उप्र : मुख्तार अंसारी नेटवर्क से जुड़े हथियार लाइसेंसों में कथित अनियमितताओं पर पांच प्राथमिकी दर्ज
किशोर, जफर रवि कांत
- 29 Jul 2026, 12:39 AM
- Updated: 12:39 AM
लखनऊ/गाजीपुर, 28 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंगलवार को कहा कि गैंगस्टर से राजनेता बने दिवंगत मुख्तार अंसारी, उनके परिजनों, गिरोह के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों तथा हथियारों के सत्यापन अभियान में कथित तौर पर व्यापक अनियमितताएं सामने आने के बाद गाजीपुर में पांच प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, इनमें से एक प्राथमिकी गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी के खिलाफ दर्ज की गई है। इसके साथ ही कथित शस्त्र लाइसेंस अनियमितताओं से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।
बयान में कहा गया कि उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) से प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर राज्य स्तर पर जांच के आदेश दिए गए थे।
इसके तहत मुख्तार अंसारी के परिवार, आईएस-191 गिरोह के सदस्यों एवं सहयोगियों को जारी शस्त्र लाइसेंसों तथा उनके आधार पर खरीदे गए हथियारों का सत्यापन कराया गया।
पुलिस के अनुसार, वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण की निगरानी में चलाए गए सत्यापन अभियान में अंसारी परिवार के पांच सदस्य, आईएस-191 गिरोह के 11 सदस्य एवं सहयोगी तथा 27 अन्य व्यक्तियों को शामिल किया गया। इन पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने का आरोप है।
बयान के अनुसार, पुलिस ने 43 लाइसेंसधारकों से जुड़े 80 से अधिक हथियारों का भौतिक सत्यापन किया।
जांच में कथित तौर पर यह पाया गया कि हथियारों की खरीद-बिक्री से संबंधित मूल शस्त्र लाइसेंस फाइलें और अभिलेख गाजीपुर जिलाधिकारी कार्यालय से गायब हैं।
पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान कुछ लाइसेंसधारकों और शस्त्र शाखा के अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत के संकेत भी मिले हैं। आरोप है कि हथियारों की वास्तविक स्थिति और उनके कथित दुरुपयोग को छिपाने के लिए अभिलेख गायब किए गए।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि एक मामले में आवेदक का वास्तविक पता छिपाकर फर्जी पते के आधार पर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त किया गया।
इन निष्कर्षों के आधार पर गाजीपुर के कोतवाली और मोहम्मदाबाद थानों में भारतीय न्याय संहिता तथा शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत पांच प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
बयान के अनुसार, मामलों में मुख्तार अंसारी के भाई और सांसद अफजाल अंसारी का नाम कई शस्त्र लाइसेंसों तथा उनसे संबंधित मूल अभिलेखों के कथित रूप से गायब होने के मामले में शामिल किया गया है।
मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशा अंसारी का नाम भी लाइसेंस जारी करने और सत्यापन प्रक्रिया में कथित भूमिका को लेकर दर्ज किया गया है। बयान में अफशा अंसारी को फरार बताया गया है।
इसके अलावा पूर्व शस्त्र लिपिकों, राजस्व अधिकारियों और पुलिसकर्मियों सहित कई वर्तमान एवं सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों को भी नामजद किया गया है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, आरोपों में मूल अभिलेख गायब करना, सत्यापन के दौरान दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करना, फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस जारी करना, आपराधिक साजिश रचना तथा आवेदनों के कथित अवैध सत्यापन में सहयोग देना शामिल है।
पांचों मामलों की जांच के लिए गाजीपुर के अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी को शस्त्र शाखा से जुड़े वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस ने कहा कि शस्त्र लाइसेंसों और हथियारों का भौतिक सत्यापन अभी जारी है तथा जांच में यदि और अनियमितताएं सामने आती हैं तो आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक इरज राजा के अनुसार, अफजाल अंसारी के खिलाफ नवीनतम प्राथमिकी कोतवाली थाने में दर्ज की गई है। इसमें आरोप है कि उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के आलोंग जिले से प्राप्त शस्त्र लाइसेंस के आधार पर एक राइफल की खरीद, बिक्री और जमा करने की प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं, हथियार का कथित दुरुपयोग किया तथा एक शस्त्र लिपिक के साथ कथित साजिश कर मूल अभिलेख गायब कराए, जिससे हथियार के भौतिक सत्यापन में बाधा उत्पन्न हुई।
इस प्राथमिकी में पूर्व शस्त्र लिपिक गौरी शंकर लाल और सुग्रीव तिवारी को भी नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसार यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और धारा 419 (प्रतिरूपण द्वारा छल) के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम की धारा 21, 25 और 30 के तहत दर्ज किया गया है। इस मामले की विस्तृत जांच जारी है।
भाषा
किशोर, जफर रवि कांत
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