कठुआ हमला चिंताजनक, प्रशासन को और सतर्क रहना चाहिए : उमर अब्दुल्ला
पारुल नरेश
- 09 Jul 2024, 02:16 PM
- Updated: 02:16 PM
श्रीनगर, नौ जुलाई (भाषा) नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकवादी हमले में पांच जवानों की मौत चिंताजनक है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर प्रशासन पर क्षेत्र में सुरक्षा स्थित को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप भी लगाया।
सोमवार को कठुआ के बदनोटा इलाके में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने एक गश्ती दल पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें पांच जवान मारे गए थे और कई घायल हो गए थे। हमले में शामिल आतंकवादियों की धड़पकड़ के लिए क्षेत्र में व्यापक तलाश अभियान जारी है।
उमर ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुझे लगता है कि इस हमले की जितनी भी निंदा की जाए, उतनी कम है। भारतीय सेना के ड्यूटी कर रहे पांच बहादुर जवानों को एक हमले में खो देना चिंताजनक है।”
पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके उमर ने प्रशासन को अधिक सतर्क रहने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा, “हम बार-बार कहते आए हैं कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद एक समस्या है और आप बिना कुछ किए इसका अंत होने की उम्मीद नहीं कर सकते। इस सरकार ने मान लिया था कि पांच अगस्त 2019, हिंसा और आतंकवाद सहित सभी समस्याओं का समाधान है, लेकिन यह साफ है कि ऐसा नहीं हुआ।”
पांच अगस्त 2019 को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र-शासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांटने का फैसला लिया था।
उमर ने कहा, “मुझे लगता है कि जम्मू-कश्मीर में प्रशासन को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। मुझे लगता है कि वे सुरक्षा स्थिति को लेकर बेहद ढीला रवैया अपना रहे हैं। उम्मीद है कि इस तरह के हमले फिर नहीं होंगे।”
क्या आतंकवादी हमलों की संख्या में वृद्धि से, खासकर जम्मू क्षेत्र में, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के आयोजन पर असर पड़ेगा? इस सवाल के जवाब में उमर ने कहा, “विधानसभा चुनाव पर उच्चतम न्यायालय को फैसला लेना है और मुझे नहीं लगता कि सुरक्षा स्थिति इतनी खराब है कि चुनाव नहीं कराए जा सकते। हमारे यहां 1996 में चुनाव हुए थे, हमारे यहां 1998 और 1999 में संसदीय चुनाव हुए थे, मुझे लगता है कि उस समय तो हालात और भी खराब थे।”
उमर ने कहा, “इसलिए जब तक सरकार यह मानने के लिए तैयार नहीं हो जाती कि आज यहां स्थिति 1996 से भी बदतर है, मुझे लगता है कि चुनाव अवश्य होने चाहिए”
कुछ नेताओं की सुरक्षा वापस लिए जाने का जिक्र करते हुए उमर ने कहा कि अगर उचित विश्लेषण और उचित सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर ऐसा किया जाता तो यह ठीक था।
उन्होंने कहा, “लेकिन हमने देखा है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा मुहैया कराना और वापस लेना दोनों ही काफी हद तक राजनीतिक विषय है। ऐसा राजनीतिक कारणों से किया जाता है। इसलिए मुझे लगता है कि इससे बचने की जरूरत है।”
भाषा पारुल