंकवादियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्हें शरण देने वाले लोगों को भी इसके परिणाम भुगतने होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा राज्य उनके परिवारों के साथ खड़ा है।
भाषा प्रशांत