जम्मू-कश्मीर में मैसेजिंग ऐप को अवरुद्ध करने संबंधी आदेश को रद्द करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज
आशीष सुरेश
- 08 Jul 2024, 07:31 PM
- Updated: 07:31 PM
नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर में ओपन-सोर्स मैसेजिंग ऐप ‘ब्रायर’ को अवरुद्ध करने के केंद्र सरकार के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इसका इस्तेमाल आतंकवादियों द्वारा किए जाने की आशंका है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा हो सकता है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को दरकिनार किया जा सकता है।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अंतरिम आदेश की समीक्षा अवरुद्ध करने संबंधी नियमों की धारा-सात के तहत गठित समिति द्वारा की गई है और जैसा कि पहले बताया गया है, समिति में भारत सरकार के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। याचिकाकर्ता के एक ऐप/सॉफ्टवेयर सहित वैसे 14 ऐप/सॉफ्टवेयर को अवरुद्ध करने के आदेश जारी किए गए हैं, क्योंकि इसका इस्तेमाल आतंकवादियों और उनके समर्थकों द्वारा देश की सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डालने के लिए किया जा रहा था।’’
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता का ऐप केवल जम्मू-कश्मीर में ही अवरुद्ध किया गया है और इसका उपयोग देश के अन्य सभी भागों में किया जा सकता है। उपरोक्त तथ्यों के मद्देनजर, यह न्यायालय वर्तमान याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है। इस तरह याचिका खारिज की जाती है।’’
याचिकाकर्ता सबलाइम सॉफ्टवेयर लिमिटेड ने केंद्र को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत पारित वह आदेश प्रस्तुत करने और प्रकाशित करने का निर्देश देने का अदालत से अनुरोध किया, जिसके तहत उसके ओपन सोर्स मैसेजिंग ऐप ‘ब्रायर’ को अवरुद्ध कर दिया गया था। याचिका में उस आदेश को रद्द करने का भी अनुरोध किया गया।
याचिका में कहा गया कि ‘ब्रायर’ एक ऐसी तकनीक पर काम करता है, जिसमें एक व्यक्ति इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने पर भी सीधे दूसरे व्यक्ति को संदेश भेज सकता है। इसमें कहा गया कि यह तकनीक आपातकालीन, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य त्रासदी के समय आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संकट के समय व्यक्तियों और अधिकारियों के बीच सुचारू संचार को सक्षम बनाती है।
दूसरी ओर, केंद्र के वकील ने दलील दी कि यह सॉफ्टवेयर इंटरनेट कनेक्शन न होने पर भी काम कर सकता है और ऐसी आशंका है कि इसका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी कर रहे हैं।
केंद्र के वकील ने कहा कि इस ऐप का दुरुपयोग किया जा सकता है और यह निश्चित रूप से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता के लिए संभावित खतरा हो सकता है।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि अवरुद्ध करने संबंधी नियमावली के नियम 16 में यह प्रावधान है कि प्राप्त सभी अनुरोधों और शिकायतों तथा उन पर की गई कार्रवाई के संबंध में सख्त गोपनीयता बनाए रखी जाएगी।
भाषा आशीष