बिहार सरकार अब स्वत: कराएगी मृत रैयतों की जमाबंदी अपडेट, गांव-गांव जाकर होगी पहचान: मंत्री
राजकुमार
- 06 Jul 2026, 06:24 PM
- Updated: 06:24 PM
पटना, छह जुलाई (भाषा) राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बिहार सरकार ने कहा है कि अब मृत जमाबंदी रैयतों के उत्तराधिकारियों को अपने नाम से दाखिल-खारिज कराने के लिए वर्षों तक आवेदन देने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।
सरकार ने कहा कि राजस्व कर्मचारी स्वयं गांव-गांव जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और स्वत: संज्ञान लेकर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू कराएंगे।
इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव ने सोमवार को सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और समाहर्ताओं को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि सरकार की मंशा है कि किसी भी परिवार को केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक विलंब के कारण उसके वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं रहना पड़े।
उन्होंने कहा कि मृत रैयतों के नाम पर वर्षों तक जमाबंदी लंबित रहने से पारिवारिक विवाद, मुकदमेबाजी तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं, अब सरकार स्वयं पहल कर ऐसे मामलों का निस्तारण कराएगी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक राजस्व कर्मचारी के लिए अपने अधीन प्रत्येक मौजा में हर माह कम-से-कम पांच मृत जमाबंदी धारकों की जमाबंदी अद्यतन कराना अनिवार्य होगा।
जायसवाल ने कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित मौजा के सभी मृत जमाबंदी मामलों का निस्तारण नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की पूर्ति सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित अंचल अधिकारी की होगी।
मंत्री ने बताया कि राजस्व कर्मचारी जन्म-मृत्यु निबंधन अभिलेख, चौकीदारी रिपोर्ट, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर मृत जमाबंदी धारकों की पहचान करेंगे ।
उन्होंने कहा कि आवश्यक जांच के बाद उत्तराधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे तथा यदि निर्धारित समय के भीतर बंटवारे से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते हैं, तब भी केवल उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
जायसवाल के अनुसार पूरी प्रक्रिया 'बिहारभूमि' पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन संपन्न होगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सूचना-आधारित उत्तराधिकार दाखिल-खारिज मामलों की नियमित निगरानी की जाए।
मंत्री ने कहा कि अंचल अधिकारी प्रत्येक माह लक्ष्य निर्धारित करेंगे, जबकि अपर समाहर्ता और भूमि सुधार उप समाहर्ता हर माह के प्रथम सप्ताह में अंचलवार समीक्षा करेंगे। मंत्री ने कहा कि साप्ताहिक समीक्षा बैठकों में भी इन मामलों की प्रगति की अनिवार्य समीक्षा होगी।
उन्होंने इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ लागू करने का वादा करते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही, उदासीनता या निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भाषा कैलाश
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