अल नीनो की स्थिति: भारत के लिए क्या हैं इसके मायने
अविनाश
- 08 Jul 2026, 09:37 PM
- Updated: 09:37 PM
(अलिंद चौहान)
नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) वैश्विक मौसम एवं जलवायु एजेंसियों द्वारा आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति मजबूत होने का अनुमान जताए जाने के बाद दुनिया भर, खासकर भारत में सूखे और अन्य चरम मौसमी घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत में सामान्य से कम मानसूनी वर्षा होने की आशंका जताई गई है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने पिछले सप्ताह एक बयान में कहा था कि अल नीनो की स्थिति पहले ही विकसित होने लगी है और इसके तेजी से प्रबल होने का पूर्वानुमान है। उन्होंने कहा, ''इससे दुनिया के कई क्षेत्रों में सूखे और भारी वर्षा की आशंका बढ़ जाएगी तथा स्थल और समुद्र, दोनों जगह हीटवेव (लू) का खतरा भी बढ़ेगा।''
यह अनुमान भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में जून के दौरान वर्षा में करीब 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। सबसे अधिक असर मध्य भारत पर पड़ा, जहां वर्षा में 50.4 प्रतिशत की कमी रही। जून में देश में 1901 के बाद से पांचवीं सबसे कम (99.5 मिलीमीटर) वर्षा दर्ज की गई।
स्थिति तब और चुनौतीपूर्ण बन गई जब भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 30 जून को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि जुलाई में पहले सात से 10 दिनों के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने के बावजूद पूरे महीने दीर्घावधि औसत (एलपीए) का केवल 94 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है।
एलपीए से तात्पर्य किसी क्षेत्र में खास महीने या मौसम के दौरान 30 से 50 वर्षों की लंबी अवधि में दर्ज औसत वर्षा से है। आईएमडी एलपीए की गणना के लिए 1971 से 2020 की अवधि का उपयोग करता है।
हालांकि, जुलाई के पहले आठ दिनों में देश में सामान्य से काफी अधिक वर्षा हुई है। इस अवधि के लिए सामान्य वर्षा 65.1 मिलीमीटर है, जबकि देश में अब तक 92.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि वर्षा की कमी का खतरा पूरी तरह टल गया है। दरअसल, अल नीनो के और मजबूत होने के आसार के कारण यह कमी और बढ़ सकती है। आईएमडी जून में सामान्य से कम वर्षा के प्रमुख कारणों में अल नीनो को पहले ही शामिल कर चुका है।
अल नीनो, एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की तीन अवस्थाओं में से एक है। यह एक जलवायु परिघटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव के साथ वायुमंडलीय परिस्थितियों में भी परिवर्तन होता है।
अल नीनो के कारण भारत में मानसून की वर्षा सामान्य से कम होती है और इससे वैश्विक तापमान बढ़ने का प्रभाव भी पड़ता है। इसके विपरीत अवस्था ला नीना आमतौर पर तापमान कम करने वाली मानी जाती है। ईएनएसओ की तीसरी अवस्था तटस्थ (न्यूट्रल) होती है।
अल नीनो के और मजबूत होने से भारत में फसलों की बुवाई पर गंभीर असर पड़ सकता है, क्योंकि देश में खरीफ की आधे से अधिक खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, धान सहित खरीफ फसलों की बुवाई में उल्लेखनीय कमी आई है। उसने कहा कि जून तक खरीफ फसलों की बुवाई का कुल रकबा 182.72 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 236.46 लाख हेक्टेयर की तुलना में 23 प्रतिशत कम है।
धान के अलावा दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास की बुवाई भी जून 2025 की तुलना में कम रही।
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के फेलो डॉ. विश्वास चितले ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''भारत की कृषि, जल सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानसून है। आईएमडी द्वारा मौसमी वर्षा का संशोधित पूर्वानुमान एलपीए के 90 प्रतिशत किये जाने से सामान्य से कम मानसून की आशंका और बढ़ गई है।''
अल नीनो के विभिन्न क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को एक बैठक की।
पीएमओ ने एक बयान में कहा कि बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि सचिव ने खरीफ मौसम पर अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
बयान में कहा गया, ''262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजना को अद्यतन किया गया है तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए 'भारतीय कृषि में अल नीनो जोखिम प्रबंधन' संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।''
अल नीनो के अधिक प्रभावी होने के कारण सामान्य से अधिक तापमान रहने की आशंका भी जताई जा रही है।
आईएमडी ने पिछले महीने कहा था कि जून सामान्य से अधिक गर्म रहा। जून का औसत अधिकतम तापमान 35.67 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.06 डिग्री अधिक था। यह रिकॉर्ड में 15वां सबसे गर्म जून रहा।
मौसम विभाग ने जुलाई के पूर्वानुमान में कहा है कि पश्चिम-मध्य भारत के कुछ स्थानों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।
विभाग के अनुसार, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।
भाषा अमित अविनाश
अविनाश
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