कोलकाता में बारुईपुर कांड के विरोध में निकाली गई रैली के दौरान तृणमूल और भाजपा कार्यकर्ता भिड़े
पवनेश
- 08 Jul 2026, 08:56 PM
- Updated: 08:56 PM
कोलकाता, आठ जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा बारुईपुर कांड के विरोध में निकाली गई रैली के दौरान टीएमसी की युवा शाखा और भाजपा कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थिति को नियंत्रित किया।
बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के विरोध में टीएमसी ने कोलकाता में यह विरोध रैली आहूत की थी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद टीएमसी की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं की यह रैली दक्षिण कोलकाता के बालीगंज फाड़ी से शुरू हुई। इस रैली को भाजपा कार्यकर्ताओं ने रास्ते में कई बार रोकने की कोशिश की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने "चोर-चोर" के नारे लगाए और हाजरा रोड पर रैली के मार्ग के बीच में खड़े होकर रास्ता रोकने का प्रयास किया।
रैली के दौरान दोनों पक्षों के उग्र कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई हुई। स्थिति पर काबू पाने के लिए सुरक्षा बलों को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा।
प्रदर्शन कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि तृणमूल कांग्रेस को बारुईपुर की घटना पर विरोध रैली निकालने का "कोई अधिकार नहीं है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार "महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले अपराधियों को संरक्षण देती आई है" और अक्सर ऐसी घटनाओं को "छोटी घटना" बताकर टाल देती है। हालांकि, प्रदर्शनकारी तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया।
रैली के शुरुआती स्थल से प्रारंभ हुई झड़पें करीब तीन किलोमीटर लंबे पूरे मार्ग में रुक-रुककर जारी रहीं। पूर्व मुख्यमंत्री के आवास के पास हाजरा क्रॉसिंग पर, जहां रैली समाप्त हुई, हिंसा चरम पर पहुंच गई। हालात को बेकाबू होने से रोकने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हुए हमले की निंदा करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने 'सुनियोजित हिंसा' की, जिसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों पर हमला किया गया, जबकि ''पुलिस मूकदर्शक बनी रही''।
हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने आवास के बाहर ममता बनर्जी उत्तेजित भीड़ को शांत कर वहां से हटाने की कोशिश करती नजर आईं। इस दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को थप्पड़ भी जड़ा, जिसकी राजनीतिक पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी।
ममता ने कहा, ''हमारे पास इस रैली को आयोजित करने के लिए अदालत की अनुमति थी। इसके बावजूद उन्होंने हमारी महिलाओं पर हमला किया। हमारे कई कार्यकर्ताओं के शरीर से खून बह रहा है और मुझे उन्हें बचाने के लिए अपने घर से बाहर आना पड़ा। उन्होंने सुबह मेरे आवास के पास बाइक रैली निकाली और मुझे धमकी दी। वे पूरे रैली मार्ग पर डीजे बजाते रहे और उन्होंने हमारे 'हैंड माइक' भी छीन लिए, जिसकी हमें अदालत से अनुमति मिली थी।''
उन्होंने आरोप लगाया, ''मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि पुलिस भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह काम कर रही है।''
टीएमसी प्रमुख ने भाजपा पर रैली में अराजकता फैलाने के लिए "असामाजिक तत्वों का सहारा लेने" का आरोप लगाया और कहा कि बंगाल की जनता ऐसा बदलाव नहीं चाहती थी।
बनर्जी ने कहा, ''मैं पुलिस पर आरोप लगा रही हूं कि जब अदालत का आदेश था, तब भी वह रैली को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की जिम्मेदारी निभाने में विफल रही। इसके बजाय, उन्होंने भाजपा को हमारी रैली पर हमला करने की अनुमति दी, उन्हें हमारे रैली मार्ग पर मंच स्थापित करने और डीजे बजाने की इजाजत दी।''
उन्होंने पुलिस के इस रवैए को अदालत की अवमानना के समान बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में आने के दो महीने के भीतर ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में 14 से अधिक महिलाओं के साथ बलात्कार, यातना और हत्या की घटनाएं हुई हैं।
दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि बंगाल की जनता ने टीएमसी की अहंकार और तुष्टिकरण पर टिकी राजनीति को पूरी तरह नकार दिया है।
भट्टाचार्य ने कहा, ''ममता बनर्जी एक अनुभवी राजनीतिक कार्यकर्ता हैं जिन्हें सड़कों पर चलना पसंद है। हमने उन्हें ऐसा करने से नहीं रोका है। लेकिन टीएमसी ने 15 साल पहले जनता द्वारा जताए गए भरोसे के साथ विश्वासघात किया। उन्होंने राज्य की हिंसक राजनीतिक संस्कृति को बदलने नहीं दिया।''
इससे पहले, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कोलकाता पुलिस के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें रैली की अनुमति नहीं दी गई थी। अदालत ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ तृणमूल कांग्रेस को इस आयोजन की इजाजत दी थी।
आम लोगों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए अदालत ने रैली के मार्ग में थोड़ा बदलाव किया था और इसका समापन बिंदु शरत बोस रोड पर स्थित लैंसडाउन मार्केट के बजाय हाजरा क्रॉसिंग तय किया था।
अदालत ने रैली के समय में भी बदलाव करते हुए इसे दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक कर दिया था, जबकि पहले यह दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक प्रस्तावित थी।
इसके साथ ही लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए केवल हाथ वाले माइक का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने रास्ते का एक हिस्सा यातायात के लिए खुला रखने और रैली में शामिल लोगों की संख्या 1,000 से अधिक न होने की शर्त भी रखी थी।
रैली में शामिल तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने अपने समर्थकों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की और भाजपा पर कार्यक्रम में व्यवधान डालने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का आरोप था कि तृणमूल कांग्रेस युवा इकाई के कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थकों को उकसाया। इस रैली के कारण दक्षिण कोलकाता के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित हुआ।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि भारी सुरक्षा के बीच रैली के हाजरा की ओर बढ़ने के दौरान स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में रही।
पुलिस ने बताया कि बारुईपुर नाबालिग दुष्कर्म और हत्या मामले के मुख्य आरोपियों में से एक प्रभास मंडल मंगलवार देर रात एक कथित पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
उसका दावा है कि अपराध के दृश्य को दोबारा समझने (क्राइम सीन रीक्रिएशन) की प्रक्रिया के दौरान उसने एक पुलिसकर्मी से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की थी।
जबकि दूसरे फरार आरोपी कबीर मोल्ला को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी के साथ इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या चार हो गई है। मंडल, आनंद सरदार और दिबाकर सरदार को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि मंडल मुठभेड़ मामले में पुलिस अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों की फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। साथ ही, मौके पर मौजूद अधिकारियों के बयानों को दर्ज कर उनका मिलान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जांचकर्ता दक्षिण 24 परगना जिले के उस स्थान का दौरा कर साक्ष्य जुटाएंगे और यह भी पता लगाएंगे कि गोली चलाने वाले अधिकारी और आरोपी के बीच कितनी दूरी थी।
एक अधिकारी ने कहा, "जांचकर्ता उस स्थान का निरीक्षण करेंगे, जहां पुलिसकर्मियों को आरोपी पर गोली चलानी पड़ी थी और वहां से साक्ष्य जुटाएंगे। पुलिसकर्मियों द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उनका मिलान कर सत्यापन किया जाएगा।"
भाषा सुमित पवनेश
पवनेश
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