झारखंड विधानसभा : विपक्ष के बहिर्गमन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने विश्वास मत हासिल किया
पारुल नरेश
- 08 Jul 2024, 03:30 PM
- Updated: 03:30 PM
(तस्वीरों के साथ)
रांची, आठ जुलाई (भाषा) झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नीत गठबंधन सरकार ने सोमवार को विधानसभा से विपक्षी सदस्यों के बहिर्गमन के बीच विश्वास मत हासिल कर लिया।
राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में मनोनीत सदस्य ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन सहित कुल 45 विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के विधायक वोटिंग के लिए गिनती शुरू होते ही सदन से बाहर चले गए। भाजपा के नेतृत्व वाले विपक्ष में भाजपा के 24 और आजसू पार्टी के तीन विधायक हैं।
विश्वास मत हासिल करने के बाद सोरेन ने कहा, “आज एक बार फिर सबको सत्तारूढ़ गठबंधन की एकता और ताकत देखने को मिली। मैं (विधानसभा) अध्यक्ष और गठबंधन के सभी विधायकों का आभार जताता हूं।”
सोरेन ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत गठबंधन 2019 में सत्ता में आने के बाद से संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए शानदार प्रदर्शन कर रहा है और यह आज एक बार फिर देखने को मिला।
विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “सदन में मुझे फिर से देखने के बाद कोई भी भाजपा विधायकों का व्यवहार देख सकता है।” उन्होंने कहा, “भाजपा के पास राज्य के लिए कोई एजेंडा नहीं है। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने उनको (भाजपा) आईना दिखा दिया। आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ेगा।”
विश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी ने आरोप लगाया कि झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार ने पिछले पांच साल में एक भी वादा पूरा नहीं किया है।
इससे पहले, भाजपा सदस्य, विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो से विधायक भानु प्रताप साही को बोलने की अनुमति देने की मांग को लेकर आसन के समीप आ गए। हालांकि, महतो ने उनकी मांग अस्वीकार कर दी।
विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान 75 विधायक सदन में मौजूद थे। निर्दलीय सदस्य सरयू राय ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन में झामुमो, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) शामिल हैं, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के एकमात्र विधायक उसे बाहर से समर्थन दे रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के बाद 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में झामुमो नीत गठबंधन के सदस्यों की संख्या घटकर 45 रह गई है, जिसमें झामुमो के 27, कांग्रेस के 17 और राजद का एक विधायक शामिल है।
झामुमो के दो विधायक-नलिन सोरेन और जोबा माझी अब सांसद बन चुके हैं, जबकि जामा से विधायक सीता सोरेन ने भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया था।
झामुमो ने दो और सदस्यों-बिशुनपुर से विधायक चमरा लिंडा और बोरियो से विधायक लोबिन हेम्ब्रोम को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
इसी तरह, विधानसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या घटकर 24 हो गई है, क्योंकि उसके दो विधायक-ढुलू महतो (बाघमारा) और मनीष जायसवाल (हजारीबाग) अब सांसद बन गए हैं। वहीं, पार्टी ने मांडू से विधायक जयप्रकाश भाई पटेल को कांग्रेस में शामिल होने के बाद निष्कासित कर दिया था।
झारखंड में 81 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में 76 विधायक हैं। हेमंत सोरेन ने तीन जुलाई को सरकार बनाने का दावा पेश किया था, जिसके बाद सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन ने राज्यपाल को 44 विधायकों की समर्थन सूची सौंपी थी।
झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने अपने पूर्ववर्ती चंपई सोरेन के पद से हटने के एक दिन बाद, चार जुलाई को राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में झारखंड उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद हेमंत सोरेन को 28 जून को जेल से रिहा कर दिया गया था। 31 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने से कुछ समय पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
भाषा पारुल